भारत: संगीत से सपनों को पंख देती युवा शरणार्थी
क़ानूनी और आर्थिक बाधाएँ कई युवा शरणार्थियों के सपनों की राह रोक देती हैं. लेकिन दक्षिणी भारत के चेन्नई शहर में 19 वर्षीय श्रीलंकाई शरणार्थी दिशातना, न केवल संगीत के ज़रिये अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अन्य युवजन के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं.
दिशातना ने अपना शुरुआती बचपन एक शरणार्थी शिविर में बिताया. बाद में बेहतर अवसरों की तलाश में उनका परिवार चेन्नई आ गया.
लेकिन शरणार्थी होने से जुड़ी पाबन्दियाँ बनी रहीं.
वह कहती हैं, “मैं सरकारी परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकती और भारत से बाहर भी यात्रा नहीं कर सकती, क्योंकि मेरे पास पासपोर्ट नहीं है. पाबन्दियाँ ज़रूर हैं, लेकिन मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जो सम्भव है, उसी पर ध्यान देना चाहिए.”
संगीत उनके लिए ऐसा ही एक रास्ता बना.
उन्होंने Little Champs संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लिया और दूसरी उपविजेता रहीं. इसके बाद उन्हें संगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के अवसर मिलने लगे.
अपनी कमाई ख़र्च करने के बजाय उन्होंने उसे गायन प्रशिक्षण पर लगाया. परिवार की मदद के लिए गुड़िया फ़ैक्टरी में काम करने वाली उनकी माँ ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया.
अगले 10 वर्षों तक दिशातना ने पढ़ाई के साथ संगीत का प्रशिक्षण जारी रखा.
बड़ी कामयाबी
फ़रवरी 2026 में उनकी मेहनत रंग लाई और वह सुपर सिंगर में प्रथम उपविजेता बनीं.
उनके लिए यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी. इसने दिखाया कि एक युवा शरणार्थी भी प्रतिभा और दृढ़ता के बल पर बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकती है.
अब कई शरणार्थी बच्चे और युवा उनसे मार्गदर्शन लेने आते हैं.
दिशातना उन्हें पढ़ाई जारी रखने, अपनी प्रतिभा निखारने और शरणार्थी पहचान को अपने भविष्य की सीमा न बनने देने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.
पिछले एक वर्ष में उन्होंने चार उभरते गायकों को भी बहुत कम शुल्क पर प्रशिक्षण दिया है, ताकि धन की कमी उनकी राह में बाधा न बने.
हाल ही में विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर चेन्नई में आयोजित UNHCR–SICCI साझेदारी कार्यक्रम में दिशातना ने कहा, “मेरी यात्रा से स्पष्ट है कि शरणार्थी होना आपको सपने देखने से नहीं रोकता. जब एक व्यक्ति सफल होता है, तो उससे कई अन्य लोगों को उम्मीद मिलती है.”
भविष्य की राह
दिशातना फिज़ियोथेरेपी और संगीत, दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहती हैं.
उनका सपना है कि वह बड़े मंचों पर प्रस्तुति दें, एक दिन विदेश यात्रा करें और अपनी आवाज़ के ज़रिये दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करें.
दिशातना की कहानी दिखाती है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर युवा शरणार्थी न केवल अपना भविष्य बदल सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी उम्मीद और बदलाव की राह खोल सकते हैं.
यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.