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बाल संरक्षण

थाईलैण्ड का नोन्ग बुआ लम्फू प्रान्त, जहाँ एक बाल देखभाल केन्द्र पर हुए भयावह हमले में बड़ी संख्या में मौत हुई है.
Unsplash/Robert Eklund

थाईलैंड: बाल केन्द्र पर घातक हमले की अन्तरराष्ट्रीय निन्दा

थाईलैंड के उत्तरी क्षेत्र में एक बाल देखभाल केन्द्र पर एक भयानक हमला हुआ है जिसमें अनेक बच्चों की मौत हो गई है. अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की कड़ी निन्दा हुई है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को कहा कि वो इतने बड़े पैमाने पर गोलीबारी पर हतप्रभ और दुखी हैं.

यूक्रेन की सीमा पार करके परिवारों ने पोलैण्ड में शरण ली है.
© UNICEF/Tom Remp

यूक्रेन: एक महीने से युद्ध जारी, बच्चों की आधी आबादी विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि यूक्रेन में एक महीने से जारी युद्ध के कारण 43 लाख बच्चे विस्थापन का शिकार हुए हैं, जोकि देश में कुल 75 लाख बच्चों की आधी से अधिक आबादी है. इनमें 18 लाख बच्चों ने शरणार्थियों के तौर पर यूक्रेन के पड़ोसी देशों में शरण ली है, जबकि 25 लाख बच्चे घरेलू विस्थापित हैं.

हज़ारों यूक्रेनी नागरिकों ने पड़ोसी देश पोलैण्ड में शरण ली है.
© WFP/Marco Frattini

यूक्रेन संकट: लगभग हर सैकेण्ड, एक बच्चा शरणार्थी बनने के लिये मजबूर

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय राहत एजेंसियों ने बताया है कि यूक्रेन में मौजूदा घटनाक्रम के मद्देनज़र, लगभग हर एक सैकेण्ड में एक बच्चा, युद्ध की वजह से शरणार्थी बनने के लिये मजबूर है. रूसी हमले की शुरुआत से अब तक यूक्रेन छोड़कर, अन्य देशों में शरण लेने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 30 लाख तक पहुँच गई है. 

लेबनान की राजधानी बेरूत में अगस्त महीने में हुए विस्फोट से भारी तबाही हुई थी.
© UNICEF/UN0360171/Choufany

बेरूत विस्फोट: गहरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिये वित्तीय सहारे की दरकार 

लेबनान के बेरूत बन्दरगाह पर तीन महीने पहले हुए भीषण विस्फोट में 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और हज़ारों लोग घायल और बेघर हुए थे. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि प्रभावितों के जीवन को पटरी पर लाने के लिये सहायता धनराशि की ज़रूरत है. 

पूर्वी यूक्रेन में सामाजिक कार्यकर्ता और मनोवैज्ञानिक की टीम बच्चों को पढ़ाई सामग्री वितरित कर रही है.
© UNICEF/Pavel Zmey

कोविड-19: बाल संरक्षण व सामाजिक सेवाओं में व्यवधान बना चुनौती

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण घरेलू हिंसा की रोकथाम और ज़रूरी सहायता सेवाओं में आए व्यवधान से 100 से ज़्यादा देशों मे बच्चे शोषण व दुर्व्यवहार का शिकार होने के जोखिम का सामना कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के एक नए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है.  यूनीसेफ़ ने कहा है कि सरकारों को जल्द दीर्घकालीन उपायों को अपनाते हुए बाल हेल्पलाइन सेवाओं को मज़बूत बनाना होगा और सामाजिक सेवाओं में निवेश करना होगा ताकि बच्चों को इस ख़तरे से बचाया जा सके.

बांग्लादेश के कुरीग्राम ज़िले में एक बच्चा बाढ़ प्रभावित इलाक़े से होकर स्कूल जाते हुए. यह फ़ोटो बांग्लादेश में अगस्त 2016 में आई बाढ़ के दौरान लिया गया था.
UNICEF/Akash

दक्षिण एशियाई देशों में विनाशकारी बाढ़ से लाखों बच्चे प्रभावित

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में कई हफ़्तों से हो रही मूसलाधार बारिश, बड़े पैमाने पर आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के कारण लाखों बच्चे और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के मुताबिक 40 लाख से ज़्यादा बच्चों को तत्काल जीवनरक्षक सहायता प्रदान किये जाने की ज़रूरत है और मौजूदा हालात में अन्य लाखों बच्चों पर भी जोखिम मंडरा रहा है. 

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक 12 वर्षीय बच्चा बिना बचाव पोशाक के ख़तरनाक प्लास्टिक कचरे को बीन रहा है. 
© UNICEF/Parvez Ahmad

कोविड-19: दक्षिण एशिया में 60 करोड़ बच्चों के जीवन में उलट-पुलट

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति के लिए संकट का कारण बन रही है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में देशों की सरकारों से त्वरित  कार्रवाई का आग्रह किया है ताकि एक पूरी पीढ़ी की आशाओं और आकाँक्षाओं को बर्बाद होने से बचाया जा सके. महामारी दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में तेज़ी से फैल रही है जहाँ विश्व की क़रीब एक चौथाई आबादी रहती है.

ऑडियो
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कज़ाख़्सतान में एक पाँच वर्षीय बच्ची अपने घर में खेल रही है. कज़ाख़्सतान में यूनीसेफ़ घरेलू हिन्सा के अन्त के लिए प्रयासरत है.
© UNICEF/Anush Babajanyan

बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा पर रोक लगाने में नाकामी पर चेतावनी

दुनिया में कुल बच्चों की आधी आबादी यानि लगभग एक अरब बच्चे हर साल शारीरिक, यौन और मनोवैज्ञानिक हिंसा का शिकार होते हैं क्योंकि उनकी रक्षा के लिए स्थापित रणनीतियाँ लागू करने में देश विफल रहते हैं. गुरुवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.

आइवरी कोस्ट के एक अस्पताल में नर्सें कोरोनावायरस से बचाव के लिए मास्क और दस्ताने पहन रही हैं.
© UNICEF/Frank Dejongh

कोविड-19: स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ से बाल स्वास्थ्य के लिए गहराया संकट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और ज़रूरी सेवाओं में व्यवधान आया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने गम्भीर हालात के मद्देनज़र आशंका जताई है कि तत्काल उपायों के अभाव में अगले छह महीनों के दौरान हर दिन पॉंच साल से कम उम्र के छह हज़ार बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती है जबकि इन्हें टाला जा सकता है. बच्चों को राहत प्रदान करने के लिए यूएन एजेंसी ने एक अरब 60 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की है. 

स्कूलों में बच्चों के लिए ज़रूरी सेवाओं का इंतज़ाम सुनिश्चित करना अहम बताया गया है.
© UNICEF/Alessio Romenzi

कोविड-19: स्कूल फिर से खोलने के लिए नए दिशा-निर्देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र दुनिया के अनेक देशों में स्कूल बंद किए गए हैं जिससे बच्चों की शिक्षा, संरक्षण और स्वास्थ्य-कल्याण के लिए अभूतपूर्व जोखिम पैदा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने गुरुवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो बताते हैं कि तालाबंदी से प्रभावित एक अरब से ज़्यादा बच्चों के लिए स्कूल फिर किस तरह खोले जा सकते हैं.