परमाणु सुरक्षा व सत्यापन के लिए प्रतिबद्ध: IAEA
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी IAEA के महानिदेशक ने सोमवार को विएना में 70वें आम सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि वैश्विक तनाव और चुनौतियों के बावजूद, “साझा समर्पण की भावना” अब भी एजेंसी के काम को दिशा दे रही है.
अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख रफ़ाएल मारियानो ग्रॉस्सी ने कहा कि साझा समर्पण की यह भावना एजेंसी के काम के कई क्षेत्रों में साफ़ दिखाई देती है. उन्होंने अफ़्रीका में कैंसर विशेषज्ञों को दी जा रही सहायता और प्रशिक्षण का उल्लेख किया. साथ ही यूक्रेन के युद्धग्रस्त इलाक़ों में परमाणु दुर्घटना रोकने के लिए काम कर रहे सुरक्षा विशेषज्ञों के प्रयासों की भी सराहना की.
उन्होंने एजेंसी के परमाणु निरीक्षकों द्वारा ‘पर्दे के पीछे’ किए जा रहे महत्वपूर्ण काम की भी सराहना की.
IAEA का आम सम्मेलन उसकी प्रमुख नीति-निर्धारण संस्था है और इसकी बैठक हर वर्ष सितम्बर में होती है. इस सप्ताह के सम्मेलन में लगभग 4,000 लोगों के शामिल होने की सम्भावना है.
सीरिया और यूक्रेन में प्रगति
रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने सीरिया के परमाणु दायित्वों के पालन की पुष्टि में IAEA की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह बहुपक्षीय सहयोग की अहमियत दर्शाता है. साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि IAEA व संयुक्त राष्ट्र, किस तरह साथ मिलकर ‘चिन्ताजनक मुद्दों को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति’ की ओर ले जा सकते हैं.
उन्होंने यूक्रेन के ज़पोरिझझिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास सातवें स्थानीय युद्धविराम का भी उल्लेख किया, जिसे मॉस्को और कीव के सहयोग से लागू किया गया.
इसका मक़सद जून में बाहरी बिजली आपूर्ति दसवीं बार बाधित होने के बाद ज़रूरी मरम्मत करना था, ताकि परमाणु दुर्घटना के जोखिम को टाला जा सके.
ईरान को लेकर ‘अडिग आशावाद’
रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने स्वीकार किया कि कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा कठिनाइयों, ख़तरों और हिंसक टकराव के बीच, “जब तक हम फिर से मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक न स्थिति में पूर्वानुमान की स्पष्टता होगी, न भरोसा बहाल हो सकेगा.”
उन्होंने ईरान की सुरक्षा चिन्ताओं और मौजूदा कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए कहा कि परमाणु सुरक्षा उपायों पर काम जारी रखना और यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शान्तिपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि इसमें भी प्रगति होगी.”
परमाणु ऊर्जा ही भविष्य
महानिदेशक ने कहा कि दुनिया परमाणु ऊर्जा के शान्तिपूर्ण इस्तेमाल की ओर तेज़ी से बढ़ रही है और कई विकासशील देश इसे अपने आर्थिक विकास के लिए अहम मानते हैं.
उन्होंने कहा कि IAEA प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण एवं परमाणु प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में सहायता देता है, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिलें और वे इसके लाभों से वंचित न रहें.
संशोधित अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2060 तक वैश्विक परमाणु ऊर्जा क्षमता तीन गुना से भी अधिक हो सकती है. बढ़ती बिजली माँग और ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतों के बीच कई देश परमाणु ऊर्जा की ओर रुख़ कर रहे हैं.
रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डेटा केन्द्रों को ऊर्जा उपलब्ध कराने और समुद्री परिवहन क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के सम्भावित इस्तेमाल की ओर भी ध्यान दिलाया. समुद्री मार्गों के ज़रिए दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत व्यापारिक माल की ढुलाई होती है.
उन्होंने कैंसर उपचार, पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों से निपटने और पर्यावरण संरक्षण में IAEA के सहयोग का भी उल्लेख किया. रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने एजेंसी के व्यापक कार्य को “सबसे महान मिशनों में से एक” बताते हुए सदस्य देशों से अपना समर्थन जारी रखने का आहवान किया.
अपरिहार्य भूमिका
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि IAEA का आम सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया “गहरे वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता” के दौर से गुज़र रही है. कमज़ोर पड़ते परमाणु सुरक्षा उपायों के बीच, परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ रहे हैं और परमाणु प्रसार का जोखिम तेज़ होता जा रहा है.
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय परमाणु ऊर्जा उत्पादन में एक बड़े बदलाव की दहलीज़ पर है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक प्रबन्धन और निगरानी की ज़रूरत होगी.
महासचिव का यह सन्देश उनकी ओर से विएना स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की महानिदेशक मोनिका जुमा ने पढ़ा.
अपने सन्देश में महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “दुनिया को आज पहले से कहीं अधिक IAEA की पेशेवर क्षमता, निष्पक्षता और तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत है. इसके लिए सदस्य देशों का पूर्ण समर्थन भी ज़रूरी है.”
उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के पूरी तरह शान्तिपूर्ण होने की पुष्टि के लिए IAEA के साथ पूर्ण सहयोग का आहवान किया. साथ ही, यूक्रेन के ज़पोरिझझिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में किसी आपदा को रोकने में एजेंसी की भूमिका के समर्थन पर भी ज़ोर दिया.
महासचिव ने सदस्य देशों से विकासशील देशों की सहायता के लिए IAEA के तकनीकी सहयोग कोष को नियमित और टिकाऊ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया.