गहराते तनावों की तपिश में परमाणु जोखिम, 'शीत युद्ध के बाद का सबसे ख़तरनाक क्षण'
विश्व भर में बढ़ते भूराजनैतिक तनावों और ईरान व यूक्रेन में हिंसक टकराव के दौरान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों व उनके दुष्प्रभावों की आशंका से चिन्ताएँ गहरी हुई हैं. इस पृष्ठभूमि में, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश मंगलवार को निरस्त्रीकरण के विषय पर बैठक के लिए एकत्र हुए हैं, जिसे सम्बोधित करते हुए यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि दुनिया, शीत युद्ध की समाप्ति के बाद सबसे बड़े परमाणु जोखिम का सामना कर रही है.
यूएन महासभा में यह उच्चस्तरीय बैठक, 'परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस' के सिलसिले में बुलाई गई है, जिसे हर वर्ष 26 सितम्बर को मनाया जाता है.
इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य, परमाणु हथियारों के कारण उपजने वाले ख़तरों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना और परमाणु शस्त्रों से मुक्त विश्व के साझा लक्ष्य की दिशा में लामबन्द प्रयास करना है.
अहम बिन्दु:
- विश्व भर में, परमाणु हथियारों के जखीरे में कमी लाने के लिए निरन्तर कूटनैतिक प्रयासों के बावजूद अब भी 12 हज़ार से अधिकर हथियार मौजूद हैं.
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के अन्तिम दिनों में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर अगस्त 1945 में परमाणु बम गिराए थे, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी. रिहायशी इलाक़ों में इन हथियारों के इस्तेमाल की ये एकमात्र घटनाएँ हैं.
- इस वर्ष फ़रवरी में, इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के दौरान परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया था.
- मार्च 2022 में, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद परमाणु संयंत्रों के इर्दगिर्द हमलों व सैन्य झड़पों की वजह से चिन्ताएँ गहरी हुईं, जिसके बाद अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने सशस्त्र टकरावों के दौरान नए ऐहतियाती उपायों को साझा किया था, ताकि युद्धक्षेत्र में परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
- वर्ष 2011 में जापान में एक भीषण भूकम्प की वजह से फ़ुकुशिमा परमाणु स्टेशन पर बड़ा हादसा हो गया था, जिसके बाद यूएन एजेंसी ने डेटा की समीक्षा, हालात की निगरानी और एक कार्ययोजना तैयार की थी.
एक बेहद ख़तरनाक क्षण
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बैठक में प्रतिनिधियों को बताया कि शीत युद्ध का अन्त बोने के बाद से हम सबसे ख़तरनाक परमाणु क्षण के साए में मिल रहे हैं. परमाणु हथियारों के जखीरे का विस्तार हो रहा है, परमाणु धमकियों का शोर बढ़ रहा है और अत्याधुनिक टैक्नॉलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से ग़लती होने की आशंका भी.
उन्होंने कहा कि रणनैतिक हथियारों में कमी लाने पर केन्द्रित सन्धि (START) की अवधि समाप्त हो गई है, जोकि चिन्ताजनक है. वहीं, परमाणु हथियारों के अप्रसार के लिए सन्धि के 11वें समीक्षा सम्मेलन में किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन पाई.
“एक ऐसे समय जब उनकी सर्वाधिक आवश्यकता है, इन ख़तरों पर क़ाबू पाने के लिए दशकों के दौरान तैयार किए गए सुरक्षा उपाय अब दरक रहे हैं.” यूएन निरस्त्रीकरण आयोग की ओर से तीन वर्ष की अवधि में कोई पुख़्ता सिफ़ारिशें सामने नहीं आ पाई हैं.
“ये केवल कूटनीति के मोर्चे पर निराशा भर नहीं हैं, बल्कि चेतावनी संकेत हैं... बढ़ते जोखिम और दरकते रक्षा उपाय, केवल आपदा की ओर ले जाने वाला टिकट है.”
यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि निरस्त्रीकरण, तरजीह देना नहीं है, बल्कि यह एक बाध्यकारी क़ानूनी दायित्व है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने परमाणु हथियार सम्पन्न देशों से सम्वाद की ओर लौटने, सुरक्षा नीतियों में इन हथियारों की भूमिका में कमी लाने और पारदर्शिता पर केन्द्रित व विश्वास बढ़ाने वाले उपायों को अपनाने का आग्रह किया है.