अल-नीनो से अतिरिक्त 4.9 करोड़ लोगों पर गम्भीर भूख का ख़तरा
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बुधवार को आगाह किया कि प्रबल होते अल-नीनो के प्रभाव से दुनिया भर के बेहद संवेदनशील समुदायों में लगभग पाँच करोड़ अतिरिक्त लोग गम्भीर भूख संकट का सामना कर सकते हैं.
इसके जवाब में WFP और उसके साझीदार आठ देशों में सहायता बढ़ा रहे हैं, ताकि उन बेहद कमज़ोर समुदायों की मदद की जा सके, जो पहले से ही ग़रीबी, हिंसक टकराव, बेरोज़गारी और बार-बार होने वाली चरम जलवायु घटनाओं से जूझ रहे हैं.
इसमें बाढ़, सूखे और तूफ़ानों के आने से पहले ही उनसे निपटने की तैयारी को प्राथमिकता दी जा रही है.
WFP के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा, “अल-नीनो पहले से ही लाखों संवेदनशील लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है. इन जलवायु सम्बन्धी झटकों से निपटने के लिए परिवारों की जितनी जल्दी मदद की जाएगी, उतनी ही अधिक ज़िन्दगियाँ और आजीविकाएँ बचाई जा सकेंगी.”
गम्भीर भूख का अर्थ ऐसी स्थिति से है, जिसमें लोग अपनी रोज़ाना की भोजन सम्बन्धी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाते.
मुख्य बिन्दु
- सितम्बर से अल-नीनो के प्रभाव के कारण 4.9 करोड़ अतिरिक्त लोग गम्भीर भूख का सामना कर सकते हैं.
- गम्भीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे लोगों की संख्या लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर, 22.5 से 27.4 करोड़ तक पहुँच सकती है.
- मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ़्रीका पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है.
- समय रहते कार्रवाई करने का लाभ: रोकथाम पर ख़र्च किए गए प्रत्येक 1 डॉलर से भविष्य के नुक़सान और राहत कार्रवाई पर 3 से 7 डॉलर तक बचाए जा सकते हैं.
पिछले अल-नीनो से मिली सीख
WFP ने बताया कि 2015-2016 के अल-नीनो से छह से दस करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुई थी. शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 2026-2027 का अल-नीनो अगले वर्ष के अन्त तक कम से कम 4.9 करोड़ और लोगों को गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने पर मजबूर कर सकता है.
WFP ने ऐसे 45 देशों की स्थिति का विश्लेषण किया, जो पहले से खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं और जहाँ अल-नीनो से वर्षा, तापमान, बाढ़ और सूखे पर बड़ा असर पड़ सकता है. एजेंसी के अनुसार, गम्भीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित लोगों की संख्या 22.5 करोड़ से बढ़कर 27.4 करोड़ हो सकती है, यानि लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि.
मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ़्रीका के कुछ हिस्सों पर चरम जलवायु घटनाओं का सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है. पूर्वी अफ़्रीका तथा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी गम्भीर प्रभाव पड़ सकते हैं.
WFP ने कहा कि अल-नीनो का प्रभाव हर जगह एक जैसा नहीं होगा. “कुछ देशों में पहले ही औसत से कम वर्षा, बाढ़ और असामान्य रूप से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है, जबकि अन्य देशों में आगामी बुआई एवं फ़सल कटाई के मौसम के दौरान हालात बिगड़ सकते हैं.”
WFP रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा सबसे तेज़ी से बढ़ सकती है, जिससे 1.6 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं.
- रिपोर्ट में शामिल सभी क्षेत्रों में मध्य अमेरिका में सबसे अधिक, 83.1 प्रतिशत, वृद्धि होने का अनुमान है.
- पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका में भी बड़ा जोखिम है, विशेषकर उन इलाक़ों में जहाँ आगामी वर्षा ऋतु खाद्य उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. यहाँ 1.8 करोड़ से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा बिगड़ सकती है, यानि 26 प्रतिशत की वृद्धि.
- दक्षिणी अफ़्रीकी देशों पर विशेष रूप से अधिक ख़तरा है, क्योंकि वहाँ बहुत से परिवार ऐसी खेती पर निर्भर हैं, जो पूरी तरह वर्षा पर टिकी है.
- एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के कई पहले से संवेदनशील देशों पर भी गम्भीर असर पड़ सकता है. यहाँ 82 लाख अतिरिक्त लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं.
- पश्चिमी और मध्य अफ़्रीका में खाद्य असुरक्षा 12 प्रतिशत बढ़ सकती है, जिससे लगभग 60 लाख अतिरिक्त लोग प्रभावित हो सकते हैं.
WFP और संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने अधिक सहायता की अपील की है, ताकि जोखिम वाले समुदायों को अल-नीनो के प्रभावों से निपटने के लिए पहले से तैयार किया जा सके और संकट बढ़ने से पहले लोगों के जीवन, आजीविकाओं और खाद्य सुरक्षा की रक्षा की जा सके.
समय रहते निवेश से कई गुना बचत
अल-नीनो के सितम्बर से दिसम्बर 2026 के बीच चरम पर पहुँचने की आशंका है. भविष्य की फ़सलों पर असर पड़ने के कारण अनेक देशों में इसके प्रभाव पूरे 2027 तक महसूस किए जा सकते हैं. WFP ने आगाह किया, “सूखा, बाढ़ और अत्यधिक तापमान पहले ही समुदायों को जोखिम में डाल रहे हैं.”
FAO, OCHA एवं अन्य साझीदारों के साथ मिलकर WFP ने 50 से अधिक देशों में समय रहते कार्रवाई की योजनाएँ बनाई हैं. इनके ज़रिए सरकारों और समुदायों को जोखिम कम करने में मदद दी जा रही है.
मई से WFP ने दक्षिण सूडान, चाड, मॉरिटेनिया, युगांडा, ग्वाटेमाला और ऐल सैल्वाडोर में ये योजनाएँ शुरू की हैं. इनके तहत पाँच लाख लोगों की सहायता के लिए 1.4 करोड़ डॉलर से अधिक की जीवनरक्षक मदद उपलब्ध कराई गई है.
इसमें आपदा जोखिम बीमा, ऋण और डिजिटल भुगतान जैसी पहले से तय वित्तीय व्यवस्थाओं का विस्तार भी किया जा रहा है, ताकि कम लागत पर अधिक धन उपलब्ध कराया जा सके.
इन प्रयासों से समुदायों एवं सरकारों को अचानक आने वाले संकटों के लिए पहले से तैयार होने और उनका सामना करने में मदद मिलती है. इससे भविष्य में मानवीय सहायता की ज़रूरत भी कम हो सकती है. पिछले अल-नीनो के अनुभव बताते हैं कि समय रहते कार्रवाई पर ख़र्च किए गए प्रत्येक एक डॉलर से भविष्य के नुक़सान और राहत प्रयासों की लागत में तीन से सात डॉलर तक की बचत हो सकती है.