युवजन घर-परिवार बसाना चाहते हैं, मगर राह में कई बाधाएँ - UNFPA
दुनिया भर में प्रजनन दर इसलिए नहीं घट रही कि युवा पीढ़ी विवाह, पारिवारिक जीवन या माता-पिता बनने की ज़िम्मेदारी से बचना चाहती है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अनेक युवजन आर्थिक असुरक्षा, अस्थिर रोज़गार और आवास जैसी बाधाओं के कारण गहरे दबाव में हैं.
यह संयुक्त राष्ट्र की प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य एजेंसी, UNFPA, के एक बड़े नए सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्षों में से एक है. यह सर्वेक्षण तथाकथित “वैश्विक बेबी बस्ट” यानि दुनिया भर में जन्म दर में गिरावट से जुड़ी धारणाओं को भी चुनौती देता है.
जनसांख्यिकीय भविष्य पर सर्वेक्षण (Demographic Futures Survey) अपने प्रकार के सबसे बड़े और व्यापक सर्वेक्षणों में से एक है. इसमें 73 देशों और क्षेत्रों के 18 से 39 वर्ष आयु वर्ग के 1 लाख 8 हज़ार से अधिक इंटरनेट से जुड़े वयस्कों से रिश्तों, बच्चों और भविष्य पर उनके विचार पूछे गए.
बाधाएँ दूर करना आवश्यक
विभिन्न क्षेत्रों के युवजन ने साझेदारी और मातृत्व-पितृत्व की राह में लगभग समान बाधाओं का ज़िक्र किया. इनमें वित्तीय सुरक्षा, स्थिर रोज़गार और आवास सबसे प्रमुख हैं.
UNFPA की कार्यकारी निदेशक, डिएन कीता ने कहा, “युवजन अपने परिवारों और भविष्य को लेकर उम्मीद से भरे हैं और उनका दृष्टिकोण एकदम स्पष्ट है.”
उन्होंने कहा, “जब वित्तीय बाधाएँ दूर की जाती हैं और युवजन को अपने निर्णय लेने में समर्थन मिलता है, तो वे अपने लिए सही विकल्प चुन पाते हैं. आज उनके सपनों में निवेश करके, हम कल के लिए अधिक मज़बूत और समृद्ध समाज बना सकते हैं.”
युवजन क्या चाहते हैं
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि प्रजनन दर और जनसांख्यिकीय बदलाव पर सार्वजनिक चर्चा अक्सर ग़लत सवाल पर केन्द्रित रही है. सवाल यह नहीं है कि युवजन पारिवारिक जीवन को महत्व देते हैं या नहीं. असली सवाल यह है कि उन्हें अपने मनचाहे सम्बन्ध, परिवार और भविष्य बनाने के लिए किन परिस्थितियों की ज़रूरत है.
रिपोर्ट प्रजनन दर में गिरावट से जुड़ी कुछ धारणाओं को भी चुनौती देती है. संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, प्रति महिला जन्मों की औसत संख्या 1950 और 1960 के दशकों में लगभग पाँच थी, जो 2024 में घटकर दो से थोड़ी अधिक रह गई. अनुमान है कि 2100 तक यह घटकर 1.8 हो जाएगी.
अब 55 प्रतिशत देश और क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ प्रजनन दर, प्रति महिला 2.1 जीवित जन्मों से कम है. यह वह स्तर माना जाता है, जिस पर किसी देश की आबादी समय के साथ स्थिर रह सकती है, बशर्ते मृत्यु दर कम हो और प्रवासन न हो.
UNFPA सर्वेक्षण के अनुसार, इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा अक्सर ग़लत धारणाओं, अटकलों और महिलाओं के प्रति पक्षपात से प्रभावित होती है. इसके विपरीत, यह सर्वेक्षण दिखाता है कि इतने सारे युवजन अपनी आकांक्षाएँ पूरी क्यों नहीं कर पा रहे हैं.
माता-पिता बनने के लिए साझेदारी ज़रूरी
दो तिहाई से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि वे विवाह करना या किसी साथी के साथ रहना चाहते हैं. लगभग 80 प्रतिशत ने कहा कि माता-पिता बनने के लिए साझेदारी एक महत्वपूर्ण शर्त है.
