आजीविका

मानवता, पृथ्वी व समृद्धि के लिये वन संरक्षण ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सरकारों और लोगों का आहवान किया है कि वनों की रक्षा करने और वन समुदायों को समर्थन देने के लिये प्रयास तेज़ किये जाने होंगे. यूएन प्रमुख ने, बुधवार, 3 मार्च, को विश्व वन्यजीवन दिवस (World Wildlife Day) के अवसर पर अपने सन्देश में, वन संसाधनों के अरक्षणीय प्रयोग और वन्यजीवों की तस्करी से उपजते ख़तरों के प्रति भी आगाह किया है.  

युद्ध-पीड़ित अफ़ग़ानिस्तान के लिये 1.3 अरब डॉलर की सहायता राशि की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और उसके मानवीय राहत साझीदार संगठनों ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में डेढ़ करोड़ से ज़्यादा ज़रूरतमन्दों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने के लिये एक अरब 30 करोड़ डॉलर की धनराशि की आवश्यकता है. यूएन एजेंसियों के मुताबिक दशकों से हो रही हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं और कोरोनावायरस संकट के सामाजिक-आर्थिक व स्वास्थ्य प्रभावों के कारण अफ़ग़ान जनता गम्भीर चुनौतियोँ से जूझ रही है.   

कोविड-19: स्वास्थ्य, सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों से निपटने में एकजुटता की दरकार

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से दुनिया भर में ना सिर्फ़ मानव जीवन को भीषण नुक़सान हुआ है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य प्रणालियों और कामकाजी दुनिया के लिये एक अभूतपूर्व चुनौती पैदा हो गई है. संयुक्त राष्ट्र की अग्रणी एजेंसियों ने मंगलवार को एक साझा बयान जारी करके मौजूदा हालात की व्यापकता और विकरालता पर चिन्ता ज़ाहिर की है.  

बेरूत विस्फोट: 40 हज़ार इमारतें क्षतिग्रस्त, 70 हज़ार लोग बेरोज़गार

लेबनान की राजधानी बेरूत में बन्दरगाह पर विस्फोट से हुई भारी तबाही के बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और साझीदार संगठन प्रभावितों तक मानवीय राहत पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं. एक अनुमान के मुताबिक बेरूत में 40 हज़ार से ज़्यादा इमारतों को नुक़सान पहुँचा है और हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं. 

समुद्र में फँसे रोहिंज्या समुदाय के लोगों को बचाने की पुकार

सुपर सायक्लोन ‘अम्फन’ ने बंगाल की खाड़ी और अन्डमान सागर में चक्रवाती तूफ़ानों के उग्र मौसम के आगमन का संकेत दे दिया है. आने वाले दिनों में मौसम की चुनौतियों के मद्देनज़र अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने समुद्र में फँसे सैकड़ों रोहिंज्या शरणार्थियों की व्यथा पर चिन्ता ज़ाहिर की है. यूएन एजेंसी का अनुमान है कि 500 लोग अब भी समुद्री मार्ग में फँसे हुए हैं और अपने नियत गंतव्य स्थान तक नहीं पहुँच पा रहे हैं.