यूक्रेन: युद्ध के बीच जीवन की नई शुरुआत
यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच, लोग स्कूलों, अस्पतालों, प्रसूति वार्डों और अपने समुदायों में जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.
ख़ारकीव क्षेत्र में रूसी सीमा से केवल आधे घंटे की दूरी पर स्थित बेज़रुकी गाँव का स्कूल युद्ध के शुरुआती दिनों में सीधे हमले की चपेट में आया और उसे बन्द करना पड़ा. टैंक इतने पास से गुज़रते थे कि उनकी आवाज़ साफ़ सुनाई देती थी.
खिड़कियों की मरम्मत और इमारत को मज़बूत किए जाने के बाद स्कूल फिर खुल गया. उसके तहख़ाने को पहले सुरक्षित आश्रय स्थल और फिर कला दीर्घा में बदल दिया गया.
योरोपीय संघ के वित्त पोषण से UNOPS द्वारा संचालित इस परियोजना के कारण क्षेत्र में 15 हज़ार से अधिक बच्चे फिर से स्कूल लौट सके हैं.
बच्चों की ज़रूरतों के अनुरूप शिक्षा
शिक्षक यूरी तकालेंको पिछले 20 वर्षों से चेर्कासी क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. वर्ष 2025 में वह ‘नवीन यूक्रेनी स्कूल सुधार’ से जुड़े एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए.
वो कहते हैं, “सीखना कभी नहीं रुकता. नए पाठ्यक्रम में बच्चों को केन्द्र में रख जाता है और उनकी ज़रूरतों के अनुसार शिक्षा को ढाला जाता है.”
यूक्रेन के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से यह कार्यक्रम UNESCO द्वारा चलाया जा रहा है और इसे वैश्विक शिक्षा साझेदारी से वित्तीय सहायता मिली है.
युद्ध के बीच नई ज़िन्दगी
दोनेत्स्क क्षेत्र की अनास्तासिया को प्रसव के लिए अपना घर छोड़कर ख़ारकीव के एक सुरक्षित प्रसूति वार्ड में जाना पड़ा, जहाँ उन्होंने जुड़वाँ बेटों को जन्म दिया.
वह कहती हैं, “मुझे प्रसव से डर लग रहा था, लेकिन जीवन चलता रहता है. डॉक्टरों ने हमें इस मुश्किल घड़ी से सुरक्षित बाहर निकाला.”
संयुक्त राष्ट्र की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी UNFPA, योरोपीय संघ के सहयोग से, अग्रिम मोर्चे वाले इलाक़ों में ऐसे प्रसूति केन्द्रों को सहायता दे रही है.
प्रशिक्षण से रोज़गार की नई राह
बच्चों की देखभाल की सुविधा अक्सर यह तय करती है कि कोई माँ काम कर पाएगी या नहीं. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के ‘बाल देखभाल प्रशिक्षण केन्द्र (Nanny School)’ ने 80 महिलाओं को जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों की देखभाल का प्रशिक्षण दिया. प्रमाणपत्र मिलने के कुछ ही समय बाद इनमें से लगभग आधी महिलाओं को रोज़गार मिल गया.
इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को अनौपचारिक कामकाज से निकालकर अधिक स्थिर रोज़गार से जोड़ना और भविष्य में इस पहल का विस्तार करना है.
क्रिवी रिह में ओक्साना अब शहर के सबसे लम्बे बस मार्गों में से एक पर बस चलाती हैं. उन्होंने यूएन वीमेन की ‘She Drives’ परियोजना के तहत प्रशिक्षण लिया. इससे पहले वह माल ढुलाई क्लर्क थीं और उन्हें भरोसा नहीं था कि वह चयन प्रक्रिया पार कर पाएँगी.
वह कहती हैं, “कई यात्रियों के लिए आज भी किसी महिला को बस चलाते देखना असामान्य है, लेकिन उनका आभार मुझे प्रेरित करता है. आप कुछ करना चाहते हैं, तो कोशिश करने से डरिए मत. मैं अपना जीवन बदलना चाहती थी और मैंने ऐसा कर दिखाया.”
‘हम अकेले नहीं हैं’
ज़ैपोरिझझिया में अस्पताल निदेशक हन्ना मकारेनकोवा और उनकी टीम युद्ध के दौरान विस्फोटों में घायल लोगों और मारियुपोल से निकाले गए लोगों का उपचार करती रही है. पूर्ण स्तर पर युद्ध शुरू होने के बाद से अस्पताल में 25 हज़ार से अधिक मरीज़ों का इलाज किया गया है – वो भी अक्सर बमबारी और बिजली कटौती के बीच.
वह कहती हैं, “मेरे सहकर्मी मुझे काम करते रहने की ताक़त देते हैं. उनका अथक परिश्रम और समर्पण ही मुझे प्रेरित करता है.”
अब यहाँ योरोपीय संघ के वित्त पोषण से UNDP द्वारा लगाई गई स्वतंत्र बिजली इकाइयाँ अब ग्रिड ठप होने पर भी अस्पताल के उपकरणों को चालू रखती हैं.
ताक़त और उम्मीद की वापसी
कोस्तियान्तिनिव्का में एक ड्रोन हमले में ओलेक्सांद्र ने अपने दोनों पैर और एक आँख खो दी. उनकी पत्नी नतालिया पिछले तीन महीनों से सर्जरी और पुनर्वास के दौरान उनके साथ हैं. फ़िज़ियोथेरेपिस्ट इलिया की मदद से वह फिर से सन्तुलन बनाना और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करना सीख रहे हैं.
नतालिया कहती हैं, “चलते रहना ही जीवन है. मुझे लगता है कि हमारे लिए सब ठीक हो जाएगा. हम जिएँगे और जीवन का आनन्द लेंगे, क्योंकि जीवन चलता रहता है.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने योरोपीय संघ की वित्तीय सहायता से, यूक्रेन में 300 से अधिक पुनर्वास विशेषज्ञों को लोगों के लिए उपयुक्त व्हीलचेयर चुनने, लगाने और उनकी ज़रूरतों के अनुसार समायोजित करने का प्रशिक्षण दिया है. इनमें से नौ विशेषज्ञ अब अन्य लोगों को भी यह प्रशिक्षण दे रहे हैं.
इन प्रयासों से युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन पुनर्निर्माण की शुरुआत ऐसे ही छोटे-छोटे क़दमों से होती है.