इसके बावजूद, 25 से 39 वर्ष आयु वर्ग के लगभग एक चौथाई लोगों ने कहा कि वे साथी चाहते हैं, लेकिन फ़िलहाल अकेले हैं और किसी से डेटिंग भी नहीं कर रहे. पुरुषों ने यह बात महिलाओं की तुलना में अधिक कही.
57 प्रतिशत उत्तरदाताओं के अनुसार, विवाह या स्थिर सहजीवन सम्बन्ध की राह में सबसे बड़ी बाधाएँ आर्थिक और आवास सम्बन्धी हैं.
ये निष्कर्ष UNFPA के युवजन के साथ काम के दौरान सुने गए अनुभवों से भी मेल खाते हैं. भारत की एक युवती ने कहा, “सही साथी मिलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि मेरा मानना है कि बच्चे की परवरिश भावनात्मक और आर्थिक समर्थन के साथ माता-पिता दोनों की साझा ज़िम्मेदारी होनी चाहिए.”
नारीवाद कारण नहीं
सर्वेक्षण इस दावे को भी चुनौती देता है कि प्रजनन दर में गिरावट के लिए नारीवाद ज़िम्मेदार है. UNFPA के अनुसार, अनेक महिलाओं के पास अब भी अपने शरीर और प्रजनन से जुड़े निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता नहीं है.
उदाहरण के लिए, लगभग 10 में से एक महिला गर्भनिरोधक के बारे में निर्णय नहीं ले पाती. एक चौथाई महिलाएँ अपनी स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े निर्णय नहीं ले पातीं, और एक चौथाई महिलाएँ यौन सम्बन्धों के लिए ‘ना’ नहीं कह पातीं.
निष्कर्ष बताते हैं कि परिवार से जुड़े विकल्पों को लेकर पुरुषों और महिलाओं की सोच काफ़ी हद तक समान है. हालाँकि, महिलाओं ने बच्चों से जुड़ी बाधाओं - जैसेकि वित्तीय चिन्ताएँ, बाँझपन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ - को पुरुषों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना.
जन्म दर से जुड़ी ग़लत धारणा
एक और ग़लत धारणा यह है कि किशोरियों में जन्म दर का तेज़ी से गिरना समाजों के लिए समस्या है. UNFPA ने ज़ोर देकर कहा है कि किशोरियों में प्रजनन दर में कमी, जनस्वास्थ्य की सफलता का प्रतीक है, जनसांख्यिकीय ख़तरा नहीं.
किशोरियों में गर्भधारण कम होने का मतलब है कि अधिक लड़कियाँ स्कूल में रह पाती हैं और कम उम्र में गर्भावस्था से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से बचती हैं. इनमें से अनेक लड़कियाँ आगे चलकर माँ भी बनेंगी.
सर्वेक्षण के आँकड़ों से यह समझने में मदद मिलती है कि लोग अपनी इच्छा के अनुसार बच्चे क्यों नहीं कर पा रहे हैं. माता-पिता बनने के लिए वित्तीय सुरक्षा, स्थिर रोज़गार और मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक तैयारी को तीन सबसे अहम शर्तों के रूप में देखा गया.
पराग्वे के एक युवक ने कहा, “बच्चे को दुनिया में लाना केवल एक क़दम है. असली चुनौती उसकी परवरिश करना है.”
बच्चों से मिलने वाली ख़ुशी
सर्वेक्षण में दो जुड़ी हुई ग़लत धारणाओं पर भी बात की गई - पहली, कि युवा वयस्क बच्चे पैदा करने को लेकर बहुत स्वार्थी हैं, और दूसरी, कि लोगों को माता-पिता बनने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है.
निष्कर्षों से पता चला कि उत्तरदाताओं ने माता-पिता बनने की इच्छा होने की सबसे आम वजह बताई है, बच्चों से मिलने वाली ख़ुशी.
अधिकतर उत्तरदाताओं के पहले से ही बच्चे हैं. इसके अलावा, 35 से 39 वर्ष आयु वर्ग में जिन लोगों के बच्चे नहीं हैं, उनमें 79 प्रतिशत पुरुषों और 72 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे अब भी माता-पिता बनना चाहते हैं.
UNFPA के अनुसार, “अधिकतर लोग स्वार्थ के कारण माता-पिता बनने से इनकार नहीं कर रहे हैं, और न ही वे बच्चों से किसी बेहतर लाभ की उम्मीद में इन्तज़ार कर रहे हैं.”