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चुनौतियों के बावजूद सतत विकास लक्ष्यों पर हार न मानें - यूएन

एक मुस्कुराता हुआ कंबोडियाई दंपति अपने ग्रामीण गाँव में एक नए स्थापित सौर पैनल प्रणाली के सामने खड़ा है, जो यूएनडीपी की नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच और गरीबी उन्मूलन से संबंधित कार्य का प्रतिनिधित्व करता है।
© UNDP कम्बोडिया में सौर ऊर्जा पैनल के पास खड़ा एक दम्पति.

चुनौतियों के बावजूद सतत विकास लक्ष्यों पर हार न मानें - यूएन

एसडीजी

आज दुनिया अलग-अलग वास्तविकताओं में बँटी नज़र आती हैजहाँ गहरी असमानताएँ लोगों के बीच दूरियाँ बढ़ा रही हैं और बहुपक्षवाद के वादे को कमज़ोर कर रही हैं. ऐसे में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का उद्देश्य लोगों को साथ लाना और सर्वजन के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है.

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष लोक बहादुर थापा ने सोमवार को अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि कोई भी देश अकेले टिकाऊ विकास हासिल नहीं कर सकता. 

उन्होंने कहा कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति और प्रयासों में तेज़ी ज़रूरी है.

UN के महासचिव लोक बहादुर थापा सतत विकास पर उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच के दौरान एक मंच पर भाषण दे रहे हैं।
© UN Photo/Eskinder Debebe संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के अध्यक्ष लोक बहादुर थापा, टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम के मंत्रिस्तरीय खंड को सम्बोधित करते हुए.

लोक बहादुर थापा ने कहा, “हमारा आकलन नतीजों के आधार पर किया जाए.”

उनके सम्बोधन के साथ टिकाऊ विकास पर उच्च-स्तरीय राजनैतिक मंच (HLPF) की मंत्रिस्तरीय बैठक शुरू हुई. ECOSOC द्वारा आयोजित इस वार्षिक संयुक्त राष्ट्र मंच पर सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाती है.

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उच्च-स्तरीय सत्र गुरुवार को समाप्त होगा. इस दौरान सरकारों के मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत से एक घोषणा-पत्र पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा. इसमें 17 लक्ष्यों पर प्रगति तेज़ करने के लिए सदस्य देशों द्वारा उठाए जाने वाले ठोस क़दम शामिल होंगे.

2026 की मंत्रिस्तरीय घोषणा के नवीनतम मसौदे में सतत विकास लक्ष्यों के लिए निवेश बढ़ाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए अन्तरराष्ट्रीय नियम बनाने की प्रतिबद्धताएँ शामिल हैं.

HLPF के समापन तक 36 देश सतत विकास लक्ष्यों पर अपनी प्रगति से जुड़ी स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षाएँ (VNRs) प्रस्तुत करेंगे और अन्य सदस्य देशों के साथ अपने सफल अनुभव साझा करेंगे.

पिछले मंगलवार को न्यूयॉर्क में HLPF की शुरुआत के साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों पर अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी जारी की. रिपोर्ट में कहा गया कि समन्वित कार्रवाई से सकारात्मक नतीजे मिले हैं, लेकिन 2030 तक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकारों को अपने प्रयास तत्काल तेज़ करने होंगे.

वित्तीय संसाधन ज़रूरी

सोमवार को सत्र की शुरुआत में ECOSOC अध्यक्ष लोक बहादुर थापा, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने स्वीकार किया कि सतत विकास लक्ष्य सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देश जानते हैं कि टिकाऊ विकास के लिए क्या करना ज़रूरी है, लेकिन तेज़ और प्रभावी कार्रवाई में धन की कमी अब भी सबसे बड़ी बाधा है.

एसडीजी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिन संकेतकों के रुझान से जुड़े आँकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से केवल 36 प्रतिशत ही सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या उनमें मध्यम प्रगति हुई है. यूएन महासचिव ने कहा कि यह इच्छाशक्ति की नहीं, बल्कि प्रभावी वित्तपोषण की कमी को दर्शाता है.

