‘UNFPA का चैटबॉट’: युवजन के सवालों के विश्वसनीय जवाब
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) का AI-सक्षम चैटबॉट ‘JustAsk!’ भारत में युवजन को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़ी गोपनीय और भरोसेमन्द जानकारी दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र के ऑनलाइन स्वयंसेवकों ने इस सेवा के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे युवाओं व समुदायों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है.
भारत की लगभग आधी आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है. लाखों युवाओं के मन में अपने शरीर, रिश्तों और भविष्य को लेकर सवाल होते हैं.
लेकिन यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुलकर बात करना अब भी कठिन है. इससे कई सवाल अनकहे रह जाते हैं, भ्रान्तियाँ फैलती हैं और युवाओं को सही जानकारी के बिना अहम फ़ैसले लेने पड़ते हैं.
ऐसे में, अगर केवल एक सन्देश भेजकर, आसानी से मदद मिल जाए तो कैसा हो?
बिना झिझक सवाल पूछने का मंच
इसी सोच के साथ ‘JustAsk!’, यानि ‘खुलकर पूछो!’, चैटबॉट शुरू किया गया.
यह AI-सक्षम व्हाट्सऐप सेवा वर्ष 2023 में भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से शुरू की गई थी.
यह युवजन को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़ी गोपनीय व भरोसेमन्द जानकारी उपलब्ध कराती है. वे किसी भी समय और कहीं से भी अपने सवाल पूछ सकते हैं.
शुरुआत से अब तक, यह चैटबॉट लगभग 10 लाख युवजन तक पहुँच चुका है और भारत के 20 राज्यों से मिले 35 लाख से अधिक सवालों के जवाब दे चुका है.
इसकी पहुँच बढ़ाने के लिए, भारत में UNFPA ने संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक संस्था (UNV) के ज़रिए 35 ऑनलाइन स्वयंसेवकों को इस पहल से जोड़ा.
तकनीक के साथ भरोसा भी ज़रूरी
ऑनलाइन स्वयंसेवकों ने युवजन को चैटबॉट के बारे में जानकारी दी और उन्हें इसका इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने निजता, ऑनलाइन सुरक्षा, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण जैसे विषयों पर बातचीत को भी बढ़ावा दिया.
उनका काम केवल एक लिंक साझा करना नहीं था. इन विषयों से जुड़ी झिझक और सामाजिक कलंक के कारण, युवाओं का भरोसा जीतना भी बेहद अहम था.
ऑनलाइन स्वयंसेवक इशांक को इस अवसर के बारे में यूएनवी की वेबसाइट से पता चला.
उन्होंने बताया, “JustAsk! ने मुझे इसलिए आकर्षित किया क्योंकि यह युवाओं को भरोसेमन्द और बिना किसी पूर्वाग्रह वाली जानकारी उपलब्ध कराता है. यह काम मुझे सार्थक लगा और यह उसी तरह का योगदान था, जैसा मैं करना चाहता हूँ.”
एक अन्य स्वयंसेवक, प्रिंस ने बताया कि युवजन को चैटबॉट की सुरक्षा और गोपनीयता का भरोसा दिलाना उनके प्रयासों का सबसे अहम हिस्सा था.
उन्होंने कहा, “युवाओं को यह विश्वास दिलाना ज़रूरी था कि चैटबॉट सुरक्षित, भरोसेमन्द और निजी है. जब मेरे सम्पर्क में आए लोगों ने इसका इस्तेमाल शुरू किया, तो यह प्रयास तेज़ी से आगे बढ़ा.”
स्वयंसेवकों ने सोशल मीडिया के ज़रिए 3,000 से अधिक युवजन तक पहुँच बनाई और उन्हें चैटबॉट व उनके रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए प्रोत्साहित किया.
मगर लोगों तक जानकारी पहुँचाना केवल पहला क़दम था. भरोसा बनाने के लिए समय, समझ और सरल व ईमानदार संवाद की ज़रूरत थी.
‘डिजिटल नवाचार से वास्तविक बदलाव’
अपना कार्य पूरा करने के बाद, स्वयंसेवकों को भारत में यूएनएफ़पीए की स्थानीय प्रतिनिधि, एंड्रिया एम वोजनार की ओर से सराहना मिली.
उन्होंने कहा, “आपने ‘JustAsk! चैटबॉट जैसे डिजिटल नवाचार को वास्तविक बदलाव में बदला और पूरे भारत में युवाओं की भरोसेमन्द जानकारी तक पहुँच बढ़ाई. यही परिवर्तनकारी नेतृत्व का सार है - ज़मीनी स्तर पर सार्थक बदलाव लाने के लिए डिजिटल साधनों का उपयोग करना.”
सोशल मीडिया और समुदायों में कई सप्ताह तक चले जागरूकता अभियान से स्वयंसेवकों को अपने संचार और पैरोकारी कौशल निखारने का अवसर भी मिला.
ऑनलाइन स्वयंसेवक ख़दीजा ने कहा, “इस दौरान मैंने अपने काम की समय-सीमा स्वयं तय करना और उसे समय पर पूरा करने की ज़िम्मेदारी लेना सीखा.”
वहीं, ललित के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा यह थी कि उनके प्रयासों से युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा था.
उन्होंने कहा, “युवाओं को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाने वाली इस डिजिटल पहल का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद सार्थक अनुभव था.”
एक सन्देश से मदद की शुरुआत
‘JustAsk!’ का विस्तार जारी है.
इस पहल के ज़रिए यूएनएफ़पीए युवजन तक वहाँ पहुँच रहा है, जहाँ वे पहले से मौजूद हैं - ऑनलाइन, अपने फ़ोन पर और अपने समुदायों में.
इस पहल ने दिखाया कि बदलाव की शुरुआत कभी-कभी एक छोटे से क़दम से होती है - सही समय पर मिला एक सन्देश, ऐसी बातचीत जिससे किसी को लगे कि उसकी बात सुनी गई है, या कोई भरोसेमन्द आवाज़ जो उसे सही सहायता तक पहुँचाए.
ऑनलाइन स्वयंसेवकों के प्रयासों से अधिक युवाओं को भरोसेमन्द जानकारी मिल रही है और उन्हें अपने महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अकेले नहीं तलाशने पड़ रहे.
इस लेख का विस्तृत रूप पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.