भूमि क्षरण

स्वस्थ भोजन के लिये, स्वस्थ पर्यावरण में निवेश की आवश्यकता पर बल

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) के महानिदेशक क्यू डोन्गयू ने जी20 समूह के पर्यावरण मंत्रियों के नाम एक अपील जारी करते हुए, टिकाऊ रहन-सहन में ज़्यादा निवेश किये जाने का आग्रह किया है ताकि विश्व की बढ़ती आबादी के लिये भोजन की व्यवस्था की जा सके. 

मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि मानवता ने प्रकृति के विरुद्ध एक आत्मघाती, निर्मम युद्ध छेड़ा हुआ है जिसे रोका जाना होगा. उन्होंने गुरुवार, 17 जून, को मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए भूमि क्षरण और कृषि, शहरों व बुनियादी ढाँचे के विस्तार से, तीन अरब से अधिक लोगों के जीवन व आजीविका के लिये चुनौती खड़ी हो गई है. 

प्रकृति की पुनर्बहाली हमारी पीढ़ी की नैतिक परीक्षा – यूएन महासभा प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने कहा है कि भूमि, जलवायु, जैवविविधता व प्रदूषण के संकट आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और इन्हें हल करना मौजूदा पीढ़ी के लिये एक बड़ी परीक्षा है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने भावी स्वास्थ्य व पर्यावरणीय ख़तरों से निपटने और भूमि को बहाल किये जाने के लिये वैश्विक प्रयासों को मज़बूत बनाये जाने का आहवान करते हुए महत्वपूर्ण उपायों को साझा किया है.

प्रकृति पर तीन बड़े ख़तरे - एक अरब हैक्टेयर क्षरित भूमि की बहाली पर बल

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण – तीन बड़े ख़तरों से निपटने के लिये, अगले एक दशक में चीन के आकार के बराबर क्षेत्र को बहाल किये जाने की आवश्यकता है. खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए सचेत किया है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढँग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका करीब डेढ़ गुना इस्तेमाल कर रही है.

पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिये प्रकृति में निवेश पर बल

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता और भूमि क्षरण, आपस में जुड़े इन संकटों से सफलतापूर्वक निपटने के लिये, मौजूदा समय से लेकर वर्ष 2050 तक, प्रकृति में कुल आठ ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी.