वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

सतत विकास लक्ष्यों से अरबों जीवन बेहतर, मगर चुनौतियाँ बरक़रार

दक्षिण कोरिया के बुनिया शहर के एक स्कूल में स्वच्छता शिक्षा सत्र के दौरान एक छात्र पानी के डिस्पेंसर पर अपने हाथ धो रहा है, जबकि अन्य छात्र और वयस्क उसे देख रहे हैं।
© UNICEF/Carmel Ndomba Mbikayi पूर्वी डीआर काँगो में स्कूली बच्चे, इबोला के प्रसार को रोकने में मदद के लिए स्वच्छता उपायों के तहत हाथ धोते हुए.

सतत विकास लक्ष्यों से अरबों जीवन बेहतर, मगर चुनौतियाँ बरक़रार

एसडीजी

2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने की समयसीमा तेज़ी से नज़दीक आ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार निवेश और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग से अरबों लोगों के जीवन में बदलाव आया है. लेकिन रिपोर्ट ने आगाह किया है कि इन लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के लिए सरकारों को अब अपनी कोशिशें कहीं अधिक तेज़ करनी होंगी.

ये निष्कर्ष मंगलवार को जारी 2026 की एसडीजी प्रगति रिपोर्ट में सामने आए हैं. रिपोर्ट में सतत विकास लक्ष्यों को “शान्ति के लिए साझा रूपरेखा” कहा गया है. साथ ही, इन 17 महत्वाकाँक्षी लक्ष्यों को हासिल करने से जुड़ी बड़ी राजनैतिक व वित्तीय चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है.

कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों ने 2015 में SDGs को शान्ति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए तत्काल कार्रवाई के आहवान के रूप में अपनाया था. 2030 एजेंडा के केन्द्र में यही लक्ष्य हैं और देशों ने इन्हें उसी वर्ष तक हासिल करने का संकल्प लिया है.

इसी वार्षिक रिपोर्ट के साथ, सतत विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच (HLPF) भी मंगलवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुआ, जो 15 जुलाई तक चलेगा. यह मंच SDGs पर प्रगति की समीक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र का मुख्य मंच है.

अधिकतर लक्ष्य अब भी पटरी पर नहीं

2015 के बाद से कई अहम उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं. इनमें शामिल हैं -

Tweet URL
  • लगभग एक अरब लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हुआ है.
  • 1.2 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबन्धित स्वच्छता सेवाएँ मिली हैं.
  • 2015 से 2024 के बीच HIV के नए संक्रमणों में 30 प्रतिशत की कमी आई है.
  • अब दुनिया की 92 प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुँच रही है.
  • इंटरनेट तक पहुँच 40 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है.
  • दुनिया की आधी से अधिक आबादी अब सामाजिक सुरक्षा के दायरे में है.

इन उपलब्धियों के बावजूद, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कुल मिलाकर प्रगति अभी भी बहुत धीमी है -

  • हर 10 में से एक व्यक्ति अब भी अत्यधिक ग़रीबी में जी रहा है.
  • 2.3 अरब लोग खाद्य असुरक्षा से प्रभावित हैं.
  • मातृ मृत्यु दर अब भी वैश्विक लक्ष्य से लगभग तीन गुना अधिक है.
  • 2025 में वैश्विक तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.43 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुँच गया.
  • 27 करोड़ 30 लाख बच्चे और युवा अब भी स्कूल से बाहर हैं.
  • वैश्विक शरणार्थी आबादी पिछले एक दशक में दोगुनी से अधिक हो गई है.

जिन 139 एसडीजी लक्ष्यों पर रुझान सम्बन्धी आँकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से केवल 36 प्रतिशत ही सही दिशा में या मध्यम गति से आगे बढ़ते दिख रहे हैं. वहीं, 49 प्रतिशत लक्ष्यों पर प्रगति बहुत धीमी है, जबकि 15 प्रतिशत लक्ष्य 2015 के आधार स्तर से भी पीछे चले गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, संघर्षों में बढ़ोत्तरी, जलवायु परिवर्तन, धीमी आर्थिक वृद्धि, बढ़ता क़र्ज़ और विकास सहायता में रिकॉर्ड गिरावट ने सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति को धीमा कर दिया है. इन चुनौतियों का सबसे अधिक असर दुनिया के सबसे कमज़ोर और वंचित लोगों पर पड़ा है.

मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में, यूएन उप महासचिव आमीना मोहम्मद ने ऐसे सुधारों का आहवान किया, जिनसे अन्तरराष्ट्रीय विकास बैंक देशों को क़र्ज़ राहत दे सकें और SDGs को आगे बढ़ाने वाली पहलों के लिए लम्बी अवधि का वित्त पोषण उपलब्ध करा सकें.

आमीना मोहम्मद ने कहा, “कई देशों से वादे पूरे करने को कहा जा रहा है, लेकिन उन्हें वे साधन नहीं दिए जा रहे, जिनसे वे उन वादों को निभा सकें.”

वार्षिक मंच शुरू

विभिन्न देशों की सरकारों के मंत्रियों, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नागरिक समाज प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने मंगलवार को HLPF के उदघाटन में हिस्सा लिया. यह मंच हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के तत्वावधान में आयोजित किया जाता है.

HLPF के दौरान सरकारें, संयुक्त राष्ट्र संस्थान, निजी क्षेत्र, युवजन, नागरिक समाज और अन्य समूह, विभिन्न प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल कार्यक्रमों में भाग लेंगे. इनमें वे सतत विकास पर अपने अनुभव, ज्ञान और विचार साझा करेंगे.

मंच की शुरुआत के अवसर पर ECOSOC अध्यक्ष लोक बहादुर थापा ने स्वच्छ ऊर्जा से लेकर जल सुरक्षा तक कई क्षेत्रों में बढ़ती असमानताओं की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने देशों से एसडीजी हासिल करने के लिए “अलग ढंग से काम करने” का आहवान किया.

लोक बहादुर थापा ने कहा, “2030 एजेंडा अब भी हमारा साझा वादा है - लोगों से, पृथ्वी से और भावी पीढ़ियों से.”

उन्होंने कहा, “आने वाले वर्ष यह नहीं पूछेंगे कि हमारी चुनौतियाँ कितनी कठिन थीं. वे पूछेंगे कि क्या हमने पूरी क्षमता से उनका सामना किया.”

बिजनेस सूट पहने एक व्यक्ति ओसाका में एक्सपो 2025 में UN के पवेलियन के एक बड़े बोर्ड के पास से गुजरता है, जिस पर सतत विकास लक्ष्य प्रदर्शित हैं।
UN News/Daniel Dickinson जापान में निजी क्षेत्र द्वारा अक्सर एसडीजी को बढ़ावा दिया जाता है.

मंत्री-स्तरीय खंड के दौरान कार्यक्रमों में और तेज़ी आएगी. इस खंड को उच्च-स्तरीय सत्र (HLS) भी कहा जाता है. यह 13 से 16 जुलाई तक चलेगा और इसके अन्त में एक मंत्री-स्तरीय घोषणा अपनाई जाएगी. इस पर वार्ताओं का नेतृत्व अल्बानिया और सिएरा लियोन के प्रतिनिधि करेंगे.

2026 की मंत्री-स्तरीय घोषणा के नवीनतम मसौदे में SDGs में निवेश बढ़ाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों के लिए शासन ढाँचे विकसित करने की प्रतिबद्धताएँ शामिल हैं.

पिछले वर्ष की घोषणा में, सदस्य देशों ने सतत विकास लक्ष्यों के लिए सार्वजनिक सहायता राशि बढ़ाने, डिजिटल खाइयों को पाटने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करने और मातृ एवं बाल मृत्यु दर कम करने पर सहमति जताई थी.

