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जुलाई रहा वैश्विक स्तर पर अब तक का दूसरा सबसे गर्म महीना

भीषण गर्मी के दौरान बेलग्रेड में दो बच्चे सार्वजनिक पानी के फव्वारे से पानी पी रहे हैं।
© UNICEF/Nemanja Pancic सर्बिया के बेलग्रेड में तापलहर के दौरान गर्मी से राहत पाते दो बच्चे.

जुलाई रहा वैश्विक स्तर पर अब तक का दूसरा सबसे गर्म महीना

जलवायु और पर्यावरण

दुनिया के कई हिस्से भीषण गर्मीसूखेजंगलों की आग और अन्य चरम मौसम घटनाओं से जूझ रहे हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने मंगलवार को कहा कि लोगों के जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ बेहद ज़रूरी हैं.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने योरोपीय संघ की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (C3S) के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जुलाई का महीना अब तक का दूसरा सबसे गर्म महीना रहा.

औसत सतही वायु तापमान, औद्योगीकरण-पूर्व स्तर से 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जबकि जुलाई में समुद्र की सतह का तापमान अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर दर्ज किया गया.

‘छुट्टी का समय नहीं’

अगस्त में भी भीषण गर्मी जारी है. योरोप और उत्तरी गोलार्ध के अन्य हिस्सों में यह छुट्टियों का मौसम है, लेकिन WMO की प्रवक्ता क्लेयर नलिस ने कहा कि कई सेवाओं और कर्मियों के लिए राहत का समय नहीं है.

उन्होंने जिनीवा में पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय मौसम एवं जल विज्ञान सेवाएँ, आपात प्रबन्धन व राहत टीमें और स्वास्थ्यकर्मी चरम मौसम की घटनाओं के कारण लगातार काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ भीषण गर्मी की बात नहीं है. भारी बारिश और उष्णकटिबन्धीय चक्रवात भी देखने को मिल रहे हैं. इसलिए हमारे लिए यह बिल्कुल भी छुट्टी का समय नहीं है.”

फ्रांस के इले-सुर-टेट में जंगल में लगी आग के बाद, एक दमकलकर्मी धुएं से भरे इलाके में जले हुए पेड़ों के बीच से गुजर रहा है।
© Adobe Stock/Arafat दक्षिणी फ़्राँस में जंगल की आग के बाद सुलगते क्षेत्र का जायज़ा लेता एक दमकलकर्मी.

गर्मी, सूखा और जंगल की आग का ख़तरा

पश्चिमी योरोप में जून-जुलाई की अवधि अब तक की सबसे गर्म रही. स्विट्ज़रलैंड और फ्रांस समेत कुछ देश इस गर्मी की चौथी तापलहर से जूझ रहे हैं.

क्लेयर नलिस ने कहा कि भीषण सूखे से खेती, फ़सलों, परिवहन, ऊर्जा और नदियों के जलस्तर पर गहरा असर पड़ रहा है. ऊँचे तापमान के कारण जंगलों में आग का ख़तरा भी बढ़ गया है.

गर्मी केवल योरोप तक सीमित नहीं है. जापान और कोरिया गणराज्य में पिछले सप्ताह असाधारण और रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया, जबकि एशिया, मध्य पूर्व और लातिन अमेरिका के अन्य हिस्सों में भी भीषण गर्मी रही.

WMO में जलवायु सूचना प्रमुख जॉन कैनेडी ने कहा कि कम बारिश और तेज़ गर्मी से सूखा बढ़ा है, नदियों का जलस्तर घटा है और जंगलों में आग का ख़तरा बढ़ा है. योरोप की प्रमुख नदियों सेन, राइन और डैन्यूब में भी जल प्रवाह कम हुआ है.

