रोज़गार के झाँसे से मानव तस्करी तक, साहस से मिली आज़ादी
सोफ़िया* 27 वर्ष की थीं और वेनेज़ुएला में अपने सात वर्षीय बेटे की अकेले परवरिश कर रही थीं. वह वर्षों से घर-घर जाकर निजी स्वच्छता उत्पाद बेचती थीं, लेकिन ग्राहकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ उनकी आमदनी भी कम होती गई. जल्द ही उनके लिए गुज़ारा करना मुश्किल हो गया.
क़र्ज़ लगातार बढ़ते गए और आख़िरकार उन्हें वह काम छोड़कर नए रोज़गार की तलाश करनी पड़ी.
इसी दौरान उन्हें फ़ेसबुक मार्केटप्लेस पर एक विज्ञापन दिखा - त्रिनिदाद और टोबैगो में रोज़गार, सभी ख़र्चों का भुगतान और पहुँचते ही काम शुरू करने का वादा.
ख़ुद को “वैलेन्टिना” बताने वाली एक महिला ने सोफ़िया से व्हाट्सऐप पर सम्पर्क किया. फ़ोन पर हुई बातचीत इतनी वास्तविक लगी कि उन्हें रोज़गार का प्रस्ताव सच लगा.
सोफ़िया बताती हैं, “हमने सीधे फ़ोन पर बात की थी. उसकी आवाज़ सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि यह प्रस्ताव असली है.”
सच्चाई सामने आई
सोफ़िया को यह पता नहीं था कि वैलेन्टिना मानव तस्करी के एक गिरोह से जुड़ी थी. वह इस उम्मीद में त्रिनिदाद और टोबैगो के लिए रवाना हुईं कि वहाँ उन्हें नई ज़िन्दगी शुरू करने का मौक़ा मिलेगा.
लेकिन पहुँचते ही सच्चाई सामने आ गई. उनसे मिलने आए लोग वे नहीं थे, जिनसे उनकी बात हुई थी, और रोज़गार से जुड़े सभी वादे झूठे निकले. सोफ़िया को यौन शोषण के लिए मानव तस्करी का शिकार बनाया गया था.
वह कहती हैं, “मेरा अपहरण किया गया और मुझे उनकी बात मानने के लिए मजबूर किया गया.”
कई सप्ताह तक वह तस्करों के नियन्त्रण में, लगातार डर में जीती रहीं. बाद में उन पर उन्हीं झूठे वादों के सहारे अन्य वेनेज़ुएलाई महिलाओं को फँसाने में मदद करने का दबाव डाला गया. मगर उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
वह कहती हैं, “मैं नहीं चाहती थी कि किसी और को भी उस पीड़ा से गुज़रना पड़े, जो मैंने झेली.”
एक साधारण दिन, असाधारण मौक़ा
सोफ़िया अब उन दिनों को याद नहीं करना चाहतीं. वह कहती हैं, “मैंने उस दौर को अपने भीतर दफ़ना दिया है.”
लेकिन वह उस दिन को ज़रूर याद करती हैं, जिसने उनकी ज़िन्दगी बदल दी.
एक दिन उन्हें कूड़ा बाहर फेंकने के लिए भेजा गया. मौक़ा मिलते ही उन्होंने कुछ सामान उठाया, चुपचाप वहाँ से निकलीं और एक टैक्सी में बैठ गईं.
टैक्सी में डोमिनिकन गणराज्य की एक महिला पहले से मौजूद थीं, जो कई वर्षों से त्रिनिदाद और टोबैगो में रह रही थीं. उन्हें तुरन्त अहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है. सोफ़िया ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई.
महिला ने नज़दीकी पुलिस थाने जाकर घटना की जानकारी देने का सुझाव दिया. सोफ़िया इसके लिए तैयार हो गईं.
वह कहती हैं, “मुझे लगा, यह ईश्वर की कृपा थी.”
त्रिनिदाद और टोबैगो पहुँचने के बाद पहली बार, पुलिस थाने में सोफ़िया ने ख़ुद को सुरक्षित महसूस किया.
वह कहती हैं, “उसी पल मुझे लगा कि आख़िरकार मैं उस स्थिति से बाहर निकल आई हूँ.”
सहायता के साथ जीवन की नई शुरुआत
सोफ़िया का वहाँ से बच निकलना उनके जीवन को फिर से सँवारने की एक लम्बी प्रक्रिया की शुरुआत थी. राष्ट्रीय अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने मिलकर इस प्रक्रिया में उनकी सहायता की.
त्रिनिदाद और टोबैगो की मानव तस्करी निरोधक इकाई ने सोफ़िया को फॉरेंसिक जाँच, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श जैसी चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराईं. फ़िलहाल वह इसी इकाई के संरक्षण में हैं.
इकाई के साथ अपनी दीर्घकालिक साझेदारी के तहत, त्रिनिदाद और टोबैगो में स्थित IOM ने सोफ़िया जैसे मानव तस्करी से बचे लोगों को आपातकालीन खाद्य सहायता, सुरक्षित आश्रय, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग एवं रोज़गार के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है, ताकि वे अपना जीवन फिर से सँवार सकें.
इस साझेदारी के तहत मानव तस्करी से निपटने वाले कर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है और जन-जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, ताकि लोग तस्करी के चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचान सकें.
सोफ़िया कहती हैं, “सब कुछ सही तरीक़े से किया गया है. मुझे हर क़दम पर सहयोग मिला है.”
भविष्य की ओर
सोफ़िया ने अब वेनेज़ुएला में अपने परिवार को अपने साथ हुई घटना की सच्चाई बता दी है. उनका सात वर्षीय बेटा आगे बढ़ते रहने की उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है. वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करना, विश्वविद्यालय जाना और एक स्थिर करियर बनाना चाहती हैं, ताकि दोनों के लिए सुरक्षित भविष्य बना सकें.
वह चाहती हैं कि उनकी कहानी किसी और को ऐसी पीड़ा से बचाने में मदद करे.
ऑनलाइन विज्ञापित अवसरों के बारे में वह कहती हैं, “हर बात सच नहीं होती.” वह लोगों से यात्रा करने से पहले सवाल पूछने और जानकारी की पुष्टि करने का आग्रह करती हैं. “मेरे साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ न हो.”
सोफ़िया कहती हैं कि सबसे कठिन समय में भी उन्होंने ख़ुद पर विश्वास बनाए रखा. “आपको ख़ुद पर विश्वास रखना होगा.”
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस बात पर सबसे अधिक गर्व है, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, “वहाँ से निकलने का साहस जुटाने पर. मैं एक मज़बूत महिला हूँ. मैं वहाँ से बच निकलने में कामयाब रही.”
मानव तस्करी निरोधक दिवस हर वर्ष 30 जुलाई को मनाया जाता है.
*पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदल दिया गया है.