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नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 900 के पार, मानवीय ज़रूरतें बढ़ीं

26 अगस्त 2026 को आई अचानक बाढ़ के बाद नुवाकोट जिले में नेपाली ग्रामीण एक कीचड़ भरे नदी किनारे पर खड़े होकर बाढ़ से क्षतिग्रस्त इमारतों और कीचड़ से ढकी जमीन को देख रहे हैं।
© UNICEF/Laxmi Prasad Ngakhusi विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल के मध्य-उत्तरी नुवाकोट ज़िले में जमी कीचड़.

नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 900 के पार, मानवीय ज़रूरतें बढ़ीं

मानवीय सहायता

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हुई हैजबकि 4,200 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने सोमवार को बताया कि अवरुद्ध सड़कों और राजमार्गों के कारण राहत व बचाव दलों के लिए सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचना बेहद मुश्किल बना हुआ है.

मुख्य बिन्दु

  • हाल की अचानक आई बाढ़, अप्रैल 2015 के भूकम्प के बाद नेपाल की सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बन गई है.
  • 65,000 लोगों को स्वच्छ पानी और साफ़-सफ़ाई से जुड़ी आपात सहायता की ज़रूरत है.
  • अब तक 10,000 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जिनमें 252 विदेशी नागरिक शामिल हैं.

बुधवार को चीन से लगी नेपाल की सीमा पर हिमनद टूटने और भूस्खलन से आई यह बाढ़, अप्रैल 2015 के भूकम्प के बाद नेपाल की सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बन गई है. उस भूकम्प में लगभग 9,000 लोगों की मौत हुई थी.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि खोज और बचाव अभियान के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने प्रभावित लोगों की दीर्घकालिक ज़रूरतों का आकलन भी शुरू कर दिया है. इनमें 22 हज़ार से अधिक बच्चों के लिए संरक्षण सहायता भी शामिल है.

प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचना मुश्किल

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी OCHA के अनुसार, प्रभावित इलाक़ों तक पहुँचना अब भी राहत अभियान की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

फ़िलहाल सड़क मार्ग से केवल नुवाकोट तक ही पहुँचा जा सकता है. काठमांडू को सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों से जोड़ने वाले राजमार्ग के कई हिस्से अब भी पूरी तरह अवरुद्ध हैं. कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है.

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि नेपाल सरकार ने 20 हज़ार से अधिक खोज एवं बचाव कर्मियों को तैनात किया है और 15 नगरपालिकाओं में बाढ़ आपात स्थिति घोषित की है.

अब तक 10 हज़ार से अधिक लोगों को बचाया गया है, जिनमें 252 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

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राहत प्रयास तेज़

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता तारिक याशारेविच ने कहा कि भीड़भाड़ और जल, स्वच्छता व स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान से संक्रामक बीमारियों के फैलने का ख़तरा बढ़ गया है.

OCHA के हाल के आकलन में भी बढ़ती मानवीय ज़रूरतों की गम्भीर तस्वीर सामने आई है. पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 2,600 बच्चों को गम्भीर कुपोषण के उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है, जबकि क़रीब 10,500 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण सहायता की ज़रूरत है.

OCHA ने बताया कि 19 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें नौ पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि आठ अन्य का इस्तेमाल, विस्थापित परिवारों को आश्रय देने के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा, स्कूली उम्र के 10 हज़ार से अधिक बच्चों को मनोसामाजिक सहायता की आवश्यकता है.

स्तेफ़ान दुजैरिक के अनुसार, प्रारम्भिक रिपोर्टों से संकेत मिला है कि 107 बच्चे अपने माता-पिता या देखभाल करने वालों से बिछुड़ गए हैं. इसलिए राहतकर्मी उनके परिवारों का पता लगाने और बच्चों को उनसे फिर से मिलाने को प्राथमिकता दे रहे हैं.

ख़तरा बरक़रार

संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के प्रमुख कमल किशोर ने हिमनद टूटने की इस अभूतपूर्व घटना का ज़िक्र करते हुए पिछले सप्ताह कहा था कि “हम अभी भी नुक़सान की पूरी व्यापकता को समझने की कोशिश कर रहे हैं.”

इस आपदा का असर सीमा पार तिब्बत के इलाक़ों में भी पड़ा है. चीनी अधिकारियों के अनुसार, वहाँ कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं.

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि यह आपदा एक बार फिर हमें आगाह करती है कि पर्वतीय क्षेत्र कितने नाज़ुक होते जा रहे हैं. वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय वर्षों से इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते ख़तरों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हम यह भी जानते हैं कि भारी मात्रा में कोयला, तेल और गैस जलाने से जलवायु गर्म हो रही है. मानव गतिविधियों के कारण दुनिया भर में इस तरह की त्रासदियाँ अधिक सम्भावित, बार-बार और गम्भीर होती जा रही हैं, और इनका सबसे अधिक असर अक्सर संवेदनशील समुदायों पर पड़ता है.”

संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की जारी राहत कार्रवाई पर एक नज़र:

  • विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने लगभग 80 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री भेजी है, जिससे क़रीब 9,200 लोगों को 15 दिनों के लिए सहायता मिल सकेगी.
  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने गम्भीर कुपोषण से पीड़ित लगभग 500 बच्चों के लिए उपचारात्मक आहार भेजा है और 15 आपातकालीन चिकित्सा टीमों को तैनात किया है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी सहायता साझीदारों ने नुवाकोट में समन्वय केन्द्र स्थापित किया है, ताकि राहत प्रयासों और सूचना साझा करने में बेहतर तालमेल स्थापित हो सके.

नेपाल में संयुक्त राष्ट्र कार्रवाई के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.