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जंगल की आग का धुआँ: सेहत के लिए अदृश्य ख़तरा

फ्रांस के इले-सुर-टेट में जंगल में लगी आग के बाद, एक दमकलकर्मी धुएं से भरे इलाके में जले हुए पेड़ों के बीच से गुजर रहा है।
© Adobe Stock/Arafat दक्षिणी फ़्राँस में जंगल की आग के बाद सुलगते क्षेत्र का जायज़ा लेता एक दमकलकर्मी.

जंगल की आग का धुआँ: सेहत के लिए अदृश्य ख़तरा

जलवायु और पर्यावरण

जंगल की आग से होने वाली तबाही अक्सर साफ़ दिखाई देती हैलेकिन उसका धुआँ आग वाले इलाक़ों से बहुत दूर तक फैल सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि इससे लोगों की सेहत को गम्भीर ख़तरा हो सकता है.

इस गर्मी में योरोप और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में भीषण आग नियन्त्रण से बाहर है. इसका धुआँ देशों और महाद्वीपों की सीमाएँ पार करके दूर तक फैल रहा है, जिससे लाखों लोग हानिकारक वायु प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं.

WHO ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन, लम्बे समय तक चलने वाली तापलहरें, सूखा और भूमि प्रबन्धन में बदलाव जंगल की आग की घटनाओं और उनकी तीव्रता को बढ़ा रहे हैं. इससे धुएँ से होने वाला स्वास्थ्य ख़तरा भी लगातार बढ़ रहा है.

जंगल की आग की अनेक घटनाएँ मानवीय गतिविधियों के कारण होती हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन अधिक गर्म एवं शुष्क परिस्थितियाँ पैदा कर रहा है, जिनमें आग आसानी से लगती और तेज़ी से फैलती है. धुआँ बहुत दूर तक पहुँच सकता है, इसलिए आग वाले इलाक़ों से दूर रहने वाले समुदायों में भी कई दिनों या सप्ताहों तक वायु गुणवत्ता ख़राब रह सकती है.

हानिकारक असर

जंगल की आग का धुआँ गैसों और महीन कणों का मिश्रण होता है, जो पेड़-पौधों, इमारतों और अन्य सामग्री के जलने से निकलता है. आग शहरी या औद्योगिक इलाक़ों तक पहुँच जाए, तो उससे अतिरिक्त ज़हरीले प्रदूषक निकल सकते हैं.

सबसे बड़ी चिन्ताओं में से एक सूक्ष्म कण पदार्थ (PM2.5) है. ये कण फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुँच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं.

धुएँ के सम्पर्क में आने से खाँसी, आँखों और गले में जलन, सिरदर्द, घरघराहट और साँस लेने में तकलीफ़ हो सकती है. इससे अस्थमा और अन्य पुरानी बीमारियाँ भी गम्भीर हो सकती हैं.

शिशु और छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, विकलांगजन और कम सुरक्षित घरों में रहने वाले लोग इसके प्रभाव के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं.

आपातसेवा कर्मियों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी लम्बे समय तक धुएँ के सम्पर्क में रहना ख़तरनाक हो सकता है. जंगल की आग मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है और आपदा के दौरान व उसके बाद तनाव, बेचैनी और मानसिक आघात का कारण बन सकती है.

धुएँ से बचाव

WHO ने लोगों से वायु गुणवत्ता सम्बन्धी चेतावनियों पर नज़र रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है, भले ही जंगल की आग कुछ दूरी पर लगी हो.

WHO के योरोपीय पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य केन्द्र की डोरोता यारोसिन्स्का ने कहा, “यदि आपके क्षेत्र में जंगल की आग लगी है, तो स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. उनके पास ज़मीनी हालात की सबसे ताज़ा जानकारी होती है.”

उन्होंने कहा, “अगर आपको धुएँ की गन्ध आ रही है, तो इसका अर्थ है कि वह आपकी साँस के साथ शरीर में जा रहा है. ऐसे में, विशेष रूप से जोखिम वाले लोगों को धुएँ के सम्पर्क को कम करना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा कि धुएँ की गन्ध न आने पर भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं. हवा का रुख़ बदलने से आग अचानक दिशा बदल सकती है, इसलिए नवीनतम जानकारी पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी है.

घना धुआँ होने पर दरवाज़े और खिड़कियाँ बन्द करके घर के भीतर रहना चाहिए, जब तक कि सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश न दिया जाए.

बाहर जाना आवश्यक हो, तो ठीक से फिट होने वाला FFP2 या N95 मास्क धुएँ के सम्पर्क को कम कर सकता है.

हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों, गर्भवती महिलाओं और साँस लेने में तकलीफ़ महसूस करने वाले लोगों को तुरन्त चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

बढ़ता जोखिम

WHO के अनुसार, समुदायों की सुरक्षा के लिए केवल आग बुझाना काफ़ी नहीं है. पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ, समय पर जनस्वास्थ्य सलाह, चिकित्सा सेवाओं तक पहुँच और संवेदनशील लोगों के लिए स्वच्छ हवा वाले सुरक्षित आश्रय भी ज़रूरी हैं.

एजेंसी, योरोपीय क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर जंगल की आग और तापलहरों से निपटने की तैयारियाँ मज़बूत कर रही है. इसका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणालियों को बेहतर ढंग से तैयार करना है, क्योंकि जंगल की आग का मौसम लम्बा हो रहा है और आग की घटनाएँ बारम्बार व अधिक गम्भीर होती जा रही हैं.