बाल स्वास्थ्य

यूनिसेफ सोमालिया कुपोषित बच्चों को पोषण संबंधी हस्तक्षेप सेवाएं प्रदान करता है.
UNICEF/Ismail Taxta

सोमालिया: गम्भीर कुपोषण का शिकार बच्चों के लिये अभूतपूर्व संकट

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सोमालिया में गम्भीर कुपोषण का शिकार हज़ारों लड़कों व लड़कियों पर मौत का जोखिम मंडरा रहा है. इसके मद्देनज़र, यूनीसेफ़ ने दानदाताओं से देश में ज़रूरतमन्द समुदायों तक राहत पहुँचाने के लिये अपना समर्थन बढ़ाने का आग्रह किया है.

अफ़ग़ानिस्तान के हेरात शहर के बाहरी इलाक़ में, विस्थापित लोगों के लिये बनाए गए एक शिविर में, यूनीसेफ़ के पदाधिकारियों का दौरा.
© UNICEF/Sayed Bidel

अफ़ग़ानिस्तान: पाँच वर्ष से कम उम्र के आधे बच्चे गम्भीर कुपोषण की चपेट में

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने मंगलवार को आगाह करते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष के अन्त तक, पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 32 लाख बच्चों के, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण की चपेट में आने की सम्भावना है. एजेंसियों ने ये भी कहा है कि अगर तुरन्त इस समस्या का उपयुक्त समाधान नहीं मुहैया कराया गया तो कम से कम 10 लाख बच्चों की मौत भी हो सकती है.

एक बच्ची, सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े में संघर्ष से सुरक्षित बच निकलने के बाद, इराक़ में पोलियो और खसरा से बचाने वाले टीके लगवाते हुए.
© UNICEF/Anmar Rfaat

महामारी का एक और असर, बाल टीकाकरण में गिरावट

संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों ने कहा है कि कोविड-19 महामारी ने बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिये बचपने में किये जाने वाले टीकाकरण को दरकिनार कर दिया है और वर्ष 2020 के दौरान दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ 30 लाख बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए.

स्कूलों में हिंसा और बदमाशी दुनिया भर में नज़र आती है और इसके कारण बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर व्यापक रूप में प्रभावित होते हैं. इसमें साइबर बदमाशी भी शामिल है.
Unsplash/James Sutton

स्कूलों में बदमाशी के ख़िलाफ़ एकजुटता की ज़रूरत

स्कूलों में बढ़ती बदमाशी, साथियों को तंग करने व हिंसा जैसे मामलों की रोकथाम के लिये ठोस क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है. बच्चों को शिक्षा का ऐसा सुरक्षित वातावरण मिलना बेहद आवश्यक है, जिससे वो अपने अनुभव साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर मदद लेने में न हिचकिचाएँ. भारत में यूनेस्को के निदेशक, एरिक फॉल्ट और भारत की राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद -  NCERT के प्रोफ़ेसर हृषिकेश सेनापति का संयुक्त ब्लॉग.

ब्यूनस आयर्स की मेट्रो ट्रेन में पांच साल कि कियारा सस्ते सामान बेच कर कुछ पैसे जुटा रही हैं.
UNICEF/Sebastian Rich

जलवायु परिवर्तन व बाज़ारी शक्तियों के दबाव से बाल स्वास्थ्य को ख़तरा

विश्व का भविष्य बच्चों में मौजूद संभावनाओं के अनुरूप उनके फलने-फूलने और स्वास्थ्य-कल्याण पर निर्भर है लेकिन उनका बेहतर और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कोई भी देश पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक आयोग ने बुधवार को अपनी नई रिपोर्ट जारी करते हुए बाल एवं किशोर स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन और बाज़ारी शक्तियों के दुष्प्रभाव की तरफ़ ध्यान आकृष्ट किया है.