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परमाणु परीक्षणों पर विराम का आहवान: ‘निरस्त्रीकरण की दिशा में हर क़दम अहम’

हल्के रंग की कमीज के ऊपर गहरे रंग की बनियान पहने और पहचान पत्र वाला नीला डोरी लगाए एक बुजुर्ग जापानी महिला, जिसके छोटे-छोटे भूरे बाल हैं, एक बड़े काले-सफेद भित्ति चित्र के सामने खड़ी है जिसमें हाथ उठाए लोगों की भीड़ को दर्शाया गया है।
© UN News कज़ाख़स्तान के कलाकार और कार्यकर्ता करिपबेक कियूकोव.

परमाणु परीक्षणों पर विराम का आहवान: ‘निरस्त्रीकरण की दिशा में हर क़दम अहम’

शान्ति और सुरक्षा

उनका जन्म बिना हाथों के हुआ था. इसकी वजह कज़ाख़स्तान के सेमिपालातिंस्क (Semipalatinsk) परीक्षण स्थल पर दशकों तक हुए परमाणु विस्फोटों की वह विरासत थीजिसका असर उनके परिवार और उनकी पीढ़ी तक पहुँचा.

कलाकार और परमाणु-विरोधी कार्यकर्ता करिपबेक कियूकोव सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में राजनयिकों, वैज्ञानिकों और परमाणु परीक्षणों से प्रभावित लोगों के साथ एक प्रतीकात्मक पदयात्रा में शामिल हुए. उनका सन्देश वही था, जिसे वह जीवन भर दोहराते आए हैं: उनकी पीढ़ी ने जो पीड़ा झेली, वह किसी और पीढ़ी को न सहनी पड़े.

होंठों और पैरों की उंगलियों से ब्रश पकड़कर चित्र बनाने वाले करिपबेक कियूकोव ने यह पदयात्रा, 29 अगस्त को मनाए जाने वाले परमाणु परीक्षणों के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर महासभा की उच्चस्तरीय बैठक से पहले की.

#StepUp4Disarmament अभियान के तहत आयोजित यह पदयात्रा, महासभा भवन में लगी एक बड़ी तस्वीर के सामने समाप्त हुई, जिसमें लोग सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल को बन्द करने की मांग करते दिखाई देते हैं.

करिपबेक कियूकोव ने यूएन न्यूज़ से कहा, “मैं अपनी कहानी, कज़ाख़स्तान की कहानी, दुनिया के सामने रखना चाहता हूँ.”

456 परमाणु परीक्षण

1949 से 1989 के बीच सेमिपालातिंस्क परीक्षण स्थल पर 456 परमाणु परीक्षण किए गए. आसपास रहने वाले लाखों लोग विकिरण के उच्च स्तर के सम्पर्क में आए, जिसका असर कई परिवारों में पीढ़ियों तक रहा.

करिपबेक कियूकोव ने बताया, “मेरे माता-पिता उन परीक्षणों के प्रत्यक्ष गवाह थे. इन्हीं परीक्षणों के प्रभाव के कारण मेरा जन्म बिना हाथों के हुआ.”

जब कज़ाख़ कवि ओलझास सुलेइमेनोव ने नेवादा-सेमिपालातिंस्क परमाणु-विरोधी आन्दोलन शुरू किया, तब करिपबेक कियूकोव 20 वर्ष के थे.

कैसल रोमियो परमाणु परीक्षण, 1954 में मारशल द्वीपों के बिकीनी एटोल में进行的 अमेरिकी हाइड्रोजन बम परीक्षण से उत्पन्न एक विशाल मशरूम आकार का बादल।
© सीटीबीटीओ/यू.एस. सरकार मार्च 1954 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने मार्शल द्वीपसमूह के बिकिनी एटोल में एक वायुमंडलीय परमाणु परीक्षण किया था.

‘पूरा देश उठ खड़ा हुआ’

करिपबेक कियूकोव याद करते हैं, “पूरा देश सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल के ख़िलाफ़ उठ खड़ा हुआ था.”

यह आन्दोलन जल्द ही कज़ाख़स्तान की सीमाओं से बाहर भी फैल गया.

उन्होंने अमेरिका के नेवादा परमाणु परीक्षण स्थल के पास रहने वाले शोशोनी समुदाय के एक प्रमुख के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. सेमिपालातिंस्क परीक्षण स्थल के द्वार पर उन्होंने फ़्रेंच पोलिनेशिया और जापान से आए कार्यकर्ताओं के साथ शान्तिपूर्ण प्रदर्शनों में भी भाग लिया. फ़्रांस ने फ़्रेंच पोलिनेशिया के मुरुरोआ एटोल में परमाणु परीक्षण किए थे.

हमेशा के लिए बन्द

29 अगस्त 1991 को सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल हमेशा के लिए बन्द कर दिया गया. बाद में कज़ाख़स्तान की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 29 अगस्त को परमाणु परीक्षणों के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया. इस वर्ष परीक्षण स्थल के बन्द होने के 35 वर्ष पूरे हो रहे हैं.

करिपबेक कियूकोव ने कहा, “मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मेरे देश कज़ाख़स्तान ने अपनी सम्प्रभुता की राह इसी शान्तिपूर्ण फ़ैसले से शुरू की. यह हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है और दूसरे देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है.”

