वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

DRC: बच्चों पर इबोला का बढ़ता क़हर, नए टीके से उम्मीद

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के प्रकोप के दौरान दी गई प्रतिक्रिया में, पूरी सुरक्षात्मक किट पहने स्वास्थ्यकर्मी एक स्प्रेयर से एक जगह को कीटाणुरहित कर रहे हैं।
© WHO/Josua Mulala Raymond पूर्वी डीआर काँगो के एक इबोला उपचार केन्द्र में स्वास्थ्यकर्मी को संक्रमणमुक्त किया जा रहा है.

DRC: बच्चों पर इबोला का बढ़ता क़हर, नए टीके से उम्मीद

स्वास्थ्य

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पूर्वी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के प्रकोप से 300 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इबोला की दुर्लभ बुंडिबुग्यो प्रकार का फैलाव रोकने के लिए उपलब्ध टीके के परीक्षण की सिफ़ारिश की है.

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित इतुरी प्रान्त में इबोला के इस प्रकोप का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है.

हिंसक टकराव से जूझ रहे इस प्रान्त में पहले ही लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाएँ और बच्चे हैं.

बच्चों की जान पर संकट

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के अनुसार, इबोला का यह प्रकोप मई के मध्य में शुरू हुआ था और तब से 300 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

पुष्ट मामलों में बच्चों की हिस्सेदारी क़रीब एक चौथाई है, लेकिन कुल मौतों में उनका हिस्सा लगभग एक तिहाई है.

संयुक्त राष्ट्र ने इस सप्ताह की शुरुआत में बताया था कि इबोला के प्रकोप से ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा, “सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में हाल के महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल 40 प्रतिशत से अधिक घट गया है, क्योंकि संक्रमण के डर से लोग स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने से बच रहे हैं.”

गर्भवती महिलाओं पर ख़तरा

संक्रमण का डर और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव कई गर्भवती महिलाओं को ज़रूरी चिकित्सा देखभाल लेने से रोक रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, UNFPA की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब इबोला का प्रकोप शुरू होने के बाद से इतुरी में मातृ मृत्यु के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं.

Tweet URL

प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण हर सप्ताह लगभग छह महिलाओं की मौत हो रही है. वहीं, गर्भावस्था के दौरान इबोला संक्रमण होने पर लगभग सभी मामलों में गर्भस्थ शिशु की जान चली जाती है.

मानवीय सहायता संगठनों ने कहा है कि इस संकट से निपटने के लिए समुदायों का भरोसा फिर से क़ायम करना बेहद अहम है. काँगो के स्वास्थ्य मंत्रालय और उसके साझीदारों ने इसके लिए लगभग 13 हज़ार सामुदायिक कार्यकर्ताओं को तैनात किया है. इनमें अफ़्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र (Africa CDC), UNICEF और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) शामिल हैं.

इन कार्यकर्ताओं ने इबोला से बचाव और संक्रमण की जल्द पहचान के बारे में 24 लाख से अधिक लोगों तक जानकारी पहुँचाई है. ग़लत सूचनाओं से निपटने और लोगों को समय रहते इलाज लेने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्होंने पाँच लाख से अधिक घरों का दौरा भी किया है.

टीके के नए परीक्षण की सिफ़ारिश

इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक विशेषज्ञ समूह ने सिफ़ारिश की है कि  Ervebo टीके का बुंडिबुग्यो वायरस के ख़िलाफ़ एक नियंत्रित चिकित्सीय परीक्षण में इस्तेमाल करके उसकी प्रभावशीलता जाँची जाए.

WHO के तकनीकी सलाहकार समूह ने शुक्रवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में यह सिफ़ारिश की. पशुओं पर किए गए शुरुआती अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि यह टीका बुंडिबुग्यो वायरस से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकता है, विशेषकर मौत के जोखिम को कम करने में.

Ervebo, इबोला के मुख्य प्रकार इबोला ज़ायरे (Zaire strain) के ख़िलाफ़ स्वीकृत एकमात्र टीका है.

डीआर काँगो में बुंडिबुग्यो प्रजाति के प्रकोप को 16 मई को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किए जाने के बाद WHO ने विशेषज्ञ समूहों की बैठक बुलाई थी.

विशेषज्ञों ने उपलब्ध टीकों और उपचार के विकल्पों की समीक्षा के लिए दो बैठकें कीं और शुरुआती सिफ़ारिशें जारी कीं. उस समय विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि Ervebo का इस्तेमाल केवल सावधानीपूर्वक तैयार किए गए शोध के तहत ही किया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बुंडिबुग्यो वायरस के ख़िलाफ़ यह टीका कितना असरदार है.

बुंडिबुग्यो के ख़िलाफ़ भी सुरक्षा की सम्भावना

Ervebo से जुड़े नए आँकड़ों की समीक्षा के लिए सलाहकार समूह ने 31 जुलाई को तीसरी बार बैठक की.

पशुओं पर किए गए शुरुआती अध्ययनों से संकेत मिला है कि यह टीका बुंडिबुग्यो वायरस से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकता है, ख़ासतौर पर इससे होने वाली मौत का जोखिम कम करने में.

विशेषज्ञों ने टीके की सुरक्षा, प्रभावशीलता, उपलब्धता और इसके इस्तेमाल की व्यावहारिकता का भी आकलन किया. उनका कहना है कि इबोला के पुष्ट मामलों के सम्पर्क में आए लोगों को यह टीका देने में सुरक्षा को लेकर कोई विशेष चिन्ता सामने नहीं आई है.

अभी और प्रमाण की ज़रूरत

बुंडिबुग्यो वायरस के ख़िलाफ़ फिलहाल कोई विशेष टीका उपलब्ध नहीं है. इसलिए विशेषज्ञों ने सिफ़ारिश की है कि Ervebo टीके को प्राथमिकता देते हुए क्लिनिकल परीक्षण में परखा जाए. हालाँकि, यह अभी साबित नहीं हुआ है कि यह टीका बुंडिबुग्यो वायरस के ख़िलाफ़ कितना प्रभावी है.

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बुंडिबुग्यो वायरस के लिए विशेष रूप से विकसित टीका उपलब्ध होने पर उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी.