कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अभिनव इस्तेमाल से मानवाधिकारों को बढ़ावा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की ज़िन्दगी बेहतर बनाने में मदद कर रही है. जमैका में इसने सीखने में कठिनाइयों का सामना कर रहे छह वर्षीय ऐरी के लिए अपनी भाषा में किताब पढ़ना सम्भव बनाया है. इथियोपिया में सोने की खदानों में काम करने वाले मज़दूरों की तपेदिक जाँच अब तेज़ी से हो रही है. वहीं, दुनिया भर में AI की मदद से मीथेन गैस के रिसाव का जल्द पता लगाकर वायु प्रदूषण कम किया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियाँ शान्ति, सुरक्षा और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र AI के सुरक्षित व ज़िम्मेदार इस्तेमाल के लिए वैश्विक नियम और व्यवस्था तय करने के प्रयासों का नेतृत्व भी कर रहा है.
सुलभ किताबें
जमैका में छह वर्षीय ऐरी को सीखने में कठिनाइयाँ हैं, जिससे पढ़ाई उसके लिए चुनौतीपूर्ण हो जाती है. लेकिन अब AI की मदद से मौजूदा पाठ्यपुस्तकों को उसकी ज़रूरतों के अनुसार संवादात्मक डिजिटल रूप में बदला जा रहा है, जिन्हें समझना और इस्तेमाल करना उसके लिए आसान हो.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) में शिक्षा और किशोर विकास की वैश्विक निदेशक पिया रेबेलो ब्रिटो ने यूएन न्यूज़ से कहा, “असली असर यह है कि इससे बच्चों के लिए क्या सम्भव हो रहा है. ऐरी जैसे अनगिनत उदाहरण दिखाते हैं कि जब डिजिटल शिक्षा को हर बच्चे की ज़रूरत के अनुसार तैयार किया जाता है, तो नई सम्भावनाएँ खुलती हैं.”
UNICEF के लिए AI के इस्तेमाल में उन समुदायों को केन्द्र में रखना अहम है, जिनकी वह सहायता करता है.
इसी सोच के तहत एजेंसी ने पैरोकारी समूहों के साथ मिलकर सभी के लिए सुलभ डिजिटल पाठ्यपुस्तकें (ADT) पहल विकसित की है. इसका उद्देश्य दुनिया भर में विकलांगता के साथ जी रहे लगभग 24 करोड़ बच्चों के लिए सुलभ शिक्षण सामग्री की कमी को दूर करना है.
हालाँकि यह कार्यक्रम AI के तेज़ विस्तार से पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन अब AI की मदद से यह 17 देशों में लगभग 20 लाख बच्चों तक पहुँच रहा है. लक्ष्य 2030 तक इसे 50 देशों तक पहुँचाने का है. इस वर्ष छह और देश इस पहल से जुड़ चुके हैं.
मीथेन उत्सर्जन पर लगाम
मीथेन उन प्रमुख गैसों में शामिल है, जो वैश्विक तापमान बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक मार्टिन क्रूस ने कहा, “दुनिया में कहीं भी जलवायु परिवर्तन को लेकर चिन्तित हर व्यक्ति के लिए वैश्विक तापमान की वृद्धि को धीमा करना ज़रूरी है. मीथेन रिसाव को रोकना इस दिशा में आपातकालीन ब्रेक लगाने जैसा है.”
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) उपग्रह आँकड़ों की मदद से बड़े मीथेन रिसाव का पता लगाकर सरकारों और कम्पनियों को इसकी सूचना देता है. इस प्रणाली से 2024 से अब तक इतनी मात्रा में मीथेन उत्सर्जन रोकने में मदद मिली है, जो गैस से चलने वाली 2.4 करोड़ कारों के उत्सर्जन के बराबर है.
UNEP ने 2024 में मीथेन चेतावनी और प्रतिक्रिया प्रणाली (MARS) शुरू की थी. यह प्रणाली AI की मदद से 30 उपग्रहों से मिले आँकड़ों का विश्लेषण करती है और मीथेन के बड़े रिसाव की पहचान करती है.
मार्टिन क्रूस के अनुसार, मीथेन रिसाव का पता लगाने में AI, मनुष्यों की तुलना में 12 से 15 गुना अधिक तेज़ और सटीक है. इसकी मदद से UNEP ने पिछले दो वर्षों में 7,500 अलर्ट जारी किए, जिनके बाद उत्सर्जन कम करने के लिए 42 कार्रवाइयाँ की गईं.
उन्होंने बताया कि कम्पनियाँ अक्सर इन रिसावों को दूर करने के लिए तुरन्त कार्रवाई करती हैं, क्योंकि इससे उन्हें अपने उत्पाद की बर्बादी रोकने में भी मदद मिलती है. यानि इससे कम्पनियों और पर्यावरण, दोनों को लाभ होता है.
