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SCO शिखर सम्मेलन: वैश्विक शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ज़ोर

बिश्केक में 2026 एससीओ प्लस बैठक के लिए एससीओ प्रतीक चिन्ह, बर्फ से ढके पहाड़ों और बहुभाषी पाठ को दर्शाने वाली नीली पृष्ठभूमि के सामने लाल कालीन वाले मंच पर सूट पहने पुरुष राष्ट्राध्यक्षों का एक समूह खड़ा है।
© United Nations/Askat Chynaly संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश (दाएँ) किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेते हुए.

SCO शिखर सम्मेलन: वैश्विक शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ज़ोर

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेताओं से वैश्विक शासन व्यवस्था को आज की बदलती दुनिया के अनुरूप बनाने का आहवान किया. उन्होंने कहा कि अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था से बहुपक्षवाद मज़बूत हो सकता है, न्याय बढ़ सकता है और विकासशील देशों की आवाज़ को अधिक जगह मिल सकती है.

किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए महासचिव ने कहा कि वैश्विक शक्ति-सन्तुलन में बदलाव अधिक प्रतिनिधित्व वाली अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ बनाने का अवसर प्रदान करता है. उन्होंने ऐसी वैश्विक व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र यूएन चार्टर के अनुरूप “बिना दोहरे मानदंडों के, सभी के हित में काम करे.”

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियाई राजनैतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी. इसके 10 सदस्य देशों में चीन, भारत, पाकिस्तान, रूस और कई मध्य एशियाई देश शामिल हैं. जनसंख्या और भौगोलिक दायरे के लिहाज़ से यह दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक है.

‘यह अच्छी बात है’

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “हमारी दुनिया लगातार अधिक बहुध्रुवीय होती जा रही है. यह अच्छी बात है और इसे मज़बूत किया जाना चाहिए.”

उन्होंने बहुध्रुवीयता को “वैश्विक शासन और अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में न्याय के लिए ज़रूरी” और “प्रभावी बहुपक्षवाद का मज़बूत आधार” बताया.

महासचिव ने कहा कि हालाँकि वैश्विक शक्ति-सन्तुलन में बड़े बदलाव आए हैं, लेकिन कई अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ अब भी 1945 की भू-राजनैतिक वास्तविकताओं को दर्शाती हैं.

उन्होंने कहा, “हमें संयुक्त राष्ट्र और ब्रेटन वुड्स व्यवस्था सहित समस्त बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार करना होगा, ताकि वे आज की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाएँ और विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व व प्रभाव बढ़े. इससे अधिक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी.”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और SCO की लम्बे समय से चली आ रही साझेदारी की भी सराहना की और संगठन को “बहुपक्षवाद का एक अहम स्तम्भ” बताया.

सहयोग की चार प्राथमिकताएँ

महासचिव ने चार ऐसे क्षेत्रों का ज़िक्र किया, जहाँ संयुक्त राष्ट्र और SCO के बीच सहयोग और बढ़ाया जा सकता है.

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1. वैश्विक सुरक्षा

यूएन महासचिव ने मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता पर चिन्ता जताते हुए कहा कि युद्धविराम और समझौतों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है.

उन्होंने कहा, “मैं अधिकतम संयम बरतने और समझौतों व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करने की अपील करता हूँ.”

उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और अन्तरराष्ट्रीय नौवहन अधिकारों व स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए “शान्तिपूर्ण, न्यायसंगत एवं टिकाऊ समाधान”की ज़रूरत पर बल दिया. इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब अल-मन्देब भी शामिल हैं.

ग़ाज़ा पर महासचिव ने कहा कि युद्धविराम का “सम्मान किया जाना चाहिए” और ग़ाज़ा युद्ध समाप्त करने की व्यापक योजना को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए.

उन्होंने मानवीय सहायता में सभी बाधाएँ दूर करने और क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में बस्तियों के विस्तार व बस्तीवासियों द्वारा हमलों को रोकने की अपनी अपील दोहराई.

उन्होंने कहा, “स्थाई शान्ति केवल दो-राष्ट्र समाधान से ही सम्भव है.” इसके तहत इसराइल और फ़लस्तीन, दो स्वतंत्र, सम्प्रभु और लोकतांत्रिक देशों के रूप में, शान्ति और सुरक्षा के साथ साथ रहें और येरूशेलम/अल-क़ुद्स दोनों की राजधानी हो.

यूक्रेन पर महासचिव ने कहा कि चार वर्ष से अधिक समय से जारी युद्ध का अन्त होना चाहिए और “अब पूर्ण व तत्काल युद्धविराम होना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि इससे अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप “न्यायपूर्ण, टिकाऊ और व्यापक शान्ति” के लिए बातचीत का रास्ता खुल सकेगा.

2. विकास के लिए वित्तपोषण

महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार का आहवान करते हुए कहा कि विकासशील देश अब भी असहनीय क़र्ज़ के बोझ से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हमें वैश्विक वित्तीय ढाँचे में सुधार कर अधिक न्याय एवं समता सुनिश्चित करनी होगी, और उस क़र्ज़ संकट से गम्भीरता से निपटना होगा जो कई विकासशील देशों का दम घोंट रहा है.”

उन्होंने बहुपक्षीय विकास बैंकों से भी विकासशील देशों के समर्थन में “और बड़े, बेहतर व साहसी” क़दम उठाने का आहवान किया.

3. जलवायु कार्रवाई

महासचिव ने चेतावनी दी कि दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस की तापमान सीमा पार करने की ओर बढ़ रही है. उन्होंने उत्सर्जन में तेज़ कटौती और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव की रफ़्तार बढ़ाने का आहवान किया.

विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त में बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “जलवायु कार्रवाई के लिए जलवायु न्याय भी ज़रूरी है.”

महासचिव ने महत्वपूर्ण खनिजों के ज़िम्मेदार प्रबन्धन और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की कि उत्पादक देशों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से अधिक लाभ मिले.

उन्होंने कहा, “अब और लूट नहीं.”

4. कृत्रिम बुद्धिमत्ता

महासचिव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी देशों तक पहुँचना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रभावी सुरक्षा उपायों और अधिक समावेशी वैश्विक शासन व्यवस्था की ज़रूरत है.

ईरान के राष्ट्रपति से मुलाक़ात

शिखर सम्मेलन से इतर, महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से भी मुलाक़ात की.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता के अनुसार, बैठक में महासचिव ने ईरान में जारी हिंसक टकराव और उसके क्षेत्रीय एवं व्यापक मानवीय व आर्थिक प्रभावों पर गहरी चिन्ता जताई.

उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के पूर्ण सम्मान के साथ, बातचीत और वार्ता के ज़रिये संकट का जल्द समाधान निकालने पर ज़ोर दिया. इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आसपास अन्तरराष्ट्रीय नौवहन अधिकारों व स्वतंत्रताओं का सम्मान भी शामिल है.

महासचिव ने व्यापक और टिकाऊ समाधान के लिए कूटनैतिक प्रयासों को समर्थन देने की संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता भी दोहराई.