नेपाल बाढ़: बढ़ती मौतें, महिलाओं और लड़कियों की मुश्किलें गहराईं
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव और राहत अभियान जारी हैं. इस बीच, महिलाओं और लड़कियों की बढ़ती ज़रूरतों तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को लेकर चिन्ता बढ़ रही है.
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) के प्रवक्ता येन्स लेर्के ने बताया कि मंगलवार देर शाम तक नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुँच गई थी, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता हैं.
चीन से लगी हिमालयी सीमा पर हिमनद टूटने से आई इस विनाशकारी बाढ़ का असर सीमा पार चीन में भी पड़ा है, जहाँ 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं.
जोखिम बरक़रार
बाढ़ आए लगभग एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन रैड क्रॉस व रैड क्रिसेंट सोसाइटीज़ का अन्तरराष्ट्रीय महासंघ (IFRC) अब जाकर रसुवा जैसे सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों तक पहुँच पा रहा है.
काठमांडू से IFRC के संचालन प्रबंधक मैट बेडेन ने कहा, “खोज और बचाव अभियान अब भी जारी है और मानसून भी थमा नहीं है.”
उन्होंने चेतावनी दी कि अवरुद्ध जलमार्गों से फिर बाढ़ आने का ख़तरा है, जबकि भूस्खलन का जोखिम भी बना हुआ है.
इस बीच, लोग अपने घरों और बची हुई चीज़ों की तलाश में वापस लौट रहे हैं.
महिलाओं व लड़कियों को मदद की ज़रूरत
UN Women के अनुसार, नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लगभग 43 हज़ार महिलाओं और लड़कियों को तत्काल मानवीय सहायता की ज़रूरत है.
एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन वीमेन की क्षेत्रीय निदेशक क्रिस्टीन अरब ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे साझीदारों ने बताया है कि प्रभावित महिलाओं के लिए भोजन कम पड़ रहा है, सुरक्षित पानी तक पहुँच मुश्किल हो रही है और संरक्षण से जुड़े ख़तरे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि राहत और पुनर्बहाली से जुड़े फ़ैसलों में महिलाओं की भागेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
आपदा ने उजागर की असमानताएँ
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं व विकलांग व्यक्तियों जैसे कई लोग ऊँचे स्थानों तक नहीं पहुँच सके और बाढ़ में बह गए.
बैंकॉक से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब आपदा असमानता से टकराती है, तो पहले से पीछे छूटे लोग अक्सर सबसे पहले उसकी चपेट में आते हैं.”
बाढ़ से पहले भी रसुवा ज़िले में महिलाओं और लड़कियों को पानी लाने के लिए हर दिन घंटों तक लम्बी दूरी तय करनी पड़ती थी.
उन्होंने कहा, “इन महिलाओं ने हमें बताया कि जल प्रणालियों, सड़कों और पुलों के नष्ट हो जाने के बाद सुरक्षित पानी तक उनकी पहुँच पूरी तरह कट गई है.”
पुनर्बहाली में महिलाओं की भूमिका
यूएन वीमेन की वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में महिलाओं के लिए भोजन सबसे तात्कालिक ज़रूरत है.
आपदाओं के दौरान लैंगिक हिंसा, शोषण और मानव तस्करी का ख़तरा बढ़ जाता है. वहीं, बुनियादी ढाँचे और संचार व्यवस्था को हुए नुक़सान से मदद एवं संरक्षण सेवाओं तक पहुँचना भी मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने कहा, “मानवीय राहत कार्रवाई में महिलाओं और लड़कियों के अनुभवों को समझना होगा. यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि सहायता उन तक पहुँचे और नेपाल की पुनर्बहाली में उनकी अहम भागेदारी हो.”
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहद अहम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमायर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बनाए रखना अब भी एक बड़ी प्राथमिकता है.
छह स्वास्थ्य केन्द्र क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं, जबकि दो अन्य तक पहुँचना सम्भव नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसे में “लोगों को सबसे अधिक ज़रूरत के समय ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जान बचाने के तात्कालिक प्रयासों के साथ-साथ, आपदा के बाद पैदा होने वाले स्वास्थ्य ख़तरों को रोकना भी उतना ही ज़रूरी है.
क्रिश्चियन लिंडमायर ने बताया कि बाढ़, विस्थापन, भीड़भाड़ और जमा पानी से बीमारियाँ फैलने का ख़तरा बढ़ सकता है. WHO, प्रभावित और निचले इलाक़ों में निगरानी में मदद कर रहा है, ताकि डेंगू, स्क्रब टाइफ़स व अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलाव पर नज़र रखी जा सके.
WHO ज़रूरी दवाओं, जाँच किट और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की पहचान में भी मदद कर रहा है. साथ ही, संक्रमण की रोकथाम और शवों के सुरक्षित व सम्मानजनक प्रबन्धन पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है.