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दक्षिण सूडान के बेंटियू में रात्रि गश्त के दौरान UN के शांति सैनिक एक बख्तरबंद वाहन पर बैठे हैं।

शान्ति स्थापना में संयुक्त राष्ट्र अभियानों की अहम भूमिका

© UN Photo/Gregório Cunha दक्षिण सूडान के बेंटिउ में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक रात के समय गश्त कर रहे हैं.

शान्ति स्थापना में संयुक्त राष्ट्र अभियानों की अहम भूमिका

शान्ति और सुरक्षा

मोज़ाम्बीक़ और कम्बोडिया में भीषण गृहयुद्धों के बाद पहले लोकतांत्रिक चुनाव कराने में मददसिएरा लियोन में हज़ारों बाल सैनिकों को हथियार छोड़ने में सहायता और दक्षिण अफ़्रीका से नामीबिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग - ये दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों की कुछ अहम मिसालें हैंजो देशों को हिंसक टकराव से स्थाई शान्ति की ओर बढ़ने में मदद करती हैं.

दुनिया में 1945 के बाद इस समय सबसे अधिक हिंसक टकराव जारी हैं और युद्धों में जान गंवाने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. साथ ही, शान्ति अभियानों को अब अक्सर समझौतों को लागू करने के बजाय हिंसा को काबू में रखने के लिए तैनात किया जा रहा है. महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को महासभा में कहा कि ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों को इन अभियानों को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलना होगा.

उन्होंने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियान बेहद ज़रूरी हैं, लेकिन अधिक प्रभावी बनने के लिए उन्हें नई वास्तविकताओं के अनुसार ढलना होगा.”

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासचिव ने शान्ति अभियानों के भविष्य पर पहली व्यापक समीक्षा पेश की. यह समीक्षा ‘भविष्य के लिए समझौते’ के अनुरोध पर तैयार की गई है.

उन्होंने सदस्य देशों के सामने कई सिफ़ारिशें भी रखीं कि बदलती ज़रूरतों और भविष्य की चुनौतियों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के शान्ति और सुरक्षा से जुड़े उपायों को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियान क्या हैं?

महासचिव की समीक्षा में संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग तरह के शान्ति अभियानों को शामिल किया गया है. इनमें सुरक्षा परिषद से अधिकृत असैन्य विशेष राजनैतिक मिशन और शान्ति लागू करने वाले अभियान शामिल हैं. इनका दायरा किसी विशेष दूत की सहायता करने वाले दो-सदस्यीय कार्यालय से लेकर बड़े, बहुआयामी शान्तिरक्षा अभियानों तक फैला है.

महासचिव ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियान बहुपक्षीय कार्रवाई का एक अहम माध्यम हैं.”

उन्होंने कहा, “ये संकट कम करने, हिंसक टकराव रोकने, युद्धविराम बनाए रखने और आम लोगों की रक्षा करने में मदद करते हैं. हिंसा से प्रभावित इलाक़ों में ये बातचीत के लिए जगह बनाते हैं और शान्ति की राह खोलते हैं.”

ब्लू हैलमेट्स की भूमिका

1948 से सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों की तैनाती को मंज़ूरी देती रही है, ताकि हिंसक टकराव में शामिल पक्ष राजनैतिक समाधान तक पहुँच सकें, विवादों को हिंसा में बदलने से रोका जा सके और समाधान की तलाश जारी रहने तक सशस्त्र हिंसा को कम किया जा सके. इस समय 11 शान्तिरक्षा मिशन सक्रिय हैं.

अपनी नीली टोपियों के कारण संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों को आम तौर पर ‘ब्लू हैलमेट्स’ कहा जाता है. उनका काम तीन मुख्य सिद्धान्तों पर आधारित है: हिंसक टकराव में शामिल पक्षों की सहमति, निष्पक्षता और आत्मरक्षा या अपने शासनादेश की रक्षा के अलावा बल का इस्तेमाल नहीं करना.

उनका काम बेहद ख़तरनाक भी है. दुनिया भर के मिशनों में अब तक 4,500 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों की मौत हो चुकी है.

उनके योगदान को व्यापक मान्यता मिली है. वर्ष 1988 में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों को “सशस्त्र टकराव रोकने और सम्वाद के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने” में उनकी अहम भूमिका के लिए संयुक्त रूप से नोबेल शान्ति पुरस्कार दिया गया था.

विशेष राजनैतिक मिशन

विशेष राजनैतिक मिशनों में असैन्य कर्मियों को सुरक्षा परिषद के आदेश के तहत तैनात किया जाता है. उनका काम हिंसक टकराव रोकना, शान्ति वार्ताओं में मध्यस्थता करना और राजनैतिक बदलाव की प्रक्रियाओं में सहयोग देना है.

इन मिशनों में बड़ी सैन्य या सशस्त्र टुकड़ियाँ तैनात नहीं होतीं. इसके बजाय वे सरकारों, हिंसक टकराव में शामिल पक्षों, क्षेत्रीय संगठनों और नागरिक समाज के साथ मिलकर काम करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक और शान्तिनिर्माण मामलों के विभाग के अनुसार, 1948 से अब तक ऐसे 167 मिशन तैनात किए गए हैं. वर्ष 2024 में इनमें से लगभग 40 सक्रिय थे.

