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भारत से आए UNMISS शांति सैनिकों ने दक्षिण सूडान के जोंगलेई में पशुधन के स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका में सुधार किया।

दक्षिण सूडान: भारतीय शान्तिरक्षक बने पशुपालकों का सहारा

© UNDPPA दक्षिण सूडान के जोंगलेई में UNMISS के भारतीय शान्तिरक्षक, पशुधन की सेहत और ग्रामीण आजीविकाओं में बदलाव लाने में मदद कर रहे हैं.

दक्षिण सूडान: भारतीय शान्तिरक्षक बने पशुपालकों का सहारा

शान्ति और सुरक्षा

दक्षिण सूडान में तैनात संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) के भारतीय शान्तिरक्षक जोंगलेई प्रान्त के दूरदराज़ समुदायों तक पशुचिकित्सा सेवाएँ पहुँचा रहे हैं. पिछले एक वर्ष में उन्होंने 41 हज़ार 500 से अधिक गम्भीर रूप से बीमार मवेशियों और बकरियों का उपचार किया है. इससे पशुपालक परिवारों को अपनी आजीविकाएँ सुरक्षित रखने और स्थानीय पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने में मदद मिली है.

दक्षिण सूडान के अनेक समुदायों के लिए पशुधन भोजन, आमदनी और सुरक्षा का अहम आधार है. मगर जोंगलेई में पशुचिकित्सा सेवाओं की कमी के कारण बीमारियों का प्रकोप पूरे परिवार की आजीविका को संकट में डाल सकता है.

भारतीय पशुचिकित्सा दल ने जून 2025 में यह कार्यक्रम शुरु किया था. इसके तहत दूरदराज़ इलाक़ों में मोबाइल पशुचिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं, जहाँ पशुओं को मुफ़्त उपचार, दवाएँ और पोषक आहार उपलब्ध कराए जाते हैं.

पशुपालकों को बीमारियों की रोकथाम और पशुओं की बेहतर देखभाल के बारे में भी परामर्श दिया जा रहा है.

दल ने संक्रमण, किलनी से फैलने वाली और परजीवी बीमारियों, गम्भीर चोटों व अन्य जानलेवा समस्याओं से पीड़ित 41 हज़ार 500 से अधिक मवेशियों और बकरियों का उपचार किया है.

पलायन और तनाव में कमी

पशुपालक डैनियल गरांग जोक ने कहा कि पशुचिकित्सा दल के नियमित दौरों से उनके समुदाय को बड़ी मदद मिली है.

उन्होंने कहा, “पशु चिकित्सकों का यह दल लगभग हर सप्ताह हमारे मवेशियों की जाँच और उपचार करने आता है और हमें ज़रूरी सलाह भी देता है.”

उनके अनुसार, पशुओं के स्वस्थ रहने से परिवारों को दूसरे इलाक़ों में जाने की ज़रूरत कम पड़ती है.

उन्होंने कहा, “मवेशियों को स्वस्थ रखने में जितनी मदद मिलती है, हम उतना ही अपनी भूमि पर रह पाते हैं. दूसरी जगह जाने पर मवेशियों की आवाजाही से किसानों के साथ टकराव हो सकता है.”

पशुधन के स्वस्थ रहने से परिवारों को चरागाह की तलाश में पलायन कम करना पड़ता है, जिससे पशुपालकों और कृषक समुदायों के बीच तनाव घटाने में मदद मिल सकती है.

सामुदायिक कौशल निर्माण

यह पहल केवल बीमार पशुओं के उपचार तक सीमित नहीं है. इसके तहत स्थानीय समुदायों को पशु रोगों की पहचान, बुनियादी उपचार, टीकाकरण और बेहतर पशुपालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

पिछले एक वर्ष में 252 सामुदायिक पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 165 महिलाएँ हैं. इससे परिवारों की आजीविका की रक्षा में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है और उनके लिए आमदनी के नए अवसर भी खुले हैं.

प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वाले माकेच माबियोर अन्यीथ ने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर पशु रोगों से निपटने की क्षमता मज़बूत हुई है.

उन्होंने कहा, “मैं तीन बार उनके प्रशिक्षण में हिस्सा ले चुका हूँ. हमने विकृत सींग हटाना, पशुओं का बधियाकरण करना, बुनियादी उपचार देना और टीकाकरण करना सीखा.”

भावी पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण

भारतीय शान्तिरक्षक दल दक्षिण सूडान के भावी पशु चिकित्सकों को भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है.

डॉक्टर जॉन गरांग स्मारक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 40 छात्रों को रोगों की पहचान, उपचार, शल्य चिकित्सा और पशुधन प्रबन्धन का प्रशिक्षण दिया गया है.

इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है और ग्रामीण इलाक़ों में पशुचिकित्सा सेवाओं की कमी दूर करने में भी मदद मिल सकती है.

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मुफ़्त दवाएँ और उपचार

पशुपालक अवोई कुर ने बताया कि समुदायों को ऐसी दवाएँ और सेवाएँ मिल रही हैं, जिन तक उनकी पहले पहुँच नहीं थी.

उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें ऐसी दवाएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराई हैं, जिन्हें हम अपने स्तर पर हासिल नहीं कर सकते थे. कुछ दवाएँ स्थानीय बाज़ारों या पड़ोसी देशों में भी उपलब्ध नहीं हैं, मगर वे हमें मुफ़्त में दी जाती हैं.”

भारतीय बटालियन के पशुचिकित्सा अधिकारी लैफ़्टिनेंट कर्नल हरमनजेट सिंह गोराया के अनुसार, मोबाइल शिविरों में पशुओं की अनेक बीमारियों का उपचार किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “मोबाइल पशुचिकित्सा शिविर खुरपका-मुँहपका रोग, ईस्ट कोस्ट फ़ीवर, एनाप्लाज़्मोसिस, किलनी संक्रमण, परजीवी रोग और त्वचा रोगों से निपट रहे हैं. साथ ही, पशुपालकों को बीमारियों की रोकथाम और पशुओं की बेहतर देखभाल के बारे में भी जानकारी दी जा रही है.”

उपचार, प्रशिक्षण और स्थानीय क्षमता निर्माण के ज़रिए यह पहल पशुपालक समुदायों को अपने पशुधन और आजीविकाओं की रक्षा करने में मदद कर रही है. साथ ही, ऐसी स्थानीय क्षमता विकसित की जा रही है, जो शान्तिरक्षा मिशन के बाद भी समुदायों के काम आ सकेगी.

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