असमानता

'21वीं सदी की दुनिया में, दासता स्वीकार्य नहीं'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दासता के समकालीन रूपों के प्रभावों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि इस तरह की घिनौने चलन के लिये 21वीं सदी में कोई जगह नहीं हो सकती. महासचिव ने दासता के उन्मूलन के लिये अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर ये बात कही है, जोकि 2 दिसम्बर को मनाया जाता है.

एशिया प्रशान्त में बड़ी आबादी सामाजिक संरक्षा से वंचित

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में आधी से ज़्यादा आबादी को किसी तरह का सामाजिक संरक्षण हासिल नहीं है जिसके कारण बहुत बड़ी आबादी ख़राब स्वास्थ्य, ग़रीबी, असमानता और सामाजिक बहिष्करण का सामना करने को मजबूर है.

'असमानता हमारे दौर को परिभाषित करती है' – महासचिव का कड़ा 'मण्डेला दिवस सन्देश'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि असमानता एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे दौर को परिभाषित करता है और इसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं व समाजों के तबाह होने का जोखिम पैदा होता है. महासचिव ने शनिवार को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर एक कड़े सन्देश में ये बात कही है.

जलवायु परिवर्तन व बाज़ारी शक्तियों के दबाव से बाल स्वास्थ्य को ख़तरा

विश्व का भविष्य बच्चों में मौजूद संभावनाओं के अनुरूप उनके फलने-फूलने और स्वास्थ्य-कल्याण पर निर्भर है लेकिन उनका बेहतर और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कोई भी देश पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक आयोग ने बुधवार को अपनी नई रिपोर्ट जारी करते हुए बाल एवं किशोर स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन और बाज़ारी शक्तियों के दुष्प्रभाव की तरफ़ ध्यान आकृष्ट किया है.  

दो तिहाई आबादी है 'असमान', व्यापक सुधार की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या के लिए विषमता बढ़ रही है जिससे समाजों में दरारें पड़ने और आर्थिक व सामाजिक विकास के बाधित होने का जोखिम बढ़ रहा है. मंगलवार को जारी विश्व सामाजिक रिपोर्ट 2020 संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक व सामाजिक मामलों के विभाग (डेसा) ने प्रकाशित की है.

भ्रष्टाचार: फ़ौलादी इरादों और असरदार कार्रवाई की दरकार

एक ऐसे समय जब टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दुनिया ‘कार्रवाई के दशक’ की ओर क़दम बढ़ाने के लिए तैयार है, सोमवार को आबूधाबी में आयोजित भ्रष्टाचार-विरोधी सम्मेलन में इस समस्या से निपटने के लिए सभी देशों से एकजुट होने का आग्रह किया गया है ताकि महत्वपूर्ण संसाधनों को धन के ग़ैरक़ानूनी लेनदेन में नष्ट होने से रोका जा सके.

एसडीजी के लिए भारत की सक्रियता

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में सक्रिय योगदान की प्रतिबद्धता दर्ज कराई है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय राजनैतिक मंच में भाग लेने के लिए मुख्यालय में आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर राजीव कुमार से यूएन समाचार ने ख़ास बातचीत की और यही जानना चाहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों में भारत किस तरह और कितना योगदान कर रहा है. रिपोर्टर महबूब ख़ान.

देशों के बीच और भीतर भारी असमानता मगर राहत के संकेत भी

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बहुत से देशों के बीच और देशों के भीतर विभिन्न वर्गों व समाज के ग़रीब तबकों के लोगों में भारी असमानता व्याप्त है. अनेक देशों में ग़रीबी कम करने के प्रयासों में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है. इनमें भारत, कंबोडिया और बांग्लादेश प्रमुख हैं.

समानता और सशक्तिकरण से आसान होगा टिकाऊ विकास का रास्ता

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र सामाजिक एवं आर्थिक आयोग (UNESCAP) के वार्षिक सत्र की शुरुआत हुई है जहां टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडे को पूरा करने के लिए वंचित और हाशिए पर जी रहे समुदायों के सशक्तिकरण पर ज़ोर दिया गया है. टिकाऊ विकास प्रक्रिया में किसी को भी पीछे न छूटने देने के लिए इसे अहम बताया गया है.

टिकाऊ विकास एजेंडे को गति देंगे छह नए पैरोकार

टिकाऊ विकास से जुड़े 2030 एजेंडा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और साझेदार संगठन दुनिया भर में व्यापक पैमाने पर प्रयास कर रहे हैं. इसी कड़ी में छह नई हस्तियों को टिकाऊ विकास लक्ष्यों के पैरोकारों के तौर पर चुना गया है जिनमें भारतीय अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा भी शामिल हैं.