डिजिटल

डिजिटल टैक्नॉलॉजी को वैश्विक भलाई के रूप में बढ़ावा देने पर ज़ोर

कोविड-19 ने विश्व भर में रूपान्तरकारी डिजिटल बदलावों की प्रक्रिया को तेज़ किया है, मगर लाखों-करोड़ों लोग अब भी इण्टरनेट तक पहुँच से दूर हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने 17 मई को ‘विश्व दूरसंचार एवं सूचना विज्ञान दिवस’ के लिये अपने सन्देश में, वैश्विक महामारी और डिजिटल दरारों, दोनों चुनौतियों पर पार पाने और सूचना व संचार टैक्नॉलॉजी को वैश्विक भलाई के लिये बढ़ावा देने के लिये कार्रवाई किये जाने का आहवान किया है.

विज्ञान व प्रोद्योगिकी का फ़ायदा सभी को पहुँचाने के उपायों पर चर्चा

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) ने तमाम लोगों को विज्ञान व टैक्नॉलॉजी के भरपूर फ़ायदे पहुँचाने के मुद्दे पर ज़ोर देने के लिये, दो दिवसीय वर्चुअल बैठक का आयोजिन किया है जो मंगलवार को शुरू हुई. 

टैक्नॉलॉजी क्रान्ति के अनेक लाभ, मगर विषमताओं की रोकथाम ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कहा है कि विकासशील देशों को, कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में अहम औज़ार साबित होने वाली अभूतपूर्व टैक्नॉलॉजी को अपनाना होगा, लेकिन इसके अभाव में, डिजिटलीकरण के दौर में उन्हें पहले से कहीं व्यापक स्तर पर विषमताओं का सामना करना पड़ेगा. व्यापार एवँ विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन (UNCTAD) द्वारा गुरुवार को जारी एक नई रिपोर्ट में डिजिटल समाधानों के बढ़ते इस्तेमाल और उनके प्रभाव की पड़ताल की गई है.  

विश्व रेडियो दिवस: बदलते ज़माने के साथ, बदलता रेडियो

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने शनिवार, 13 फ़रवरी, को ‘विश्व रेडियो दिवस’ पर रेडियो की महत्ता की ओर ध्यान आकृष्ट किया है. यूनेस्को के अनुसार 110 वर्ष पुराने इस माध्यम में बदलती दुनिया और तकनीक के अनुरूप बदलाव अपनाने की क्षमता है, और कोरोनावायरस संकट के दौरान पेश आई चुनौतियों से निपटने में यह एक प्रमुख औज़ार साबित हुआ है.

भारत: ग्रामीण महिलाओं का डिजिटल सशक्तिकरण

भारत में विश्व बैंक के वित्त पोषण से स्व-नियोजित महिला संघ (SEWA), ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल तकनीक में प्रशिक्षित करने की कोशिशों में सक्रिय है. कोविड-19 महामारी के दौरान इसी परियोजना ने महिला कारीगरों के जीवन में व्यवधान नहीं उत्पन्न होने दिया है.

पूर्वाग्रह, नस्लवाद और झूठ: आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के अवान्छित नतीजों से निपटने की दरकार

वैश्विक महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल करने वाले ऐसे शक्तिशाली डिजिटल औज़ारों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिनमें दुनिया को बेहतर बनाने की सम्भावना है. लेकिन दैनिक जीवन में एआई की बढ़ती दखल से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि इस टैक्नॉलॉजी के ग़लत इस्तेमाल से गम्भीर नुक़सान भी हो सकता है. इसी आशंका के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र ने एआई के लिये एक मज़बूत अन्तरराष्ट्रीय नियामन की पुकार लगाई है. 
 

स्कूलों में बदमाशी के ख़िलाफ़ एकजुटता की ज़रूरत

स्कूलों में बढ़ती बदमाशी, साथियों को तंग करने व हिंसा जैसे मामलों की रोकथाम के लिये ठोस क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है. बच्चों को शिक्षा का ऐसा सुरक्षित वातावरण मिलना बेहद आवश्यक है, जिससे वो अपने अनुभव साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर मदद लेने में न हिचकिचाएँ. भारत में यूनेस्को के निदेशक, एरिक फॉल्ट और भारत की राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद -  NCERT के प्रोफ़ेसर हृषिकेश सेनापति का संयुक्त ब्लॉग.

एक डिजिटल खाई: 1.3 अरब बच्चों के पास घर पर शिक्षा के लिये इंटरनेट नहीं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में स्कूल जाने की उम्र – 3 से 17 वर्ष - के बच्चों की लगभग दो तिहाई संख्या – यानि लगभग 1 अरब 30 करोड़ बच्चों के पास अपने घरों पर इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, जिसके कारण वो ऐसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने से वंचित हो रहे हैं जिनकी आधुनिक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिये ज़रूरत होती है.

डिजिटल टैक्नॉलॉजी को बनाना होगा सबसे ज़रूरतमन्दों के लिये कारगर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 ने एक तरफ़ तो डिजिटल टैक्नॉलॉजी और इण्टरनेट के ज़रिये जुड़ाव की महत्ता उजागर की है, वहीं, इसने असमानताएँ भी बढ़ा दी हैं, जिनमें आमदनी में असमानताएँ भी शामिल हैं. यूएन प्रमुख ने मंगलवार को इण्टरनेट गवर्नेन्स फ़ोरम (IGF) के समापन सत्र को दिये एक वीडियो सन्देश में ये बात कही है.

डिजिटल उपलब्धता को सार्वभौमिक बनाने की ज़रूरत

कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में लोगों के कामकाज करने, एक दूसरे के साथ मिलने-जुलने, स्कूल जाने और ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए दुकानों व स्टोरों पर जाने के तरीक़ों में अभूतपूर्व बदलाव ला दिए हैं, ऐसे में ये बेहद ज़रूरी हो गया है कि दुनिया भर में जो लगभग तीन अरब 60 करोड़ लोग ऑनलाइन सुविधाओं से वंचित हैं, उन्हें भी डिजिटल अभाव के अन्तर से उबारा जाए.