वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

अफ़ग़ानिस्तान: स्वदेश लौट रहे अफ़ग़ानों पर मानव तस्करी का बढ़ता ख़तरा

फूलों वाली पोशाक पहने एक युवा भारतीय लड़की कार्यशाला में चटाई पर बैठी है और तह किए हुए सफेद कपड़ों को संभालते हुए कैमरे की ओर देख रही है।
© ILO/A Khemka जबरन मज़दूरी में फँसे 2.1 करोड़ लोगों में से 70 प्रतिशत का मज़दूरी के लिए शोषण किया जाता है, जबकि 22 प्रतिशत जबरन यौन शोषण का शिकार हैं.

अफ़ग़ानिस्तान: स्वदेश लौट रहे अफ़ग़ानों पर मानव तस्करी का बढ़ता ख़तरा

क़ानून और अपराध रोकथाम

संयुक्त राष्ट्र ने गुरूवार को चेतावनी दी कि पड़ोसी देशों से अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौट रहे लोगों पर मानव तस्करी और शोषण का ख़तरा बढ़ रहा है. गहराते मानवीय और आर्थिक संकटों के कारण उनके लिए अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, ईरान और पाकिस्तान से बड़ी संख्या में अफ़ग़ानों की वापसी के बीच मानव तस्करी और दुर्व्यवहार का ख़तरा बढ़ रहा है. मानवीय सहायता में कमी, अफ़ीम आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पतन, जलवायु आपदाएँ और महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों पर जारी पाबन्दियाँ इस जोखिम को और बढ़ा रही हैं.

आर्थिक तंगी से शोषण का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी की रिपोर्ट, ‘स्वदेश लौटने वालों की सहनक्षमता का अवलोकन’ (Returnee Resilience Overview), अफ़ग़ानिस्तान लौट रहे अफ़ग़ानों के सामने मौजूद चुनौतियों की गम्भीर तस्वीर पेश करते हैं.

IOM के सर्वेक्षण के अनुसार केवल 11 प्रतिशत अफ़ग़ानों के पास पूर्णकालिक रोज़गार था या वे अपना व्यवसाय चला रहे थे. वहीं, स्वदेश लौटे 56 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि वे अपने बुनियादी ख़र्च भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं.

लगभग आधे परिवार गुज़र-बसर के लिए क़र्ज़ या दान पर निर्भर हैं. इससे उनके शोषणकारी श्रम प्रथाओं, क़र्ज़ के बदले बन्धुआ मज़दूरी और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

UNODC और IOM ने चेतावनी दी है कि पीड़ितों को जबरन मज़दूरी, यौन शोषण, ग़ुलामी जैसी प्रथाओं और कुछ मामलों में अंग निकालने का शिकार बनाया जा रहा है.

महिलाएँ, बच्चे, स्वदेश लौटे लोग और क़र्ज़ में डूबे परिवार सबसे अधिक जोखिम में हैं. अनेक लोगों का घरेलू कामकाज, कृषि, खनन, ईंट निर्माण और कालीन बुनाई में शोषण होता है. अन्य लोगों को जबरन भीख माँगने, जबरन विवाह, बाल भर्ती और यौन शोषण के लिए मजबूर किया जाता है.

Tweet URL

ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए मानव तस्करी

संयुक्त राष्ट्र ने मानव तस्करी के उस बढ़ते वैश्विक ख़तरे पर भी चिन्ता जताई है, जिसमें लोगों को जबरन अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है. 

पीड़ितों को धोखे, हिंसा और धमकियों के ज़रिए ऑनलाइन घोटालों और धोखाधड़ी के काम में लगाया जाता है.

मानव तस्करी के विरुद्ध विश्व दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “ऑनलाइन धोखाधड़ी के गिरोह लाखों लोगों को ठगकर अन्तरराष्ट्रीय संगठित अपराध के लिए भारी अवैध मुनाफ़ा कमाते हैं. कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत नई शक्तिशाली तकनीकों की मदद से ये गतिविधियाँ चिन्ताजनक गति से फैल रही हैं.”

सुरक्षा मज़बूत करने की अपील

अफ़ग़ानिस्तान में IOM की मिशन प्रमुख मिहयुंग पार्क ने कहा, “इस समय इतनी बड़ी संख्या में लोग लौट रहे हैं कि पर्याप्त अन्तरराष्ट्रीय सहायता के बिना अफ़ग़ान समुदायों के लिए उन्हें सम्भालना कठिन है.”

आजीविका, आवास और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच नहीं होने के कारण अनेक लोग ख़तरनाक प्रवासन मार्ग अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं. 

इससे उनके मानव तस्करी, शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार होने का जोखिम बढ़ जाता है.

अफ़ग़ानिस्तान में UNODC के स्थानीय प्रतिनिधि पोलीक ओक सेरेई ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की वापसी, सहायता में कटौती, प्राकृतिक आपदाओं और आजीविका के नुक़सान ने रोकथाम के प्रयास तत्काल मज़बूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने मानव तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, पीड़ितों को अधिक सहायता देने, नागरिक दस्तावेज़ों और आजीविका के अवसरों तक पहुँच बेहतर बनाने तथा सुरक्षित प्रवासन मार्ग उपलब्ध कराने की अपील की.

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “मानव तस्करी का हर रूप मानवाधिकारों का गम्भीर उल्लंघन है. मिलकर काम करके हम इस शोषण को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं.”