नेपाल में बाढ़ का क़हर, हताहतों की संख्या में वृद्धि
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही हुई है और इसका असर बेहद व्यापक बताया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, आपदा प्रभावित इलाक़ों से अब तक 538 शव बरामद किए जा चुके हैं.
यह विनाशकारी बाढ़ नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर आई.
माना जा रहा है कि हिमनद टूटने और उसके बाद हुए भूस्खलन से अचानक बाढ़ आई, जिसने पूरी बस्तियों को तबाह कर दिया. पुलों, सड़कों और अन्य अहम बुनियादी ढाँचे को भी भारी नुक़सान पहुँचा है.
संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) ने शुक्रवार को नेपाल सरकार के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक 538लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 3,750 लोगों को बचाया गया है. क़रीब 1,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें कई पर्यटक भी शामिल हैं.
चीन का तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है, जहाँ अधिकारियों के अनुसार लगभग 560 लोग अब भी लापता हैं.
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर लीला पीटर्स याहिया ने आपदा प्रभावित इलाक़े का दौरा करने के बाद बताया कि तलाश और बचाव अभियान जारी है.
उन्होंने कहा, “हम सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में से एक का दौरा कर रहे थे, तभी हमने बचाए गए लोगों को वहाँ पहुँचते देखा. एक ट्रक लोगों से भरा हुआ था और एक पूरे परिवार को कुछ ही देर पहले बचाया गया था. वह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था.”
हालाँकि, बाढ़ की नई चेतावनी जारी होने के बाद उनका दौरा बीच में ही रोकना पड़ा.
राहत प्रयास
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग ज़िलों में राहत दल, आपदा के कारण कटे हुए इलाक़ों तक पहुँचने के लिए चौबिसों घंटे काम कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र आपात खाद्य सामग्री, लगभग 10 हज़ार लोगों के लिए तीन महीने की चिकित्सा किट, तम्बू और अन्य ज़रूरी सामान पहुँचा रहा है. साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाक़ों की उपग्रह तस्वीरें और उनका विश्लेषण भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संक्रामक बीमारियाँ फैलने के ख़तरे को लेकर चेतावनी दी है. जिनीवा में WHO के प्रवक्ता तारिक याशारेविच ने कहा, “इतने बड़े स्तर की आपदा में जब लोग विस्थापित होते हैं, भीड़भाड़ बढ़ती है और पानी, स्वच्छता व स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित होती हैं, तो संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है.”
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता रिकार्डो पिरेस ने बताया कि 18 स्कूल पूरी तरह तबाह हो गए हैं और 20 अन्य क्षतिग्रस्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि “दर्जनों अन्य स्कूल नदी किनारे स्थित हैं और अब भी भारी ख़तरे में हैं.”
इस कारण प्रभावित इलाक़ों में स्कूल जाने की उम्र के लगभग 10 हज़ार बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सहायता की ज़रूरत है.
आपदा प्रभावित क्षेत्र
यह इलाक़ा अप्रैल 2015 में 7.8 तीव्रता के भूकम्प से भी प्रभावित हुआ था, जिसमें 8,800 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.
पिछले अक्टूबर में भी भारी बारिश के कारण पूर्वी और मध्य नेपाल में तेज़ बाढ़ और भूस्खलन हुए थे, जिनसे 30 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे.
संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के प्रमुख कमल किशोर ने इस आपदा की गम्भीरता पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा, “बहुत लम्बे समय से हमने पर्वतीय इलाक़ों में इस तरह की आपदा नहीं देखी. लोगों की ज़िन्दगी, आजीविका, इमारतों, बुनियादी ढाँचे, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली उत्पादन पर इसका भारी असर पड़ा है. हम अब भी नुक़सान के पूरे पैमाने को समझने की कोशिश कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में “ख़तरा बहुत अधिक है और अनिश्चितता भी बनी हुई है.”
उन्होंने कहा, “आपात राहत प्रयासों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह आपदा अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है.”
इस बाढ़ से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र कितने नाज़ुक हैं और पहाड़ी इलाक़ों में कई तरह के ख़तरों के लिए समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था बनाना कितना मुश्किल है.
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के साथ काम कर रहे अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस और रैड क्रिसेंट सोसाइटीज़ महासंघ (IFRC) ने सम्भावित दूसरी बाढ़ को लेकर “गहरी चिन्ता” जताई है.
IFRC के अनुसार, कम से कम 93 हज़ार लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर तत्काल सहायता की ज़रूरत है.