हर क़दम मायने रखता है

पदयात्रा में शामिल लोगों को सम्बोधित करते हुए, निरस्त्रीकरण मामलों की संयुक्त राष्ट्र उच्च प्रतिनिधि इज़ूमी नाकामित्सु ने कहा कि 35 वर्ष पहले सेमिपालातिंस्क में छाई ख़ामोशी “संयोग से नहीं आई थी.”

उन्होंने कहा, “यह उन लोगों, समुदायों और नेताओं के दृढ़ संकल्प का नतीजा था, जिन्होंने परमाणु परीक्षणों को नकार दिया.”

संयुक्त राष्ट्र में कज़ाख़स्तान के स्थाई प्रतिनिधि कैरात उमरोव ने कहा कि यह पदयात्रा “यह याद दिलाने का एक सरल लेकिन प्रभावशाली तरीक़ा है कि निरस्त्रीकरण की दिशा में हर क़दम मायने रखता है.”

इस वर्ष व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि (CTBT) को हस्ताक्षर के लिए खोले जाने के 30 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं. CTBT संगठन के कार्यकारी सचिव रॉबर्ट फ़्लॉयड ने युवजन से कहा कि निरस्त्रीकरण “एक ऐसी यात्रा है जो पीढ़ियों तक चलती है.”

उन्होंने कहा, “एक दिन आएगा जब आपकी पीढ़ी नेतृत्व करेगी, फ़ैसले लेगी और बोर्डरूम व सभा कक्षों में होगी. तब हम आपके आगे बढ़ते हर बड़े क़दम का उत्साह बढ़ा रहे होंगे.”

इज़ुमी नाकामित्सु द्वारा एक पेंटिंग, जिसमें कांटेदार तारों से भरी खाई से निकलता हुआ एक हाथ, उसके पास एक गैस मास्क और पृष्ठभूमि में एक मशरूम आकार का बादल दिखाया गया है, एक गैलरी में प्रदर्शित की गई है।
UN News/Kulpash Konyrova क़ज़ाख़स्तान के एक कलाकार करिपबेक कियूकोव ने, परमाणु मुक्त विश्व के लिए, अपनी कलाकृति के ज़रिए जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है.

कोई भी अछूता नहीं

बाद में महासभा को सम्बोधित करते हुए, इज़ूमी नाकामित्सु ने चेतावनी दी कि बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव के बीच परमाणु विस्फोट परीक्षण फिर शुरू होने की आशंका भी बढ़ रही है.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव का सन्देश दोहराते हुए कहा, “दुनिया को फिर कभी किसी परमाणु विस्फोट का साक्षी बनने की नौबत नहीं आनी चाहिए.”

महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि परमाणु विस्फोटों के प्रभाव किसी सीमा तक सीमित नहीं रहते.

उन्होंने कहा, “आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी ‘दूर-दराज़ क्षेत्र’ ऐसा नहीं है, जो परमाणु परीक्षणों के प्रभावों या ख़तरों से पूरी तरह अछूता हो.”

पाँच पीढ़ियों तक कैंसर

वक्ताओं में टीना कॉर्डोवा भी शामिल थीं, जो 1945 में न्यू मैक्सिको में हुए ट्रिनिटी परमाणु परीक्षण से प्रभावित परिवार की चौथी पीढ़ी की सदस्य हैं. उन्होंने भी सुबह की प्रतीकात्मक पदयात्रा में भाग लिया.

उन्होंने महासभा से कहा, “हम दुनिया में विकिरण के सम्पर्क में आने वाले पहले लोगों में थे. बम विस्फोट के बाद कई दिनों तक आसमान से राख गिरती रही.” उन्होंने बताया कि इसके परिणामस्वरूप उनके परिवार की पाँच पीढ़ियाँ कैंसर से प्रभावित हुई हैं.

उन्होंने कहा, “हमें परीक्षण से पहले या बाद में ख़तरे के बारे में कोई चेतावनी नहीं दी गई. इसलिए हम पहले की तरह अपनी ज़मीन पर निर्भर रहकर जीवन जीते रहे.”

अन्त में उन्होंने प्रतिनिधियों से अपील की, “81 वर्षों बाद अब समय आ गया है कि हम अपने परिवारों, बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को परमाणु ख़तरे से मुक्त करें.”

युवजन के लिए सन्देश

करिपबेक कियूकोव के लिए अब यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है. परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ अभियानों में युवजन को हिस्सा लेते देखकर उन्हें हमेशा याद आता है कि “युद्ध का ख़ामियाज़ा सबसे पहले मासूम बच्चों को ही भुगतना पड़ता है.”

उन्होंने कहा, “भविष्य उनके हाथों में है. अगली पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित दुनिया बनाना भी उनकी ज़िम्मेदारी है. हमारे पास अनुभव है जिसे हम उनके साथ साझा कर सकते हैं.”

जब उनसे पूछा गया कि आज के तनावपूर्ण दौर में वह विश्व नेताओं से क्या कहना चाहेंगे, तो करिपबेक कियूकोव ने मेल-मिलाप और साथ मिलकर आगे बढ़ने की अपील की.

उन्होंने कहा, “एक अधिक दयालु और करुणामय दुनिया के लिए हमें पुरानी शिकायतों और अतीत की ग़लतियों को पीछे छोड़ना होगा. अब हमें साथ मिलकर आगे बढ़ना है और नई पीढ़ी को रास्ता दिखाना है.”