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ओडिशा में सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई, महिला किसानों के लिए नए अवसर खोल रही है.

भारत: सौर सिंचाई से सँवरा ओडिशा की महिला किसानों का भविष्य

© UNDP India ओडिशा में सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई, महिला किसानों के लिए नए अवसर खोल रही है.

भारत: सौर सिंचाई से सँवरा ओडिशा की महिला किसानों का भविष्य

आर्थिक विकास

भारत में ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले में सौर सिंचाई पम्प से महिला किसानों की खेती और आमदनी बढ़ने के साथ-साथ परिवार व समुदाय में उनकी भूमिका भी मज़बूत हुई है. UNDP की पहल के तहत मिले इस पम्प की बदौलत अब वे वर्षा व महँगे डीज़ल पर निर्भर हुए बिना विभिन्न फ़सलें उगा रही हैं और अहम निर्णयों में हिस्सा ले रही हैं.

वर्षों तक तंगाझरी गाँव में खेती मुख्य रूप से अनियमित बारिश और महंगे डीज़ल पर निर्भर थी. 

अमरा भतरा और लक्ष्मी भतरा जैसे छोटे किसानों की मुश्किलें 2024 में कम हुईं, जब UNDP की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा पहल के तहत उनके खेतों के पास एक एचपी का सौर सिंचाई पम्प लगाया गया. हर्षा ट्रस्ट के सहयोग से लागू इस पहल में पम्प दोनों महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किया गया.

इससे उन्हें सिंचाई पर सीधा नियंत्रण मिला और खेती, आमदनी व पारिवारिक निर्णयों में उनकी भूमिका मज़बूत हुई.

बारिश और डीज़ल पर निर्भर खेती

पम्प लगने से पहले अमरा और लक्ष्मी छोटे भूखण्डों पर सब्ज़ियाँ उगाती थीं, जिनका अधिकतर इस्तेमाल घर में ही होता था.

सिंचाई के लिए वे बारिश या डीज़ल पम्पों पर निर्भर थीं. डीज़ल ख़रीदने के लिए उन्हें 30 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था और समय पर पानी न मिलने से कई बार फ़सलें प्रभावित होती थीं.

उन्होंने बताया, “हम केवल छोटे भूखण्डों पर सब्ज़ियाँ उगा पाते थे, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से घर में होता था. कभी-कभी सही समय पर पानी नहीं मिलने के कारण फ़सलें ख़राब हो जाती थीं.”

खेती का अधिकतर काम महिलाएँ करती थीं, लेकिन खेती और घरेलू निवेश से जुड़े अहम निर्णय आमतौर पर पुरुष ही लेते थे.

वर्ष 2024 में अमारा और लक्ष्मी को UNDP की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) पहल के लाभार्थियों के रूप में चुना गया.
© UNDP India वर्ष 2024 में अमारा और लक्ष्मी को UNDP की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) पहल के लाभार्थियों के रूप में चुना गया.

खेती का विस्तार

2024 में अमरा और लक्ष्मी को UNDP की इस पहल के तहत सौर सिंचाई पम्प मिला, जिसे उनके नाम पर पंजीकृत किया गया.

उन्होंने बताया, “शुरुआत में हमें लगा कि अन्य कार्यक्रमों की तरह पम्प हमारे नाम पर तो होगा, लेकिन उसे पुरुष ही चलाएँगे. मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ. पम्प वास्तव में हमारा था और परिवारों ने भी हमारा साथ दिया.”

दोनों महिलाओं को फ़सल प्रबन्धन, कीट नियंत्रण और बाज़ार से जुड़ाव पर प्रशिक्षण भी दिया गया. भरोसेमन्द सिंचाई मिलने के बाद उन्होंने खेती का क्षेत्र आधे एकड़ से बढ़ाकर एक-एक एकड़ कर लिया.

अब वे बैंगन, टमाटर, फूलगोभी और स्ट्रॉबेरी जैसी फ़सलें उगा रही हैं. पिछले वर्ष केवल स्ट्रॉबेरी की खेती से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई.

उन्होंने कहा, “एक ही फ़सल से हमें इतनी आमदनी हुई, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी. अब हम डीज़ल या पानी की कमी की चिन्ता किए बिना अपनी योजना के अनुसार खेती कर सकते हैं.”

जैसे-जैसे खेती की तकनीकों और बाज़ार की समझ को लेकर अमारा और लक्ष्मी का आत्मविश्वास बढ़ा, परिवार के फ़ैसलों में उनकी भूमिका को नज़रअन्दाज़ करना कठिन हो गया.
© UNDP India जैसे-जैसे खेती की तकनीकों और बाज़ार की समझ को लेकर अमारा और लक्ष्मी का आत्मविश्वास बढ़ा, परिवार के फ़ैसलों में उनकी भूमिका को नज़रअन्दाज़ करना कठिन हो गया.

आमदनी के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

सौर पम्प लगने से डीज़ल और उसे ख़रीदने के लिए आने-जाने का ख़र्च पूरी तरह बच गया.

उन्होंने कहा, “डीज़ल और यात्रा पर ख़र्च होने वाला धन अब बच रहा है. हमारी आमदनी बढ़ी है और हम बेहतर योजना बना सकते हैं.”

पिछले वर्ष लक्ष्मी ने लगभग 30 हज़ार रुपये और अमरा ने क़रीब 80 हज़ार रुपये कमाए. परिवारों ने इस आमदनी का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, खेती में सुधार, घरेलू ज़रूरतों और सोने जैसी छोटी सम्पत्तियाँ ख़रीदने में किया.

आमदनी बढ़ने के साथ परिवार के अहम निर्णयों में दोनों महिलाओं की भागेदारी भी बढ़ी.

उन्होंने बताया, “पहले हमारे पति ही सभी निर्णय लेते थे. पम्प लगने और प्रशिक्षण यात्राओं के बाद उन्होंने हमारी सलाह लेनी शुरू की. अब फ़सलों और घरेलू निवेश से जुड़े निर्णय हम मिलकर लेते हैं.”

सौर सिंचाई, भारत के ओडिशा राज्य में महिला किसानों के लिए खेती के नए अवसर पैदा कर रही है.
© UNDP India सौर सिंचाई, भारत के ओडिशा राज्य में महिला किसानों के लिए खेती के नए अवसर पैदा कर रही है.

समुदाय में बढ़ी पहचान

अमरा और लक्ष्मी की सफलता से गाँव की अन्य महिलाएँ भी प्रेरित हुई हैं. स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की सदस्य अब सौर सिंचाई के बारे में जानकारी और परामर्श लेने उनके पास आती हैं.

उन्होंने कहा, “अब लोग हमारी बात सुनते हैं. दूसरी महिलाएँ सवाल पूछने हमारे पास आती हैं और इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित होती हैं.”

दोनों महिलाओं के लिए यह बदलाव केवल अधिक उपज और आमदनी तक सीमित नहीं है. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार व समुदाय में उन्हें नई पहचान मिली है.

उन्होंने कहा, “सशक्तिकरण का अर्थ है स्वयं को पहचानना और समाज द्वारा पहचाना जाना. प्रशिक्षण और अनुभवों ने लोगों की नज़र में हमारी पहचान बदली है और हमारे अपने बारे में सोचने का तरीक़ा भी.”

जापान के अनुपूरक बजट से समर्थित UNDP की विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा पहल ओडिशा, मेघालय, नागालैंड, तमिलनाडु और बिहार राज्यों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविका के अवसर बढ़ा रही है.

यह पहल भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा आधारित आजीविका अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने वाले ढाँचे के अनुरूप है.

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.