उन्होंने बताया कि विकासशील देशों को अमीर देशों की तुलना में कई गुना अधिक लागत पर क़र्ज़ लेना पड़ता है. कई देश अपनी राष्ट्रीय सेवाओं पर होने वाले ख़र्च से अधिक धन, क़र्ज़ चुकाने में लगा रहे हैं. ऐसे में सहायता के बिना उनके लिए सतत विकास लक्ष्यों को लागू करना बेहद कठिन है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “हमें विकासशील देशों की आवाज़ और भागेदारी बढ़ानी होगी तथा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार करना होगा, ताकि उन्हें आवश्यक सहायता मिल सके.”

एसडीजी के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार पर ज़ोर दिया. इससे निजी निवेश बढ़ाने और विकासशील देशों को वित्तीय संसाधनों तक समान पहुँच दिलाने में मदद मिलेगी.

UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय में सतत विकास पर उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच के दौरान एक मंच पर भाषण दे रहे हैं।
© UN Photo/Eskinder Debebe यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम के मंत्रिस्तरीय खंड के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए.

युवजन को बहुपक्षीय प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए सशक्त बनाने वाले, युवा-नेतृत्व वाले ग़ैर-सरकारी संगठन DMUN फ़ाउंडेशन के प्रमुख जेवोन चोई ने भी सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ी पहलों में युवाओं को शामिल करने की माँग की.

जेवोन चोई ने मंत्रियों से कहा, “एक नई ऊर्जा से सशक्त संयुक्त राष्ट्र को युवजन की सार्थक भागेदारी सुनिश्चित करनी होगी.”

बहुपक्षवाद का वादा

वक्ताओं ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे वार्ता के दौरान सतत विकास लक्ष्यों के लिए वित्तीय सहायता जुटाने, क़र्ज़ से राहत, नागरिक समाज के साथ साझेदारी और ठोस सामूहिक कार्रवाई को प्राथमिकता दें.

यूएन प्रमुख ने भविष्य के लिए समझौतेसेविया संकल्पदोहा राजनैतिक घोषणापत्रखुले समुद्रों की सन्धि और लघु द्वीपीय विकासशील देशों के लिए एंटीगुआ और बरबूडा एजेंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुपक्षवाद अब भी ठोस नतीजे देने में सक्षम है.

उन्होंने कहा, “विकास के लिए व्यवसायों, विकास बैंकों, नवप्रवर्तकों, नागरिक समाज, सामुदायिक नेताओं और युवजन - सभी को साथ आना होगा.”

महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेरबॉक ने सतत विकास पर उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच में भाषण दिया।
© UN Photo/Eskinder Debebe संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक, टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम के मंत्रिस्तरीय खंड को सम्बोधित करते हुए.

ECOSOC को सम्बोधित करते हुए महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा, “प्रगति अभी पटरी पर नहीं है.” संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया कि चुनौतियाँ कितनी भी बड़ी हों, 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास छोड़ना कोई विकल्प नहीं है.

लक्ष्य पर नज़र

फ़ुटबॉल की शौक़ीन ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने सम्बोधन का समापन, सतत विकास लक्ष्यों की तुलना इस वर्ष के रोमांचक फ़ुटबॉल विश्व कप से करते हुए किया.

उन्होंने कहा, “विश्व कप ने हमें एक बात स्पष्ट रूप से सिखाई है - 80वें मिनट में भी हार नहीं माननी चाहिए. सही समय पर किया गया एक गोल सब कुछ बदल सकता है. इसी तरह एक साथ हासिल किए गए 17 लक्ष्य पूरी दुनिया बदल सकते हैं. अब यह हम पर निर्भर करता है कि अगले चार वर्षों में हम किस तरह एक टीम की तरह मिलकर आगे बढ़ते हैं.”