बुज़ुर्ग

बुज़ुर्गों की तुलना में, युवजन में ज़्यादा नज़र आती है 21वीं सदी की भावना

एक पीढ़ीगत सर्वेक्षण में सामने आया है कि कोविड-19 महामारी, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, उम्र दराज़ लोगों की तुलना में, ऐसे बच्चों और युवाओं की संख्या 50 प्रतिशत ज़्यादा है जो आज भी मानते हैं कि दुनिया एक बेहतर जगह बन रही है. इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण के नतीजे गुरूवार को प्रकाशित हुए हैं.

कोविड-19: वृद्धजनों के साथ हिंसा व दुर्व्यवहार के मामलों में उछाल

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ क्लॉडिया माहलेर ने बुज़ुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये, 15 जून को विश्व दिवस पर ऐसे उपायों को अपनाने की पुकार लगाई है जिनसे वृद्धजनों के लिये न्याय को सुनिश्चित किया जा सके.

ज़्यादा समावेशी समाज बनाने के लिये बुज़ुर्गों के सुझाव और विचार सुनें, यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के माहौल में, दुनिया ऐसे ग़ैर-आनुपातिक और अत्यन्त गम्भीर प्रभावों का सामना कर रही है जो इस वायरस ने वृद्धजन के स्वास्थ्य, अधिकारों और रहन-सहन पर छोड़े हैं. यूएन महासचिव ने ये विचार हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाए जाने वाले वृद्धजन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर व्यक्त किये हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की सलाह – ख़ुद को 'अपराजेय' ना समझें युवा

वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण से गम्भीर रूप से पीड़ित होने का ख़तरा वृद्धजनों को सबसे अधिक है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवा पीढ़ी को आगाह किया है कि इस महामारी से उन्हें भी पूरी तरह सचेत रहना होगा. कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक एक करोड़, 68 लाख से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और छह लाख, 62 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई है. 

बुज़ुर्गों की बढ़ती आबादी की ज़रूरतें पूरी करना ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र में बुज़ुर्ग आबादी बढ़ रही है. इस क्षेत्र में मुख्य रूप से 11 देश शामिल हैं जिनके नाम हैं – भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, म्यांमार, मालदीव, भूटान, थाईलैंड, उत्तर कोरिया (डीपीआरके) और तिमोर लेस्टे.