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© UNICEF/Bruno Amsellem/Divergence

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 4 फ़रवरी 2022

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

  • कोविड-19 के कारण उभरी टैलीवर्किंग के कुछ फ़ायदे, तो हैं नुक़सान भी, सरकारों व नियोक्ताओं से ध्यान देने की पुकार.
  • कोरोनावायरस का मुक़ाबला करने में बढ़ी चिकित्सा गतिविधियों से, बढ़ा मेडिकल कूड़ा-कचरा भी.
  • यूक्रेन के इर्द-गिर्द तनाव के बीच, सुरक्षा परिषद की गरमा-गरम बैठक.
  • म्याँमार में, सैन्य तख़्तापलट को हुआ एक साल, स्थिति अब भी विस्फोटक.
  • और भारत एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लैफ़्टिनैण्ट जनरल शैलेश तिनईकर, यूएन शान्तिरक्षा मिशन से रिटायर.
     
ऑडियो
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इस तस्वीर में इथियोपिया की, 6 वर्षीय असमाह, अपनी माँ बेदरिया के साथ खड़ी है, इस लड़की को इसलिये महिला ख़तना की हानिकारक प्रथा से गुज़रना पड़ा क्योंकि उसकी माँ को लगा कि ऐसा नहीं किया गया तो वो अपनी बेटी का विवाह सम्मान के साथ नहीं कर सकेगी.
© UNICEF/UNI44873/Getachew

FGM: महिला ख़तना को बन्द करने और लाखों लड़कियों की सुरक्षा के लिये, एकजुटता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष लाखों लड़कियों व महिलाओं को महिला जननाँग विकृति (FGM) के जोखिम से बाहर निकालने के लिये, समाज के तमाम क्षेत्रों और स्तरों पर, सहयोग व एकजुटता से काम लेने का आहवान किया है. महिला जननाँग विकृति को महिला ख़तना भी कहा जाता है.

ख़दीजा मोहम्मद इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र की रहने वाली हैं जिन्हें महिला ख़तना की दर्दनाक प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा.
Sara Elgamal for UNFPA

महिला ख़तना के कारण हर साल अरबों डॉलर का नुक़सान

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि महिला जननांग विकृति यानी महिला ख़तना ना केवल महिलाओं के स्वास्थ्य और अच्छे रहन-सहन के लिए गंभीर ख़तरे पैदा करता है बल्कि इसके कारण विशाल आर्थिक नुक़सान भी होता है. इस दर्द भरी प्रथा के स्याह पक्षों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे रोकने के लिए हर वर्ष 6 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है.