अत्यधिक ग़रीबी

मेडागास्कर में अधिकाँश लोग बेहद निर्धनता में जीवन गुज़ारने के लिये मजबूर हैं.
ILO Photo/Marcel Crozet

वास्तविक समानता के ज़रिये ही, निर्धनता के दुष्चक्र का अन्त सम्भव

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि देशों व समाजों में निर्धनता और विशेषाधिकार के दुष्चक्र जारी हैं, मगर रोकथाम प्रयासों व मौजूदा प्रतिमानों (paradigms) में बदलाव के ज़रिये, और असलियत में समानता सुनिश्चित करके, इन चक्रों को तोड़ा जा सकता है.

म्याँमार के यंगून शहर में, एक बेघर परिवार, जिसे ऐसी कोई भरोसेमन्द व्यवस्था शायद ही उपलब्ध है, जो उसकी मदद कर सके.
ILO Photo/Marcel Crozet

अत्यधिक निर्धनता में धँसे लोगों की संख्या बढ़ने पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार, 17 अक्टूबर, को ‘निर्धनता उन्मूलन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ पर चिन्ता व्यक्त की है कि पिछले दो दशक में पहली बार, अत्यधिक ग़रीबी उभार पर है. 

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में बच्चे एक वर्कशॉप के बाहर खेल रहे हैं.
© UNICEF/Niklas Halle'n

हर छह में से एक बच्चा चरम ग़रीबी में – कोविड-19 से संख्या बढ़ने की आशंका 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व बैंक (World Bank) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 का संकट शुरू होने से पहले ही दुनिया में हर छह में से एक बच्चा यानि लगभग 35 करोड़ 60 लाख बच्चे अत्यधिक निर्धनता में जीवन गुज़ारने के लिये मजबूर थे. मंगलवार को पेश की गई इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि महामारी से आए व्यवधान के कारण हालात और भी ज़्यादा बदतर हो सकते हैं.