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एक सरल तकनीक के ज़रिए हैंडपम्पों से मिलने वाले पानी को सुरक्षित बनाया जा रहा है.

भारत: सरल नवाचार, सुरक्षित पानी का भरोसा

© UNICEF एक सरल तकनीक के ज़रिए हैंडपम्पों से मिलने वाले पानी को सुरक्षित बनाया जा रहा है.

भारत: सरल नवाचार, सुरक्षित पानी का भरोसा

एसडीजी

भारत के बाढ़-प्रभावित इलाक़ों में एक प्रकृति-प्रेरित तकनीकसाधारण हैंडपम्पों को सुरक्षित पेयजल के स्रोत में बदल रही है. यह उपकरण बिना बिजलीरसायनफ़िल्टर या झिल्ली के पानी को शुद्ध करता है और वंचित समुदायों को जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद कर रहा है.

उत्तर प्रदेश के बहराइच और बिहार के बेगूसराय जैसे बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में मानसून के दौरान स्थानीय जल स्रोत अक्सर गम्भीर रूप से दूषित हो जाते हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है.

आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियाँ मज़बूत करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष  (UNICEF) और उसके साझीदारों ने 20 गाँवों के हैंडपम्पों में पेटेंट-प्राप्त ‘माजी: Taraltec® रिएक्टर’ लगाए हैं.

स्नैपिंग श्रिम्प से मिली प्रेरणा

यह तकनीक स्नैपिंग श्रिम्प नामक एक छोटे समुद्री जीव से प्रेरित है, जो अपना पंजा तेज़ी से बन्द करके शक्तिशाली आघात तरंगें पैदा करता है.

रिएक्टर भी ‘kinetic cavitation’ नामक ऐसी ही भौतिक प्रक्रिया का उपयोग करता है. हैंडपम्प चलाने पर पानी उपकरण के भीतर कई तेज़ धाराओं में बहता है. इससे पानी का दबाव अचानक कम हो जाता है और छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं.

दबाव सामान्य होते ही ये बुलबुले तेज़ी से सिमटकर टूटते हैं और शक्तिशाली गति की आघात तरंगें उत्पन्न करते हैं.

UNICEF के अनुसार, ये आघात तरंगें पानी में मौजूद 99 प्रतिशत से अधिक सूक्ष्मजीवों को भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त करके नष्ट कर देती हैं. जलजनित वायरस इन सूक्ष्मजीवों को अपने वाहक के रूप में इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इनके नष्ट होने से वायरस भी समाप्त हो जाते हैं. इस लक्षित भौतिक प्रक्रिया से दस्त, हैज़ा, टाइफ़ॉइड और पेचिश समेत लगभग 90 प्रतिशत जलजनित बीमारियों से समुदायों की रक्षा करने में मदद मिलती है.

इस रिएक्टर को चलाने के लिए बिजली, रसायन, फ़िल्टर या झिल्लियों की आवश्यकता नहीं होती.

माजी: टैरलटेक® रिएक्टर मौजूदा सामुदायिक जल प्रणालियों में आसानी से लगाया जा सकता है.
© UNICEF यह उपकरण, मौजूदा सामुदायिक जल प्रणालियों में ही आसानी से फिट हो जाता है.

मौजूदा हैंडपम्पों में आसानी से फिट

मुम्बई स्थित Taraltec Solutions ने इस छोटे उपकरण को इस तरह विकसित किया है कि इसे समुदायों द्वारा पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैंडपम्पों में आसानी से लगाया जा सके.

इसलिए लोगों को पानी भरने का तरीक़ा बदलने या शुद्धिकरण की कोई नई प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं होती.

रिएक्टर को इंडिया मार्क II और मार्क III हैंडपम्पों में लगाया जा सकता है. ये दोनों मॉडल दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले 95 प्रतिशत से अधिक हैंडपम्पों का हिस्सा हैं, इसलिए इस तकनीक को अन्य विकासशील देशों में भी अपनाए जाने की सम्भावना है.

इसे लगाना भी आसान है. एक स्थानीय प्लम्बर, बिना किसी विशेष प्रशिक्षण या औज़ार के, हैंडपम्प के सात सामान्य बोल्ट हटाकर एक घंटे से भी कम समय में यह उपकरण स्थापित कर सकता है.

‘लगाओ और भूल जाओ’ की यह व्यवस्था उन ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहाँ तकनीकी सहायता और पुर्ज़े आसानी से उपलब्ध नहीं होते.

प्रकृति से प्रेरित एक रसायन-मुक्त रिएक्टर, बाढ़-प्रभावित भारत में साधारण हैंडपम्पों को जीवनरक्षक जल-शोधन प्रणालियों में बदल रहा है.
© UNICEF प्रकृति से प्रेरित एक रसायन-मुक्त रिएक्टर, बाढ़-प्रभावित भारत में साधारण हैंडपम्पों को जीवनरक्षक जल-शोधन प्रणालियों में बदल रहा है.

कम लागत, लम्बे समय तक लाभ

प्रत्येक रिएक्टर की क़ीमत लगभग 95 डॉलर है और यह ख़र्च केवल एक बार करना होता है.

UNICEF के अनुसार, इस उपकरण को रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती. इसे चलाने के लिए बिजली, रसायनों या बार-बार बदले जाने वाले पुर्ज़ों की भी ज़रूरत नहीं पड़ती, इसलिए इसके संचालन से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और प्रति लीटर शुद्ध पानी की लागत बहुत कम रहती है.

इसे मौजूदा हैंडपम्पों में ही लगाया जा सकता है, इसलिए नई जलापूर्ति प्रणाली बनाने की आवश्यकता भी नहीं होती.

अन्तरराष्ट्रीय पहचान

इस रिएक्टर को अपनी अनूठी इंजीनियरिंग और प्रकृति से प्रेरित डिज़ाइन के लिए अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली है.

इसे जर्मनी के नूरेमबर्ग स्थित Deutsches Museum की ‘भविष्य की प्रौद्योगिकियाँ’ दीर्घा में स्थाई रूप से प्रदर्शित किया गया है.

यह नवाचार दिखाता है कि वैज्ञानिक तकनीक को मौजूदा स्थानीय सुविधाओं से जोड़कर, बाढ़ और दूषित जल स्रोतों से जूझ रहे समुदायों को जलजनित बीमारियों से बचाने का व्यावहारिक समाधान तैयार किया जा सकता है.