भारत

यूएन75: भारत-संयुक्त राष्ट्र डाक इतिहास को बयाँ करती वर्चुअल प्रदर्शनी

शनिवार, 24 अक्टूबर 2020, को संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में भारत और संयुक्त राष्ट्र के डाक-टिकटों की एक वर्चुअल प्रदर्शनी शुरू की गई है. इस प्रदर्शनी में संयुक्त राष्ट्र और भारत से सम्बन्धित विषयों पर भारतीय डाक और संयुक्त राष्ट्र डाक प्रशासन द्वारा जारी 53 डाक टिकटों के इतिहास और ये टिकट जारी किये जाने की पृष्ठभूमि दिलचस्प ढंग से पेश की गई हैं. इससे पहले शुक्रवार को भारत ने एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जोकि संयुक्त राष्ट्र और भारत के साझा मूल्यों और विशेष सम्बन्धों को प्रदर्शित करता है.

भारत: बच्चों में होने वाले एचआईवी संक्रमण से जंग - ब्लॉग

भारत में यूएनएड्स ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर बच्चों में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम पर काफ़ी प्रगति की है, लेकिन कोविड-19 ने इसके रास्ते में अनेक चुनौतियाँ भी पेश की हैं. इसी मुद्दे पर, भारत में यूएनएड्स के देश निदेशक, डॉक्टर बिलाली कमारा का ब्लॉग...

भारत: मानवाधिकार संगठनों पर पाबन्दियों और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने भारत सरकार से मानवाधिकारों के पैरोकारों और ग़ैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कार्यकर्ताओं के अधिकारों की गारण्टी सुनिश्चित करने की अपील की है. साथ ही इन कार्यकर्ताओं के लिये ऐसा माहौल भी सुनिश्चित किया जाए जिसमें वो ऐसे अनेक संगठनों व समूहों की ख़ातिर किया जाने वाला काम जारी रखने योग्य हों, जिनका वो प्रतिनिधित्व करते हैं.

कोविड-19: दक्षिण-पूर्व एशिया में अब भी अत्यधिक सतर्कता बरतना ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ज़ोर देकर कहा है कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में कोविड-19 मामलों की संख्या में कुछ गिरावट देखने के बावजूद जवाबी कार्रवाई में ज़रा भी कोताही बरतने से हर हाल में बचना होगा. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक महामारी अब भी निर्बाध रूप से फैल रही है और संक्रमणों के फैलाव को दबाने के लिये कार्रवाई को और भी ज़्यादा मज़बूत बनाए जाने की आवश्यकता है.

कोविड-19: ओड़ीशा में आदिवासी छात्रों की शिक्षा के लिये एक नवीन पहल

कोविड-19 महामारी के कारण दुनियाभर में स्कूल बन्द होने से करोड़ों छात्रों की शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ा – ख़ासतौर पर कमज़ोर समुदायों के बच्चों पर इसकी दोहरी मार पड़ी है और तकनीक तक पहुँच न होने के कारण वो दूरस्थ शिक्षा के लाभ से भी वंचित रहे हैं. वंचित समुदायों के बच्चों तक शिक्षा साधन पहुँचाने के इरादे से, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने भारत सरकार के साथ मिलकर, एक अभिनव शिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है. शिक्षकों के उत्साह से सफल हुए नवीन शिक्षण कार्यक्रम की एक प्रेरक कहानी, विश्व शिक्षक दिवस पर.

कोविड-19: भारत के समक्ष एक 'अभूतपूर्व चुनौती' - जवाबी कार्रवाई में यूएन एजेंसियों का सहयोग

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के व्यापक फैलाव की चपेट में आया भारत एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रहा है. भारत में यूएन की विभिन्न एजेंसियाँ महामारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों में सरकार की मदद कर रही हैं. देश में अब तक कोरोनावायरस संक्रमण के 63 लाख 94 हज़ार से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हुई है, 99 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

भारत: रेलवे पटरियों के पास रहने वाले लाखों लोगों को घरों से बेदख़ल करने पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने भारत की राजधानी दिल्ली में रेलवे पटरियों के किनारे रहने वाले लगभग ढाई लाख लोगों को अपने घरों से बेदख़ल करने के भारतीय सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर चिन्ता व्यक्त की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के क़दम से प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय अधिकार सन्धियों के तहत देशों के दायित्वों का उल्लंघन होगा.

विकलाँगता की बाधाओं से परे...

भारत, भूटान, मालदीव और श्रीलंका के लिये यूनेस्को के निदेशक और भारत में यूनेस्को के प्रतिनिधि, एरिक फ़ॉल्ट मानते हैं कि विकलाँग समुदाय में असीम क्षमताएँ मौजूद हैं और सही क़दम उठाकर उनसे उचित लाभ उठाया जा सकता है. पढ़िये, एरिक फ़ॉल्ट का ब्लॉग...

शिक्षा: गर्म भोजन और कुछ ‘पौष्टिक पाउडर’

विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme) भारत में एक ऐसा अनूठा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके तहत स्कूल के बच्चों को सरकारी अपरान्ह भोजन योजना के साथ-साथ, पूर्ण पोषण सुनिश्चित करने के लिये विटामिन और खनिजों से भरपूर पोषक सहायक ख़ुराक दी जाती है. बच्चे प्यार से इसे ‘जादुई बुरादा’ कहते हैं. 

भारत: बिहार में बाढ़ से राहत में लैंगिक संवेदनशीलता

भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में बढ़ती कोविड-19 महामारी और ऊपर से बाढ़ की मार ने लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं. ख़ासतौर पर किशोरियों और महिलाओं के लिये ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच बहुत कठिन हो गई है. ऐसे में भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफ़पीए) ने महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता सम्बन्धी विभिन्न आवश्यक सेवाएँ देने का बीड़ा उठाया है.