बाल अधिकार

विश्व बाल दिवस: हर बच्चे के लिये एक बेहतर भविष्य की कल्पना

शुक्रवार, 20 नवम्बर को ‘विश्व बाल दिवस’ के अवसर पर दुनिया भर में समाजों से हर बच्चे के लिये एक बेहतर भविष्य की फिर से कल्पना करने की पुकार लगाई गई है. वैश्विक समुदाय का आहवान किया गया है कि हर बच्चे के लिये ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना होगा जिसमें सभी बच्चे फल-फूल सकें. 

सुरक्षा परिषद का आग्रह - स्कूलों पर हमले बन्द हों

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने माँग करते हुए कहा है कि दुनिया भर में लड़ाई-झगड़ों, संघर्षों वाले व अशान्त स्थानों पर स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों पर हमले रोके जाने होंगे. ये माँग गुरूवार को जारी सुरक्षा परिषद के अध्यक्षीय वक्तव्य में  उठाई गई है जो हमलों से शिक्षा की सुरक्षा के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े से मेल खाती है.

बाल श्रम के बदतरीन रूपों के ख़िलाफ़ सन्धि पर सार्वभौमिक मोहर

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानि आईएलओ के सभी 187 सदस्य देशों ने दासता, देह व्यापार और तस्करी सहित बाल मज़दूरी के ख़राब रूपों से बच्चों की रक्षा करने वाली सन्धि की सार्वभौमिक पुष्टि कर दी है. वर्ष 2021 को बाल मज़दूरी के अन्त के अन्तरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने की तैयारी है और इस दिशा में प्रगति के लिये यूएन एजेंसी जागरूकता प्रसार के प्रयासों में जुटी है.  एक रिपोर्ट...

एड्स को बच्चों के लिये 'बेवजह मौत' का कारण बनने से रोकना होगा

एचआईवी के ख़िलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएड्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी करके कहा है कि एचआईवी के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई में प्रगति के बावजूद बच्चों में इसकी रोकथाम की कार्रवाई पीछे रह गई है.

कोविड-19: दक्षिण एशिया में 60 करोड़ बच्चों के जीवन में उलट-पुलट

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति के लिए संकट का कारण बन रही है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में देशों की सरकारों से त्वरित  कार्रवाई का आग्रह किया है ताकि एक पूरी पीढ़ी की आशाओं और आकाँक्षाओं को बर्बाद होने से बचाया जा सके. महामारी दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में तेज़ी से फैल रही है जहाँ विश्व की क़रीब एक चौथाई आबादी रहती है.

बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा पर रोक लगाने में नाकामी पर चेतावनी

दुनिया में कुल बच्चों की आधी आबादी यानि लगभग एक अरब बच्चे हर साल शारीरिक, यौन और मनोवैज्ञानिक हिंसा का शिकार होते हैं क्योंकि उनकी रक्षा के लिए स्थापित रणनीतियाँ लागू करने में देश विफल रहते हैं. गुरुवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.

कोविड-19: स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ से बाल स्वास्थ्य के लिए गहराया संकट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और ज़रूरी सेवाओं में व्यवधान आया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने गम्भीर हालात के मद्देनज़र आशंका जताई है कि तत्काल उपायों के अभाव में अगले छह महीनों के दौरान हर दिन पॉंच साल से कम उम्र के छह हज़ार बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती है जबकि इन्हें टाला जा सकता है. बच्चों को राहत प्रदान करने के लिए यूएन एजेंसी ने एक अरब 60 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की है. 

इसराइल संचालित जेलों में बन्दी फ़लस्तीनी बच्चों की रिहाई की पुकार

मध्य पूर्व क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के तीन बड़े अधिकारियों ने इसराइल द्वारा संचालित जेलों में बन्द फ़लस्तीनी बच्चों को रिहा करने का आहवान किया है. उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उन बच्चों का कोविड-19 महामारी के संक्रमण में आने की बहुत ज़्यादा आशंका है. इनका कहना है कि मार्च के अन्त तक के आँकड़ों के अनुसार 194 फ़लस्तीनी बच्चों को बन्दी बनाकर इसराइल द्वारा संचालित जेलों में रखा गया था.

कोविड-19: स्कूल फिर से खोलने के लिए नए दिशा-निर्देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र दुनिया के अनेक देशों में स्कूल बंद किए गए हैं जिससे बच्चों की शिक्षा, संरक्षण और स्वास्थ्य-कल्याण के लिए अभूतपूर्व जोखिम पैदा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने गुरुवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो बताते हैं कि तालाबंदी से प्रभावित एक अरब से ज़्यादा बच्चों के लिए स्कूल फिर किस तरह खोले जा सकते हैं. 

हर चौथा बच्चा अब भी 'अदृश्य', मगर क्यों!

पिछले एक दशक में विश्व में ऐसे बच्चों के अनुपात में 20 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जिनके जन्म का आधिकारिक पंजीकरण किया जाता है, इसके बावजूद पांच साल से कम उम्र के 16 करोड़ से ज़्यादा बच्चों यानी हर चार में से एक बच्चे का पंजीकरण अब भी नहीं हुआ है. अपनी स्थापना के 73 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.