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अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही फिर लगभग ठप

नासा के एक्वा उपग्रह से ली गई एक उपग्रह छवि जो फारसी खाड़ी को ईरान और अरब प्रायद्वीप के तटों के साथ भूरे, नीले और हरे रंग के शैवाल के फूलों के साथ दर्शाती है।
© NASA/Jeff Schmaltz होर्मुज़ जलडमरूमध्य की उपग्रह छवि.

अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही फिर लगभग ठप

शान्ति और सुरक्षा

अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक टकराव फिर बढ़ने के कारण गुरुवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सैकड़ों जहाज़ों पर क़रीब 6,000 नाविक फँसे हुए हैं, जबकि खाड़ी देश और हमलों की आशंका में हाई अलर्ट पर हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और जवाबी हमलों के फिर शुरू होने पर यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की चिन्ता को दोहराते हुए, अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की परिषद ने गुरुवार को ईरान की “लगातार धमकियों” और कई खाड़ी देशों व उनके क्षेत्रीय जलक्षेत्रों के विरुद्ध कथित हमलों की निन्दा की.

बहरीन, फ्रांस, जर्मनी और सऊदी अरब सहित कई देशों के अनुरोध पर IMO परिषद ने “महत्वपूर्ण नौवहन मार्गों” की सुरक्षा पर चर्चा के लिए बैठक की. बैठक के बाद जारी घोषणापत्र में जहाज़ों की आवाजाही पर पड़ रहे असर को रेखांकित किया गया, विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ और उसके आसपास, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है.

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IMO महासचिव आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने ज़ोर देकर कहा कि जब तक आवश्यक सुरक्षा हालात सुनिश्चित नहीं हो जाते, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही से बचा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों से फँसे हुए नाविकों को निकालने की प्रक्रिया फ़िलहाल रुकी रहेगी.

IMO के आँकड़ों के अनुसार, अब तक 136 जहाज़ों और 2,900 नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है.

घातक असर

ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो दिनों में हमलों और जवाबी हमलों में 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि पाँच प्रान्तों में हुए हमलों में दर्जनों लोग घायल हुए हैं.

मंगलवार को ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में हुए कथित हमलों के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में अस्थाई उछाल आया. गुरुवार को क़ीमतें कुछ घटकर लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, लेकिन वे अब भी युद्ध से पहले के स्तर से अधिक हैं.

तनाव ऐसे समय फिर बढ़ा है, जब मंगलवार को कथित तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र रहे तीन व्यापारी जहाज़ों को निशाना बनाया गया था. यह 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद हुआ.

युद्धविराम समझौते पर दबाव

समझौता ज्ञापन के 14 बिन्दुओं में “लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थाई रूप से समाप्त करने” की बात कही गई थी.

इसमें ईरान के यूरेनियम संवर्धन सहित कई मुद्दों पर “अन्तिम समझौता” हासिल करने के लिए 60 दिनों की बातचीत का भी प्रावधान था. ईरान को यह भी दोहराना था कि उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है.

समझौता ज्ञापन की अन्य शर्तों में सभी जहाज़ों के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलना और ईरान पर लगे अमेरिकी व यूएन सुरक्षा परिषद प्रतिबन्धों में ढील देना शामिल था.

इस जलमार्ग से दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है. युद्ध से पहले हर दिन क़रीब 130 वाणिज्यिक जहाज़ इससे होकर गुज़रते थे.