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ऐल नीन्यो हुआ प्रबल, आने वाले महीनों में पड़ सकती है भीषण गर्मी

एक बुजुर्ग, बिना शर्ट पहने व्यक्ति, गहरी दरारों वाली सूखी धरती के एक विशाल मैदान पर बैठा हुआ है।
© Adobe Stock/Johnstocker अल-नीनो आम तौर पर शुष्क परिस्थितियाँ लाता है, जिससे गम्भीर सूखे और जंगल की आग का ख़तरा बढ़ जाता है.

ऐल नीन्यो हुआ प्रबल, आने वाले महीनों में पड़ सकती है भीषण गर्मी

जलवायु और पर्यावरण

ऐल नीन्यो लगातार प्रबल हो रहा है और अभी अपने चरम पर नहीं पहुँचा है. प्रशान्त महासागर का असाधारण रूप से गर्म पानी इसे और मज़बूत कर रहा है. मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह जलवायु रूझान फ़रवरी 2027 तक बना रहेगा, जिससे आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की आशंका है.

प्रशान्त महासागर में ऐल नीन्यो तेज़ी से मज़बूत हो रहा है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में आने वाले महीनों में भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और मौसम में बड़े बदलाव का ख़तरा बढ़ गया है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के नए पूर्वानुमान के अनुसार, एल नीन्यो पहले ही पूरी तरह विकसित हो चुका है और साल के अन्त तक “बहुत प्रबल” होकर अपने चरम पर पहुँच सकता है.

ऐल नीन्यो के फ़रवरी 2027 तक बने रहने की सम्भावना अब लगभग 100 प्रतिशत है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने इससे पहले एल नीन्यो या उसके ठंडे समकक्ष ला नीन्या के बारे में इतना स्पष्ट पूर्वानुमान कभी जारी नहीं किया था.

एक बड़ी चिन्ता

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उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर की सतह के नीचे असामान्य रूप से गर्म पानी का एक विशाल भंडार मौजूद है, जो आने वाले महीनों में एल नीन्यो को और मज़बूत कर सकता है.

प्रशान्त महासागर के कुछ हिस्सों में जुलाई और अगस्त की शुरुआत में सतह के नीचे पानी का तापमान सामान्य से आठ डिग्री सेल्सियस से भी अधिक था.

इससे संकेत मिलता है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण पहले से गर्म हो चुकी पृथ्वी पर एक बेहद शक्तिशाली जलवायु घटना विकसित हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को एक प्रैस विज्ञप्ति में कहा, “एल नीन्यो हमारी आँखों के सामने और अधिक प्रबल होता जा रहा है.”

उन्होंने कहा, “विज्ञान में किसी सन्देह की गुंजाइश नहीं है. पृथ्वी ऐसी परिस्थितियों में पहुँच रही है, जिनका पहले अनुभव नहीं हुआ, और महासागर लगातार गर्म हो रहे हैं.”

ऐल नीन्यो एक प्राकृतिक जलवायु रुझान है, जो आमतौर पर हर दो से सात वर्ष में विकसित होता है. यह तब बनता है जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशान्त महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. इससे वायुमंडलीय परिसंचरण बदल सकता है और हज़ारों किलोमीटर दूर तक बारिश व तापमान के रुझान प्रभावित हो सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने अब तक यह साबित नहीं किया है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ही ऐल नीन्यो को अधिक प्रबल बना रहा है. लेकिन गर्म महासागर और वायुमंडल इसके प्रभावों को अधिक गम्भीर बना सकते हैं, क्योंकि इससे चरम मौसम के लिए अधिक गर्मी व नमी उपलब्ध होती है.

ताज़ा आँकड़ों से स्पष्ट है कि मौजूदा ऐल नीन्यो कितनी तेज़ी से विकसित हो रहा है.

