संक्षेप में: यमन में खाद्य संकट, हेती में गैंग हिंसा का चक्र
यमन के तटीय इलाके में सरकारी सुरक्षा बलों और हूथी लड़ाकों के बीच हिंसक झड़पों की वजह से 1.5 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं, बाज़ारों में अफ़रातफ़री है और मानवीय सहायता पहुँचाने में चुनौतियाँ हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि देश में नए सिरे से हिंसक टकराव भड़कने से भूख संकट गहराएगा और इसके असर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं.
लड़ाई के कारण, हुदायदाह और ताइज़ के कुछ हिस्सों से सम्पर्क कट गया है, जिससे उन 3.5 लाख लोगों तक पहुँचना कठिन हो गया है जिन्हें पहले राहत दी जा रही थी.
हूथी लड़ाकों के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में मानवीय सहाताकर्मी काम नहीं कर सकते हैं. यूएन महासचिव ने यहाँ कामकाज रोकने के आदेश जारी किए थे.
यमन को विश्व में सबसे बड़े मानवीय संकटों में देखा जाता है और लड़ाई में तेज़ी से पहले भी देश गम्भीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति से जूझ रहा था. 1.8 करोड़ लोगों के पास भरपेट भोजन नहीं है और पाँच वर्ष से कम आयु के 22 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.
यूएन खाद एजेंसी ने बताया है कि जिन इलाक़ों तक पहुँचा जा सकता है, वहाँ हर चार में से तीन घर-परिवार अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में असमर्थ हैं. कुछ ही हफ़्तों में यह संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है.
खाद्य सामान की क़ीमतों में तेज़ उछाल आया है, जबकि अनाज व सब्ज़ियों का सीमित भंडार और उनकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है. विस्थापितों की संख्या बढ़ने से शहरी इलाक़ों और विस्थापन केन्द्रों पर दबाव बढ़ा है. अनेक लोग, बिना भोजन व पानी के कई दिनों तक चलने के बाद वहाँ पहुँचे हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने यमन में अपने सहायता अभियान का दायरा बढ़ाया है और लहाज और ताइज़ में 70 हज़ार से अधिक लोगों को गर्म भोजन व अन्य मदद मुहैया कराई जा रही है.
हेती: गैंग हिंसा की गिरफ़्त में आम लोग
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने आगाह किया है कि हेती में आम नागरिक अब भी आपराधिक गुटों की घातक हिंसा की गिरफ़्त में फँसे हुए हैं.
उन्होंने शुक्रवार को जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद को जानकारी देते हुए आपराधिक गैंग के दमन के लिए पहले अभियान का स्वागत किया, जिसे यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा स्वीकृति दी गई है.
उच्चायुक्त टर्क ने उम्मीद जताई कि इससे हेती में सुरक्षा को मज़बूती देने में मदद मिलेगी, लेकिन इस बल में सुरक्षाकर्मी अभी पर्याप्त संख्या में नहीं है.
इस वर्ष, 1 जनवरी के बाद से अब तक देश में आपराधिक गुटों की हिंसा में 5,700 से अधिक लोगों की या तो जान गई है या फिर वे घायल हुए हैं.
गैंग के सदस्यों ने 230 से अधिक लोगों को अगवा किया है और एक हज़ार से अधिक लड़कियों व महिलाओं का बलात्कार किया जा चुका है. पीड़ितों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
वोल्कर टर्क ने कहा कि हेती में फ़िरौती, लूटपाट और सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाए जाने से आर्थिक गतिविधियों पर भीषण असर हुआ है.
स्थानीय आबादी के लिए हिंसा की चपेट में आने का ख़तरा निरन्तर बना हुआ है, जिससे स्कूलों, अस्पतालों और अति-आवश्यक सेवाओं तक पहुँच पाना कठिन हो गया है.