कोलम्बिया भूकम्प: 12 लाख लोगों को सहायता की ज़रूरत, कई समुदाय अब भी पहुँच से बाहर
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, पश्चिमी कोलम्बिया में आए शक्तिशाली भूकम्प के दस दिन बाद भी लगभग 12 लाख लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है, जबकि कई प्रभावित समुदायों तक अब भी पर्याप्त मदद नहीं पहुँच पाई है.
संयुक्त राष्ट्र की 2026 मानवीय प्रतिक्रिया योजना में जोड़े गए एक नए परिशिष्ट के अनुसार, 10 अगस्त को आए 7.4 तीव्रता के भूकम्प से प्रभावित लोगों की मदद के लिए मानवीय सहायता साझीदारों ने 14 करोड़ 81 लाख डॉलर की अपील की है.
इस सहायता योजना के तहत 6 लाख 71 हज़ार लोगों तक मदद पहुँचाने का लक्ष्य है. शुरुआत में सबसे अधिक प्रभावित रिसाराल्दा, वैये देल काउका, चोको और काल्दास विभागों पर ध्यान दिया जाएगा.
चोको की राजधानी किब्दो से संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी (IOM) के मानवीय प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली विशेषज्ञ ज्याँ-फ़िलिपे एंतोलिन ने कहा कि आपदा से हुए नुक़सान की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है.
उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, “कुछ समुदायों तक अब भी पहुँचा नहीं जा सका है, जबकि कुछ तक केवल एक बार सहायता पहुँची है.”
उन्होंने कहा, “लगभग हर तरह की सहायता की अब भी तत्काल ज़रूरत है.”
मकान ढहने का डर
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा उद्धृत सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 426 लोग अब भी लापता हैं और 4,500 से अधिक घायल हुए हैं. भूकम्प से 15 विभागों की 472 नगरपालिकाएँ प्रभावित हुई हैं.
1 लाख 34 हज़ार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और लगभग 30 हज़ार पूरी तरह नष्ट हो गए हैं. कम से कम 413 सड़कें भी प्रभावित हुई हैं, जिससे कई समुदायों तक पहुँचना मुश्किल हो गया है.
कई ऐसे घर भी अब सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं, जो बाहर से खड़े दिखाई देते हैं.
ज्याँ-फ़िलिपे एंतोलिन ने कहा, “बाहर से कुछ घर ठीक लग सकते हैं, लेकिन अन्दर जाने पर हर तरफ़ दरारें दिखाई देती हैं.”
उन्होंने कहा, “लोग इस डर से बाहर सो रहे हैं कि कहीं छत उनके ऊपर न गिर जाए.”
उन्होंने बताया कि इमारतों की सुरक्षा का तत्काल आकलन ज़रूरी है, ताकि परिवार यह जान सकें कि वे अपने घरों में सुरक्षित लौट सकते हैं या नहीं.
IOM ने वैये देल काउका, रिसाराल्दा, चोको और काल्दास में कम से कम 71 अस्थाई सामूहिक आश्रय स्थलों की पहचान की है, जहाँ लगभग 4,700 लोग रह रहे हैं. अन्य लोग रिश्तेदारों के यहाँ, किराए के घरों में या अस्थाई ठिकानों पर रह रहे हैं.
ज्याँ-फ़िलिपे एंतोलिन ने आगाह किया कि सहायता केवल औपचारिक आश्रय स्थलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अन्य जगहों पर रह रहे प्रभावित परिवार मदद से वंचित न हों.
बारिश से बीमारियों का ख़तरा बढ़ा
पेरेरा, बुएनावेंतुरा और किब्दो समेत भूकम्प प्रभावित कई इलाक़ों में भारी बारिश ने अस्थाई ठिकानों पर रह रहे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
ज्याँ-फ़िलिपे एंतोलिन ने चेतावनी दी कि बारिश के कारण डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों के फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है.
चोको में जलस्रोतों के उफ़नने और दूषित पानी के सम्पर्क में आने से दस्त एवं साँस सम्बन्धी बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ गया है.
प्रभावित इलाक़ों में कम से कम 50 अस्पताल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिजली, पानी, ऑक्सीजन, चिकित्सा सामग्री और परिवहन में रुकावटों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है.
ग्रामीण इलाक़ों में असर अब भी स्पष्ट नहीं
आपात राहत के साथ-साथ, ग्रामीण इलाक़ों में लोगों की आजीविका पर भूकम्प का कितना असर पड़ा है, इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है.
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने कहा कि फ़सलों, पशुधन, छोटे स्तर की मछली पकड़ने की गतिविधियों, सिंचाई प्रणालियों और पैदावार को हुए नुक़सान के बारे में अब भी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है.
प्रभावित ग्रामीण, नदी किनारे और तटीय समुदायों में बड़ी संख्या में लोग, पारिवारिक खेती और छोटे स्तर की मछली पकड़ने पर निर्भर हैं, लेकिन उनकी आजीविका को हुए नुक़सान का अभी पूरा आकलन नहीं हो पाया है.
FAO ने चेतावनी दी कि कुछ इलाक़ों में भूकम्प बुआई और कटाई के समय आया. ऐसे में एक फ़सल चक्र बर्बाद होने से परिवारों के पास अगले मौसम की खेती के लिए ज़रूरी संसाधन कम पड़ सकते हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने सहायता बढ़ाई
ज़रूरतें लगातार सामने आने के साथ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ प्रभावित लोगों के लिए सहायता बढ़ा रही हैं:
- IOM ने अगले छह महीनों में आश्रय, अस्थाई आवास, जल व स्वच्छता, स्वास्थ्य, संरक्षण और पुनर्बहाली के लिए 3 करोड़ डॉलर की अपील की है.
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने पेरेरा और किब्दो में आपात खाद्य सहायता पहुँचानी शुरू कर दी है और इसे अन्य प्रभावित इलाक़ों तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. लगभग एक लाख लोगों की मदद के लिए 2 करोड़ 30 लाख डॉलर की ज़रूरत है.
- संयुक्त राष्ट्र यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी (UNFPA) चोको में मोबाइल टीमें तैनात कर रही है, जो लैंगिक हिंसा से प्रभावित लोगों एवं गर्भवती महिलाओं को सहायता देंगी. स्वच्छता और मातृत्व सम्बन्धी सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है.
- संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) प्रभावित परिवारों को पानी, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई सम्बन्धी सहायता दे रहा है तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है.
- संयुक्त राष्ट्र राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने सरकार के नेतृत्व में जारी राहत प्रयासों के लिए केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष (CERF) से 50 लाख डॉलर जारी किए हैं.
हालाँकि पुनर्बहाली के प्रयास शुरू हो गए हैं, लेकिन ज्याँ-फ़िलिपे एंतोलिन ने कहा कि तत्काल मानवीय ज़रूरतें अब भी बहुत अधिक हैं.
उन्होंने कहा, “पुनर्बहाली की कार्रवाई पहले दिन से ही शुरू हो जाती है, लेकिन हालात सामान्य होने में समय लगता है. भूकम्प आए अभी केवल दस दिन हुए हैं.”