मध्य उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर के तापमान को मापने वाला नीन्यो 3.4 सूचकांक मई से जुलाई के बीच औसतन सामान्य से 1.5°C अधिक रहा. जुलाई में यह 2°C तक पहुँचा और जुलाई के अन्त से अगस्त के मध्य तक साप्ताहिक आँकड़े 2.6°C तक पहुँच गए.

गर्मी समुद्र की सतह से काफ़ी नीचे तक फैली हुई है. यह संकेत है कि यह गर्मी जल्द कम होने वाली नहीं है और ऐल नीन्यो को प्रबल होने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहेगी.

हर क्षेत्र पर अलग असर

बहुत प्रबल ऐल नीन्यो का मतलब यह नहीं है कि हर क्षेत्र में एक जैसी आपदाएँ आएँगी.

हालाँकि, सितम्बर से नवम्बर के बीच दुनिया के लगभग हर हिस्से में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है.

बांग्लादेश के तट के पास सुनहरे आकाश में डूबते सूरज को प्रतिबिंबित करती समुद्री लहरों का निम्न-कोण दृश्य, जिसमें दूर किनारे पर छोटी नावें दिखाई दे रही हैं।
© WMO/Ahnaf Ibne Nasir बांग्लादेश के कुआकाटा में डूबते सूरज की गर्म रोशनी के बीच उठती लहरें, जल और वायुमंडल के बीच गतिशील परस्पर क्रिया को दर्शाती हैं.

बारिश के रुझान भी बदल रहे हैं. कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का ख़तरा बढ़ सकता है, जबकि अन्य जगहों पर सूखे की आशंका अधिक होगी.

अन्य जलवायु कारक इस स्थिति को और जटिल बना सकते हैं. हिन्द महासागर डाइपोल का सकारात्मक चरण विकसित होने का भी अनुमान है, जिसमें हिन्द महासागर का पश्चिमी हिस्सा सामान्य से अधिक गर्म और पूर्वी हिस्सा अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है. इससे बारिश के रुझान प्रभावित हो सकते हैं. साथ ही, उष्णकटिबन्धीय अटलांटिक महासागर के भी असामान्य रूप से गर्म बने रहने का अनुमान है.

इन सभी जलवायु रुझानों के मिले-जुले असर के कारण किसी एक देश में ऐल नीन्यो के प्रभाव का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है. लेकिन कुल मिलाकर जलवायु जोखिम बढ़ने के संकेत हैं.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की प्रमुख सेलेस्ते साउलो ने कहा, “स्पैनिश में ऐल नीन्यो का अर्थ भले ही ‘छोटा लड़का’ है, लेकिन यह दुनिया भर के समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं को भारी झटका दे सकता है.”

उन्होंने कहा, “हम सूखे व बाढ़ से होने वाली तबाही पहले ही देख रहे हैं. ऐल नीन्यो के और प्रबल होने के साथ इसके प्रभाव भी गम्भीर हो सकते हैं.”

अभूतपूर्व तैयारियाँ

इस पूर्वानुमान के बाद बड़े स्तर पर तैयारियाँ शुरू की गई हैं. यह पहली बार है जब WHO ने राष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के साथ मिलकर इतना व्यापक अभियान शुरू किया है, ताकि मौसम पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था को मज़बूत किया जा सके.

इसका मक़सद सरकारों और मानवतावादी संगठनों को कृषि, जनस्वास्थ्य, ऊर्जा और जल आपूर्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना है.

WMO प्रमुख सेलेस्ते साउलो ने कहा, “इस असाधारण ऐल नीन्यो के लिए असाधारण तैयारी और कार्रवाई की ज़रूरत है.”

इससे स्पष्ट है कि ऐल नीन्यो का बड़ा असर अभी सामने आना बाक़ी है. यह पहले ही बेहद प्रबल है और अभी अपने चरम पर नहीं पहुँचा है.

अब सवाल यह नहीं है कि ऐल नीन्यो अधिक प्रबल होगा या नहीं, बल्कि यह है कि इससे कितनी गर्मी बढ़ेगी और कितना व्यवधान पैदा होगा.