बांग्लादेश

म्याँमार: राख़ीन प्रान्त में हमलों में बच्चों की मौतों को रोकना होगा - मानवाधिकार विशेषज्ञ

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने मंगलवार को कहा है कि देश के राख़ीन प्रान्त में गाँवों पर सुरक्षा बलों के हमले तुरन्त रोकने होंगे, और तुरन्त संघर्षविराम घोषित होना चाहिये.

म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.

रोहिंज्या संकट का स्थायी समाधान ढूँढने की आवश्यकता पर बल

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने विस्थापित और राष्ट्रविहीन रोहिंज्या समुदाय के लिये अपील जारी करते हुए कहा है कि म्याँमार और अन्य देशों में रह रहे रोहिंज्या समुदाय के लोगों की पीड़ाओं को ना भुलाकर उनकी मुश्किलों का स्थायी हल निकाला जाना होगा. तीन वर्ष पहले अगस्त 2017 में म्याँमार में दमनकारी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनौतियाँ हैं जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और भी गम्भीर बना दिया है.

कोविड-19: रोहिंज्या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जारी रखने के प्रयास

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए दुनिया भर में स्कूलों को बन्द किया गया है. बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में रह रहे शेफ़ुका जैसे बहुत से छात्र इस नई वास्तविकता में ख़ुद को ढालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन बिना बिजली आपूर्ति के शरणार्थी कैम्प में रह कर पढ़ना अन्य किसी स्थान की तुलना में कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है. 

दक्षिण एशियाई देशों में विनाशकारी बाढ़ से लाखों बच्चे प्रभावित

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में कई हफ़्तों से हो रही मूसलाधार बारिश, बड़े पैमाने पर आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के कारण लाखों बच्चे और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के मुताबिक 40 लाख से ज़्यादा बच्चों को तत्काल जीवनरक्षक सहायता प्रदान किये जाने की ज़रूरत है और मौजूदा हालात में अन्य लाखों बच्चों पर भी जोखिम मंडरा रहा है. 

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में बाढ़ से हालात विकट

बांग्लादेश में बाढ़ से बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ है और हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है. भारत के असम राज्य और पड़ोसी देश नेपाल में भी मॉनसून की बारिश के बाद बाढ़ से हालात गम्भीर हैं. 40 लाख से ज़्यादा लोग अभी तक विस्थापित हुए हैं और 189 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है. 
 

'अम्फन': जीवनरक्षक प्रयासों के लिए भारत और बांग्लादेश की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विनाशकारी सुपर सायक्लोन ‘अम्फन’ के दौरान ज़िंदगियों को बचाने और प्रभावी राहत प्रयासों के लिए भारत और बांग्लादेश की सरकारों और जनता की सराहना की है. यूएन प्रमुख ने इस आपदा के पीड़ितों के प्रति अपनी सम्वेदनाएँ जताई हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.

भारत में चक्रवाती तूफ़ान की रफ़्तार धीमी, जान-माल का नुक़सान

विश्व मौसम विज्ञान संगठन में भारत के स्थाई प्रतिनिधि डॉक्टर मृत्युन्जय मोहापात्रा ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के साथ बातचीत में बताया है कि गुरुवार को चक्रवाती तूफ़ान ‘अम्फन‘ की रफ़्तार धीमी पड़ गई थी. बुधवार को सुपर सायक्लोन अम्फन पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हवा के तेज़ झोंके और भारी बारिश लाया जिससे जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है.