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AI के गम्भीर ख़तरों से निपटने के लिए सख़्त नियम ज़रूरी: मानवाधिकार प्रमुख

एक सूट की आस्तीन में मौजूद एक हाथ गहरे नीले रंग की तकनीकी पृष्ठभूमि पर जुड़े हुए नोड्स, सर्किटरी और बाइनरी अंकों से बने एक चमकते हुए एआई प्रतीक की ओर बढ़ता है।
© Adobe Stock/Ipopba कृत्रिम बुद्धिमत्ता रिकॉर्ड गति से बढ़ रही है.

AI के गम्भीर ख़तरों से निपटने के लिए सख़्त नियम ज़रूरी: मानवाधिकार प्रमुख

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियाँ विकसित करने वाली कम्पनियों के लिए केवल स्वैच्छिक नियम पर्याप्त नहीं हैं. उनके अनुसार, AI से होने वाले नुक़सान को रोकने और स्वायत्त प्रणालियों को मानवीय सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने से बचाने के लिए सख़्त नियमन ज़रूरी है.

मानवाधिकार प्रमुख ने एक खुले पत्र में लिखा, “लगातार अधिक शक्तिशाली AI विकसित करने की मौजूदा दौड़, हमारे जीवन के हर पहलू के लिए कहीं बड़े अस्तित्वगत ख़तरे पैदा कर रही है.”

मानवाधिकार उच्चायुक्त का यह बयान Anthropic के एक पूर्व शोधकर्ता के इस्तीफ़े के छह दिन बाद आया. क्लॉड चैटबॉट विकसित करने वाली इस कम्पनी के शोधकर्ता ने चेतावनी दी थी कि “AI बनाने वाले लोगों को भी यह आशंका है कि इस दशक के अन्त तक यह तकनीक हम सभी की जान ले सकती है.”

जेकब कॉक्सन के इस्तीफ़े और OpenAI व Anthropic से जुड़ी हालिया घटनाओं ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है कि सरकारों को AI का नियमन कितना सख़्त करना चाहिए. दोनों कम्पनियों ने बताया था कि उनके कुछ AI मॉडल परीक्षण के दौरान तय सीमाओं से बाहर निकल गए थे.

अकेले सम्भव नहीं

वोल्कर टर्क ने उन देशों से AI नियमन कड़ा करने का आहवान किया, जहाँ उन्नत AI विकसित करने वाली प्रमुख कम्पनियाँ स्थित हैं. उन्होंने गम्भीर घटनाओं की अनिवार्य रिपोर्टिंग, AI क्षमताओं की स्वतंत्र जाँच और मानवाधिकारों पर इसके प्रभाव के आकलन जैसे उपाय सुझाए.

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उन्होंने सदस्य देशों से बहुपक्षीय संस्थाओं के ज़रिए मिलकर AI शासन व्यवस्था पर वैश्विक सहमति बनाने और इससे जुड़े जोखिमों के बीच मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया.

मानवाधिकार प्रमुख ने लिखा, “कोई भी देश अकेले इस तकनीक को नियंत्रित नहीं कर सकता. कोई कम्पनी यह ख़ुद तय नहीं कर सकती कि दुनिया को कौन से जोखिम स्वीकार करने चाहिए. तकनीकी प्रगति के नाम पर किसी से भी अपने मानवाधिकारों से समझौता करने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए.”

‘एआई की रफ़्तार पर नियंत्रण’

एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डारियो अमोदेई ने शनिवार को We Must Pace the Frontier शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया. 

इसमें उन्होंने कहा कि कम्पनियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विकास जारी रखना चाहिए, लेकिन उसकी रफ़्तार ऐसी हो कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जा सकें और स्वायत्त AI प्रणालियाँ नियंत्रण से बाहर न हों.

OpenAI, Google और xAI के नेताओं ने भी डारियो अमोदेई के प्रस्ताव का समर्थन किया. इसमें AI मॉडलों का स्वतंत्र मूल्यांकन, AI कम्पनियों के बीच बेहतर समन्वय और सरकारों के बीच अधिक सहयोग की बात कही गई है.

वोल्कर टर्क ने इस प्रस्ताव और उद्योग के आत्म-नियमन के प्रयासों का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर बल दिया कि सरकारों को भी AI के नियमन के लिए तत्काल क़दम उठाने होंगे.

सुरक्षा उपाय अहम

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, “जिन देशों में प्रमुख AI कम्पनियाँ हैं, उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे इन्हें जवाबदेह बनाएँ और ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए बाध्य करें.”

वोल्कर टर्क ने कहा कि चीन और अमेरिका AI विकास में सबसे आगे हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को ख़तरनाक होड़ में बदलने से रोकने के लिए साझा अन्तरराष्ट्रीय मानकों और नीतिगत तालमेल की ज़रूरत है.

उन्होंने लिखा, “दोनों देशों को अपने दृष्टिकोण में तालमेल बिठाना होगा, ताकि आपसी प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़, नियमों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने की वजह न बने.”

वोल्कर टर्क के अनुसार, AI से जुड़े जोखिमों और उसके नियमन का आकलन मुख्य रूप से इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उसका मानवाधिकारों पर क्या असर पड़ता है.

उन्होंने कहा कि AI सुरक्षा का मतलब केवल मानवता को विनाश से बचाना नहीं है, बल्कि लोगों, समुदायों, संस्थानों और भावी पीढ़ियों की रक्षा करना भी है.

मुनाफ़े से पहले जनकल्याण

वोल्कर टर्क ने उद्योग जगत की इस दलील को ख़ारिज किया कि AI सुरक्षा उपाय, नवाचार की रफ़्तार धीमी करते हैं. उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के नाम पर किसी को भी अपने मानवाधिकारों से समझौता करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

उनके अनुसार, अनियंत्रित एआई विकास से जीवन, भोजन, निजता, स्वास्थ्य और सुरक्षा के अधिकारों पर ख़तरा बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल दुष्प्रचार एवं असमान स्वचालन को बढ़ाने में होगा या जलवायु संकट से निपटने व बीमारियों के इलाज में - यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कम्पनियाँ और सरकारें इस “निर्णायक मोड़” पर क्या फ़ैसले लेती हैं.

वोल्कर टर्क ने लिखा, “जो पीढ़ी अब वयस्क हो रही है, उसे आज लिए जा रहे फ़ैसलों के नतीजे विरासत में मिलेंगे, जबकि इन फ़ैसलों में उसकी कोई भूमिका नहीं है. इसलिए ज़रूरी है कि ये फ़ैसले पारदर्शी ढंग से और उसके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए लिए जाएँ.”