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जंगल की आग: रोकथाम ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय

एक पीले रंग का अग्निशमन विमान धुएं से भरे जंगल में लगी आग पर भारी मात्रा में पानी या अग्निशामक पदार्थ गिराता है।
© Unsplash/Chiara Guercio जंगल की आग पर पानी छोड़ता एक अग्निशमन विमान.

जंगल की आग: रोकथाम ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय

जलवायु और पर्यावरण

योरोप और उत्तरी अमेरिका में भड़क रही जंगल की आग ने तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत बढ़ा दी है. जलवायु परिवर्तनभूमि पर बढ़ता दबाव और मानवीय गतिविधियाँ भविष्य में ऐसी भीषण घटनाओं का ख़तरा और बढ़ा रही हैं.

योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) ने चेतावनी दी है कि उपलब्ध नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक योरोप में चार लाख 34 हज़ार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र जंगल की आग में जल चुका है.

UNECE के पर्यावरण और वन प्रभाग की निदेशक पाओला डेडा ने कहा, “हर गर्मी हमें याद दिलाती है कि जंगल की आग अब कोई असाधारण घटना नहीं रही, बल्कि गर्म होती जलवायु का लगातार अधिक सम्भावित परिणाम बनती जा रही है.”

उन्होंने कहा, “आपात कार्रवाई ज़रूरी है, लेकिन रोकथाम, टिकाऊ वन प्रबन्धन और अधिक सहनसक्षम भू-दृश्यों व समुदायों के निर्माण से इस ख़तरे को कम किया जा सकता है.”

वन तबाह, घर खाली करवाए गए

योरोप में जंगल की आग से फ़्राँस के गिरोंद क्षेत्र में लगभग 42 हज़ार हैक्टेयर देवदार के जंगल नष्ट हो गए हैं. हज़ारों निवासियों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

पड़ोसी स्पेन में दो लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र जल चुका है, जो देश के ऐतिहासिक औसत से दोगुना है. यह पिछले कई दशकों में वहाँ जंगल की आग के सबसे भीषण मौसमों में से एक है.

योरोपीय संघ ने चेतावनी दी है कि यह संकट अब पूर्व की ओर बढ़ रहा है. अगस्त की शुरुआत तक गर्मी, सूखे और तेज़ हवाओं के जारी रहने से ग्रीस और इटली में भी ख़तरा बढ़ रहा है.

अटलांटिक महासागर के दूसरी ओर भी हालात गम्भीर हैं. अमेरिका में इस वर्ष अब तक लगभग 18 लाख 49 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र जल चुका है. वहीं, कैनेडा में चार हज़ार से अधिक आग की घटनाओं में 37 लाख 70 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र जल चुका है और दर्जनों स्थानों पर लगी भीषण आग पर अब भी क़ाबू नहीं पाया जा सका है.

दूरगामी प्रभाव

जंगल की आग की गम्भीरता अक्सर जले हुए क्षेत्र से मापी जाती है, लेकिन इसका असर जंगलों से कहीं आगे तक पहुँचता है.

इससे घर, बुनियादी ढाँचे और आजीविकाएँ तबाह हो सकती हैं और पूरे समुदायों को अचानक अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं. आग का धुआँ सैकड़ों या हज़ारों किलोमीटर दूर तक फैलकर वायु गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है.

इसका आर्थिक नुक़सान भी बढ़ रहा है. केवल योरोपीय संघ में ही बुनियादी ढाँचे को क्षति, पर्यटन आय में कमी और अर्थव्यवस्था में व्यवधान के कारण जंगल की आग से हर वर्ष लगभग ढाई अरब यूरो का नुक़सान होने का अनुमान है.

आग बुझने के बाद भी समुदायों को पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण, जैव विविधता के नुक़सान, कृषि उत्पादकता में कमी, स्वास्थ्य समस्याओं और बहाली के भारी ख़र्च का सामना करना पड़ता है.

मानव-जनित संकट

जंगल की आग का मुख्य कारण अब भी मानवीय गतिविधियाँ हैं. लगभग 10 में से नौ घटनाएँ लोगों की लापरवाही या जानबूझकर किए गए कार्यों के कारण होती हैं.

जन-जागरूकता बढ़ाकर, नियम सख़्त बनाकर, आग के अत्यधिक ख़तरे वाले दिनों में अस्थाई पाबन्दियाँ लगाकर और जंगलों व प्राकृतिक क्षेत्रों में ज़िम्मेदार व्यवहार अपनाकर ऐसी अनेक घटनाओं को रोका जा सकता है.

वहीं, जलवायु परिवर्तन जंगल की आग को अधिक व्यापक और विनाशकारी बना रहा है. बढ़ता तापमान, लम्बे सूखे, बार-बार पड़ने वाली भीषण गर्मी और वर्षा के बदलते रुझान, आग के मौसम को लम्बा कर रहे हैं. इससे वे क्षेत्र भी जोखिम में आ रहे हैं, जिन्हें पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था.

जंगल की आग से जलवायु संकट में भी वृद्धि हो रही है. वर्ष 2021 में इससे अनुमानित 1.8 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हुई.

वर्ष 2001 से 2023 के बीच दुनिया भर में जंगल की आग से होने वाला कार्बन उत्सर्जन लगभग 60 प्रतिशत बढ़ गया. वहीं, योरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया के उत्तरी वनों में लगी आग से होने वाला उत्सर्जन लगभग तीन गुना हो गया.

UNECE के अनुसार, इससे एक ख़तरनाक चक्र बन रहा है. जलवायु परिवर्तन जंगल की आग का ख़तरा बढ़ाता है तथा अधिक भीषण आग से ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि और तेज़ होती है.

सुरक्षित भविष्य के लिए आज निवेश

भीषण जंगल की आग फैलने के बाद उसे हमेशा रोक पाना सम्भव नहीं होता, लेकिन ऐसी घटनाओं की संख्या और उनके प्रभाव को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

UNECE ने जीवन बचाने, वनों की रक्षा करने और नुक़सान घटाने के लिए रोकथाम, टिकाऊ वन प्रबन्धन, समय रहते चेतावनी, जन-जागरूकता एवं जलवायु अनुकूलन में अधिक निवेश की अपील की है.

इस दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत नई तकनीकें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. जैसेकि तुर्किये में AI आधारित आग का पता लगाने वाली प्रणालियाँ, उपग्रहों से निगरानी और वास्तविक समय में जोखिम का मानचित्रण शामिल हैं.

हालाँकि, UNECE ने कहा कि केवल तकनीक पर्याप्त नहीं होगी.

आयोग ने कहा, “जलवायु जोखिम बढ़ने के साथ, वनों को आग के प्रति अधिक सहनसक्षम बनाना अब केवल पर्यावरणीय प्राथमिकता नहीं है. यह जन-सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जलवायु सुरक्षा में निवेश भी है.”