मीथेन, वातावरण को गर्म करने में कार्बन डाइऑक्साइड से लगभग 80 गुना अधिक शक्तिशाली है. इसके रिसाव को रोकने से हानिकारक धुन्ध और वायु प्रदूषण भी कम होता है, जो साँस सम्बन्धी बीमारियों का कारण बन सकते हैं.
मार्टिन क्रूस ने कहा, “यह केवल कार्यबल बनाने, समस्या पर चर्चा करने या बैठकें करने तक सीमित नहीं है. यह वास्तविक कार्रवाई है, जो इस वक़्त भी हो रही है.”
टीबी की तेज़ जाँच
संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मदद से विकासशील देशों में AI के ज़रिए छाती के एक्स-रे में तपेदिक (टीबी) के संकेतों की पहचान की जा रही है. इससे उन इलाक़ों में भी तेज़ी से जाँच हो पा रही है, जहाँ विशेषज्ञों की कमी है.
WHO के उष्णकटिबंधीय रोगों पर शोध और प्रशिक्षण के विशेष कार्यक्रम की वैज्ञानिक डॉक्टर वैनेसा वेरोनीज़ ने यूएन न्यूज़ को बताया, “इससे जाँच और निदान की प्रक्रिया तेज़ हुई है और लोग पहले की तुलना में जल्द उपचार शुरू कर पा रहे हैं.”
टीबी का जल्दी पता लगने से संक्रमण फैलने का ख़तरा भी कम होता है, क्योंकि संक्रमित लोगों का उपचार जल्द शुरू हो जाता है. टीबी के उन्मूलन की दिशा में यह एक अहम क़दम है.
डॉक्टर वैनेसा वेरोनीज़ ने इथियोपिया का उदाहरण दिया, जहाँ सोने की खदानों में काम करने वाले मज़दूर धूल और सिलिका के सम्पर्क में आने के कारण टीबी के अधिक ख़तरे में रहते हैं.
बीमारी का जल्द पता लगाने वाली इस तकनीक को कम्प्यूटर-सहायता प्राप्त पहचान (CAD) कहा जाता है.
CAD बहुत कम समय में यह बता सकता है कि किसी व्यक्ति को टीबी होने की कितनी सम्भावना है. इससे ख़ासतौर पर उन क्षेत्रों में रेडियोलॉजिस्ट को मदद मिलती है, जहाँ संसाधन और विशेषज्ञ कम हैं. यह इसलिए भी अहम है क्योंकि उपचार न मिलने पर टीबी से अनेक लोगों की मौत हो जाती है.
WHO ने 2021 में वयस्कों में टीबी की जाँच के लिए इस तकनीक के इस्तेमाल की सिफ़ारिश की थी. तब से संगठन विकासशील देशों को इसे अपनाने में मदद कर रहा है. WHO इसके इस्तेमाल के लिए दिशा-निर्देश देता है, सॉफ़्टवेयर को ज़रूरत के अनुसार तैयार करने में टीबी कार्यक्रमों की मदद करता है और इसके स्वास्थ्य परिणामों का अध्ययन भी करता है.
डॉक्टर वैनेसा वेरोनीज़ ने कहा, “यह कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, सेवाओं तक पहुँच, लागत और उपलब्धता जैसी पुरानी बाधाओं को दूर करने में वास्तव में मदद करता है - यानि उन तमाम रुकावटों को, जो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रखती हैं.”
संकटों में जवाबी कार्रवाई
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ AI का इस्तेमाल बारूदी सुरंगों का पता लगाने, आपदाओं से हुए नुक़सान का आकलन करने, सन्दिग्ध वित्तीय लेनदेन की पहचान करने, रेडियोधर्मी प्रदूषण की निगरानी करने और परमाणु संलयन पर शोध को तेज़ करने के लिए भी कर रही हैं.
लेकिन जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, संयुक्त राष्ट्र समता, मानवाधिकारों और नैतिकता पर भी ज़ोर दे रहा है, ताकि यह तकनीक विकास में मदद करे और शान्ति व लोकतंत्र के लिए ख़तरा न बने.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने AI को “21वीं सदी में मानवता के लिए सबसे बड़ा अवसर” और साथ ही “सबसे बड़े जोखिमों में से एक” बताया है. उन्होंने इसके समावेशी नियमन और निगरानी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है.
उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI मानवता की सेवा करे, न कि मानवता AI की.”
AI की वैश्विक शासन व्यवस्था
संयुक्त राष्ट्र एक ओर टिकाऊ विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी कर रहा है कि यह तकनीक सुरक्षित, समान और समावेशी हो. 2025 में संयुक्त राष्ट्र ने AI शासन पर वैश्विक संवाद और AI पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की स्थापना की. विकासशील देशों में AI से जुड़ी क्षमताएँ बढ़ाने के लिए एक वैश्विक नेटवर्क भी शुरू किया गया है. UNESCO ने 2021 में AI नैतिकता पर दुनिया का पहला वैश्विक मानक अपनाया था. वहीं, WHO स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल के लिए नैतिक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराता है.