जून-जुलाई 2026 के दौरान पश्चिमी यूरोप में तापमान की असामान्यताओं और चरम सीमाओं को दर्शाने वाला इन्फोग्राफिक, जिसमें मानचित्र और बार चार्ट शामिल हैं।
© C3S/ECMWF पश्चिमी योरोप में जून-जुलाई का औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया.

जंगलों में ‘असाधारण आग’

जंगलों में आग की घटनाएँ भी बढ़ी हैं. क्लेयर नलिस ने कहा कि पिछले महीने पश्चिमी योरोप में जंगलों की आग असाधारण स्तर पर रही, चाहे जले हुए क्षेत्र की बात हो या उससे हुए उत्सर्जन की.

कॉपरनिकस वायुमंडल निगरानी सेवा के आँकड़ों के अनुसार, फ्रांस में जंगलों की आग से इस साल अब तक जितना उत्सर्जन हुआ है, वह 2022 और 2023 के भीषण आग वाले वर्षों के बराबर या उससे भी अधिक है.

फ्रांस में इस साल जंगलों की आग इतनी भीषण रही है कि यह पिछले 24 वर्षों के सबसे अधिक प्रभावित वर्षों में से एक बन सकता है. पड़ोसी स्पेन में भी आग से होने वाला उत्सर्जन सामान्य से काफ़ी अधिक है.

उधर, अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में जंगलों की आग भड़क रही है, जबकि कैनेडा में सोमवार तक 591 जगहों पर आग सक्रिय थी, जिनमें से 43 पर क़ाबू नहीं पाया जा सका था.

चरम मौसम का व्यापक असर

क्लेयर नलिस ने कहा कि चरम मौसम केवल गर्मी तक सीमित नहीं है. पश्चिम अफ़्रीका के कुछ हिस्से भारी मानसूनी बारिश और बाढ़ से भी प्रभावित हैं.

WMO हर सप्ताह वैश्विक मौसम एवं जलविज्ञान आकलन (Global Hydromet Scan) जारी करता है, जिसे मानवीय सहायता एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है. नवीनतम आकलन में इस सप्ताह पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत, पूर्वी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्याँमार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, अचानक बाढ़ एवं भूस्खलन का ख़तरा जताया गया है.

उधर, चीन में पिछले सप्ताहान्त चक्रवाती तूफ़ान डॉल्फिन के तट से टकराने से पहले बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया. यह इस मौसम का 13वाँ चक्रवात था. हाल के दिनों में वहाँ भीषण बाढ़ के ख़तरे को लेकर भी कई चेतावनियाँ जारी की गई हैं.

बढ़ता दबाव

जॉन कैनेडी ने कहा कि हाल की चरम मौसम घटनाएँ, लम्बे समय से जारी वैश्विक ताप वृद्धि और उत्तरी गोलार्ध में उच्च व निम्न दबाव की लगातार बदलती स्थितियों के संयुक्त असर को दर्शाती हैं.

उन्होंने बताया कि उच्च दबाव की स्थिति में मौसम आमतौर पर अधिक गर्म और शुष्क हो जाता है. नीचे उतरती हवा गर्म होती है और बादल बनने की सम्भावना कम करती है, जिससे अधिक धूप धरातल तक पहुँचती है. ऐसी प्रणालियाँ ठंडी हवा को भी रोक सकती हैं और कई दिनों या हफ़्तों तक बनी रह सकती हैं.

प्रशान्त महासागर में अल-नीनो की स्थिति बन चुकी है और WMO ने वैश्विक तापमान में और बढ़ोत्तरी की आशंका जताई है. वैश्विक तापमान आमतौर पर अल-नीनो के चरम पर पहुँचने के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचता है. अल-नीनो का चरम प्रायः नवम्बर से जनवरी के बीच होता है.

इन हालात को देखते हुए, WMO और उसके सदस्य देश मौसम पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों को बेहतर बनाने में जुटे हैं. क्लेयर नलिस ने कहा कि सर्वजन के लिए प्रारम्भिक चेतावनी पहल अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है.