ऑनलाइन ठगी के लिए मानव तस्करी का बढ़ता जाल: IOM की चेतावनी
रोज़गार का एक विज्ञापन किसी आपराधिक नैटवर्क का जाल हो सकता है, और महज़ एक क्लिक ज़िन्दगी को दुःस्वप्न में बदल सकता है. हर वर्ष लाखों लोगों को विदेश में वैध कामकाज का झाँसा देकर मानव तस्करी का शिकार बनाया जाता है. वहाँ पहुँचने पर उन्हें बन्धक बनाकर ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है.
संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अरबों डॉलर का यह तेज़ी से फैलता आपराधिक कारोबार रोज़गार तलाश रहे लोगों को जबरन साइबर अपराधों में धकेल रहा है.
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक जाल
IOM की महानिदेशक एमी पोप ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया, “80 से अधिक देशों के लोगों की तस्करी करके इन ठगी केन्द्रों में पहुँचाया जा रहा है, जो मुख्य रूप से एशिया में चलाए जा रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि तस्कर अक्सर अच्छी अंग्रेज़ी बोलने वाले और उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों को निशाना बनाते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापन दिए जाते हैं, जो सामान्य रोज़गार के अवसरों जैसे दिखाई देते हैं.
वहाँ पहुँचने के बाद पीड़ितों को परिसरों में बन्द कर दिया जाता है. उनके पासपोर्ट और फ़ोन छीन लिए जाते हैं और उन पर लगातार निगरानी रखी जाती है.
अनेक लोगों को पीटा और धमकाया जाता है. हिंसा और क़र्ज़ के जाल में फँसाकर उन्हें दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है.
एमी पोप ने कहा, “उन्हें अक्सर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है और वे वहाँ से निकल भी नहीं पाते.”
‘इतना अच्छा कि विश्वास ही न हो’
एमी पोप ने कहा कि सावधानी बरतने पर ख़तरे के संकेत पहचाने जा सकते हैं. उन्होंने कहा, “जो अवसर आदर्श रोज़गार जैसा दिखाई देता है, वह अक्सर इतना आकर्षक होता है कि सच नहीं लगता.”
IOM के अनुसार, कामकाजी परमिट के बजाय पर्यटक वीज़ा पर यात्रा करने को कहना एक प्रमुख चेतावनी संकेत है. विदेश जाने से पहले हर आवेदक को इसकी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए.
IOM ने ज़ोर देकर कहा कि इन परिसरों से ज़बरन ऑनलाइन ठगी करने वाले लोग अपराधी नहीं, बल्कि मानव तस्करी के पीड़ित हैं. इसलिए उन पर मुक़दमा चलाने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जाना चाहिए.
एमी पोप ने कहा, “मानव तस्करी से बच निकले अनेक लोगों को अपराधी समझ लिया जाता है, जबकि वास्तव में वे स्वयं इस अपराध के भुक्तभोगी हैं.”
हालाँकि ठगी केन्द्र एशिया में हैं, तस्कर सोशल मीडिया के ज़रिए दुनिया भर के लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं.
वर्ष 2022 से 2025 के बीच IOM ने दक्षिण-पूर्व एशिया में जबरन अपराधों में धकेले गए 3,500 से अधिक लोगों की सहायता की. ये पीड़ित 39 देशों से थे, जिनमें अधिकतर इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, इथियोपिया, केनया और बांग्लादेश के नागरिक थे.
ठगी का भयावह पैमाना
पीड़ितों को बचा लेना उनकी पुनर्बहाली की केवल शुरुआत है. घर लौटने के बाद उन्हें अक्सर मानसिक आघात, सामाजिक कलंक, क़र्ज़, दस्तावेज़ों की कमी और मुक़दमे के डर का सामना करना पड़ता है.
इस ठगी का पैमाना बेहद विशाल है. संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के नए आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड में ठगी से 88.3 अरब से 114.1 अरब डॉलर तक का नुक़सान हुआ. यह राशि मानव तस्करी से निपटने के लिए उपलब्ध संसाधनों से कहीं अधिक है.
एमी पोप ने चेतावनी दी, “इस मुद्दे को पूरी गम्भीरता से नहीं लिया गया, तो यह समस्या और बढ़ती जाएगी.”
IOM ने पीड़ितों की सुरक्षा, उनकी सुरक्षित घर वापसी और समाज में फिर से बसने में मदद के लिए अधिक निवेश करने का आहवान किया है. संगठन ने तस्करों के तौर-तरीक़ों के बारे में व्यापक जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया है.
IOM ने ये नवीनतम निष्कर्ष 30 जुलाई को मनाए जाने वाले मानव तस्करी निरोधक दिवस से पहले जारी किए हैं.