एसआरएसजी हन्ना टेटेह और लीबियाई महिलाओं का एक समूह रायदा कार्यक्रम पूरा करने के बाद अपने प्रमाण पत्रों के साथ जश्न मना रहा है।
© UNSMIL लीबिया के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि हन्ना टेटेह (बीच में, खड़ी हुईं) ‘राइदात’ कार्यक्रम की प्रतिभागियों के साथ, जहाँ महिला नेतृत्व के महत्व पर चर्चा हुई.

शान्ति लागू करने वाले अभियान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, यूएन चार्टर के अध्याय VII के तहत शान्ति लागू करने वाले अभियानों को मंज़ूरी देती है. इन अभियानों में ज़रूरत पड़ने पर सैन्य बल के इस्तेमाल सहित कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं.

शान्तिरक्षा और विशेष राजनैतिक मिशनों के विपरीत, ऐसे अभियानों के लिए हिंसक टकराव में शामिल सभी पक्षों की सहमति हमेशा ज़रूरी नहीं होती. इनमें संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षक सीधे हिस्सा नहीं लेते.

हाल के वर्षों में हेती, माली और सोमालिया जैसे देशों में संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों ने सुरक्षा परिषद से अधिकृत, लेकिन ग़ैर-यूएन बलों द्वारा चलाए जा रहे ऐसे अभियानों के साथ काम किया है. यूएन मिशन वहाँ राजनैतिक प्रक्रियाओं और व्यापक शान्ति स्थापना प्रयासों में सहयोग देते रहे हैं.

अफ़्रीकी संघ के वे शान्ति सहायता अभियान भी इसी श्रेणी में आते हैं, जिन्हें सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी प्राप्त है.

मौजूदा हालात

महासचिव ने अपनी समीक्षा में चेतावनी दी कि शान्ति अभियानों के लिए मौजूदा हालात पहले से कहीं अधिक कठिन हो गए हैं.

हिंसक टकराव ज़्यादा जटिल हो गए हैं, व्यापक शान्ति समझौते कम हो रहे हैं और वित्तीय संसाधन भी घट रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हाल में शान्तिरक्षा अभियानों के बजट में लगभग 50 करोड़ डॉलर और विशेष राजनैतिक मिशनों के लिए 9 करोड़ 63 लाख डॉलर की कटौती की गई है.

महासचिव ने कहा कि शान्ति अभियान, हिंसक टकराव समाप्त करने के लिए सम्बद्ध पक्षों की राजनैतिक इच्छाशक्ति की जगह नहीं ले सकते. इसके बावजूद कुछ मिशन ऐसे हालात में काम कर रहे हैं, जहाँ बातचीत ठप है और हिंसा बहुत व्यापक है.

उन्होंने कहा, “सदस्य देशों के मज़बूत और एकजुट समर्थन के बिना न तो कोई शान्ति अभियान और न ही संयुक्त राष्ट्र समर्थित कोई राजनैतिक प्रक्रिया सफल हो सकती है.”

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ड्रोन से दुष्प्रचार तक नई चुनौतियाँ

महासचिव ने कहा कि शान्ति अभियानों के शासनादेश स्पष्ट एवं सीमित होने चाहिए और उनके लक्ष्य हासिल करने योग्य हों. साथ ही, उन्हें कम लागत में प्रभावी, जवाबदेह और सदस्य देशों व संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों के साथ मिलकर काम करने वाला होना चाहिए. यौन शोषण और दुर्व्यवहार के आरोपों के मामलों में जवाबदेही पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है.

रिपोर्ट के अनुसार, केवल अभियानों के दायित्व बदलना काफ़ी नहीं होगा. शान्ति अभियानों को अधिक लचीला और तेज़ी से तैनात होने योग्य बनाना होगा, आँकड़ों व ख़तरों के विश्लेषण को मज़बूत करना होगा तथा ड्रोन एवं दुष्प्रचार जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीक अपनानी होगी. शान्तिरक्षकों की सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त उपाय ज़रूरी हैं.

महासचिव ने कोलम्बिया में शान्ति मिशन और कैमरून-नाइजीरिया सीमा विवाद पर काम कर रहे मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि सही परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियान ठोस नतीजे दे सकते हैं.

भविष्य की राह

महासचिव की समीक्षा में “नए भू-राजनैतिक दौर के लिए शान्ति अभियानों को नए सिरे से तैयार करने” के लिए दर्जनों सिफ़ारिशें दी गई हैं.

यह ऐसा दौर है, जब युद्ध बढ़ रहे हैं, वित्तीय संसाधन सीमित हैं और शान्तिरक्षा अभियानों के लिए सदस्य देशों का समर्थन भी बँटा हुआ है.

सिफ़ारिशों में ये बातें शामिल हैं:

  • राजनैतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना.
  • केवल स्पष्ट और विश्वसनीय राजनैतिक उद्देश्य वाले मिशन तैनात करना.
  • मेज़बान देशों के साथ साझेदारी मज़बूत करना.
  • संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की भूमिकाएँ और ज़िम्मेदारियाँ स्पष्ट करना.
  • मिशन शुरू करते समय ही उसके समापन और बदलाव की योजना तैयार करना.

महासचिव के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश, उनकी कमियों के बावजूद, उन्हें हिंसक टकराव समाप्त करने की परिस्थितियाँ बनाने का एक ज़रूरी माध्यम मानते रहें.

उन्होंने कहा, “हमें मिलकर यह तय करना होगा कि किसी मिशन से शुरुआत से लेकर उसके समापन तक क्या-कुछ हासिल किया जा सकता है.”