बीजिंग प्लेटफ़ॉर्म

अफ़ग़ानिस्तान की संसद के निचले सदन में महिला सांसद.
UN Photo/Eric Kanalstein

लैंगिक समानता की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) के 64वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा है कि बीजिंग में 25 वर्ष पहले लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण के जिस संकल्प को लिया गया था उसे असरदार और तेज़ गति से लागू किए जाने की ज़रूरत है. आयोग के 64वें सत्र की उदघाटन बैठक सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई लेकिन शेष सत्र को कोरोनावायरस के कारण फ़िलहाल स्थगित कर दिया है.

वर्ष 2016 में मानव तस्करी के 70 फ़ीसदी पीड़ितों में महिलाएं व लड़कियां थी.
© UNICEF/Noorani

लड़कियों के लिए अब भी 'हिंसा व भेदभाव' से भरी है दुनिया

दुनिया में पहले समय की तुलना में मौजूदा समय में लड़कियाँ कहीं ज़्यादा संख्या में और ज़्यादा अवधि के लिए स्कूलों में शिक्षा हासिल करने के लिए जा रही हैं लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी प्रगति के बावजूद उनके लिए समानता और हिंसा रहित माहौल सुनिश्चित करने की मंज़िल अब भी दूर है. विश्व में ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ के 64वें सत्र के ठीक पहले जारी हुई संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), प्लान इंटरनेशनल और यूएन महिला संस्था की एक नई रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है.

महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा सबसे अधिक रूप से व्याप्त मानवाधिकार का हनन है.
UN Women

मानवाधिकार परिषद: महिलाधिकारों का एजेंडा अभी 'अधूरा है'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने 'बीजिंग घोषणापत्र' की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा है कि महिला अधिकारों कि दिशा में हुई प्रगति पर संतुष्ट होकर नहीं बैठा जा सकता. विश्व भर में महिला अधिकारों के सामने चुनौतियों पैदा हो रही हैं.