हर चार वर्ष में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अन्तर्गत एसडीजी सम्मेलन आयोजित किया जाता है, जिसमें राष्ट्राध्यक्ष लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ठोस प्रतिबद्धताओं वाली राजनैतिक घोषणा तैयार करते हैं. पिछला एसडीजी सम्मेलन 2023 में हुआ था और अगला 2027 में होगा.

स्कूल की वर्दी पहने एक छात्रा बाहर लगे नल पर हाथ धो रही है, जबकि वर्दी पहने अन्य बच्चे कतार में खड़े होकर उसे देख रहे हैं।
© UNICEF/Vinay Panjwani भारत के मेघालय में एक स्कूल में छात्र हाथ धोने के लिए क़तार में खड़े हैं.

पाँच लक्ष्यों पर विशेष ध्यान

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने की 2030 समयसीमा क़रीब आ रही है. इस वर्ष HLPF का ध्यान “परिवर्तनकारी, समतापूर्ण, नवाचारी और समन्वित कार्रवाई” पर केन्द्रित रहेगा.

हर वर्ष, सदस्य देश सभी 17 लक्ष्यों के बजाय कुछ चुने हुए लक्ष्यों की गहन समीक्षा करते हैं. SDG 17, (लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वैश्विक साझेदारियाँ), इस समीक्षा का स्थाई हिस्सा रहता है.

इस वर्ष SDG 17 के साथ-साथ, देश SDG 6 (स्वच्छ जल और स़ाफ़-सफ़ाई), SDG 7 (सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा), SDG 9 (उद्योग, नवाचार एवं बुनियादी ढाँचा), तथा SDG 11 (टिकाऊ शहर एवं समुदाय) से जुड़ी चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करेंगे.

SDGs पर सदस्य देशों की जवाबदेही मज़बूत करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र देशों को अपनी प्रगति की नियमित स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षाएँ (VNRs)करने के लिए प्रोत्साहित करता है. 2016 के बाद से संयुक्त राष्ट्र का लगभग हर सदस्य देश कम से कम एक VNR प्रस्तुत कर चुका है.

इस वर्ष मंच पर अल्बानिया से उरुग्वे तक 36 देश अपनी VNRs प्रस्तुत करेंगे. ये रिपोर्टें जमा की जा चुकी हैं और HLPF वेबसाइट पर उपलब्ध हैं.

एक पुरुष, हेलमेट पहने एक युवक और UNDP की जैकेट पहने एक महिला एक बिजली के पैनल के बगल में मुट्ठी उठाकर खड़े हैं और उनके हाथ में एक तख्ती है जिस पर लिखा है '7 किफायती और स्वच्छ ऊर्जा'।
© UNDP Malawi UNDP, मलावी में ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर, स्वच्छ, किफ़ायती, भरोसेमन्द और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाने के लिए काम कर रहा है.

2030 की ओर बढ़ते क़दम

संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारियों ने स्वीकार किया कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (SDGs) हासिल करना कठिन है. लेकिन उन्होंने यह भी दोहराया कि ये लक्ष्य भविष्य के लिए साझा सोच के साथ दुनिया को एकजुट करने में अहम हैं.

आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के अवर महासचिव, ली जुनहुआ ने कहा कि क़र्ज़ राहत, विकास वित्त, खाद्य व जल प्रणालियों, आवश्यक सेवाओं और असमानता पर निर्णायक कार्रवाई से सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में अब भी प्रगति सम्भव है.

ली जुनहुआ ने कहा, “अब ध्यान प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़ाकर क्रियान्वयन पर केन्द्रित करना होगा.”

आमीना मोहम्मद ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि SDGs को लागू करने में अब भी बड़ी बाधाएँ हैं, जिनमें वित्तीय संसाधनों की कमी सबसे प्रमुख है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, संयुक्त राष्ट्र इन 17 लक्ष्यों की दिशा में अपना काम कभी नहीं रोकता.

आमीना मोहम्मद ने कहा, “2015 के बाद लक्ष्य 2030 था. 2030 के बाद भी सदस्य देश कोई नई समयसीमा तय करेंगे, क्योंकि दुनिया ने अभी अपना काम पूरा नहीं किया