आदिवासी समुदाय

कोविड-19: आदिवासी समुदायों में संक्रमण बढ़ने से बढ़ी चिन्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वैसे तो कोविड-19 से हर इन्सान प्रभावित हुआ है लेकिन विश्व के निर्धनतम और निर्बलतम लोगों के लिये इस महामारी का जोखिम ज़्यादा है. वायरस से सबसे अधिक प्रभावितों में आदिवासी समुदाय, विशेषत: अमेरिका क्षेत्र के आदिवासी लोग भी हैं जहाँ अब यह महामारी तेज़ रफ़्तार से फैल रही है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को बताया कि 6 जुलाई तक अमेरिका क्षेत्र में 70 हज़ार आदिवासी लोगों के संक्रमित होने और दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौतें होने की पुष्टि हुई थी.

कोविड-19: स्वास्थ्य मुश्किलों से परे भी जाती है आदिवासी समुदायों की पीड़ा

वैश्विक महामारी कोविड-19 के दन्श से दुनिया के आदिवासी समुदाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और इस बीमारी के नकारात्मक प्रभाव महज़ उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले तात्कालिक असर तक ही सीमित नहीं है. आदिवासी व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के नए स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ खोसे फ़्रांसिस्को काली ज़ाई ने सोमवार को उनकी मुश्किलों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि उनके जीवन-यापन के लिए ज़रूरी संसाधनों के लिए भी संकट खड़ा हो रहा है.

मूल भाषाओं को सहेजना मानव विरासत को सहेजने जैसा

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कहा है कि यूएन के प्रयासों के बावजूद विश्व में आदिवासियों की मूल भाषाएं लुप्त होती जा रही हैं जिसके कारण उनकी पहचान व परंपराओं को ख़तरा पैदा हो रहा है. ‘आदिवासियों की मूल भाषाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय वर्ष' के समापन पर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही है.