अफ़ग़ानिस्तान में गहराता विस्थापन संकट
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को चेतावनी दी कि ग़रीबी, सूखे और भूकम्पों के कारण अफ़ग़ानिस्तान में विस्थापन संकट लगातार गम्भीर हो रहा है. यह अब दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन संकटों में से एक बन गया है.
अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) कार्यालय की नवीनतम सामाजिक-आर्थिक समीक्षा के अनुसार, कमज़ोर अर्थव्यवस्था, चार दशकों के युद्ध, 27 लाख लोगों की वापसी, बढ़ते जलवायु संकट और महिलाओं की घटती भागेदारी से, आजीविका एवं बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है.
UNDP के प्रशासक ऐलेक्ज़ेंडर डी क्रू ने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान में संकट शायद ही कभी अकेले आते हैं.” वह इस समय संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त बरहम सालीह के साथ देश के संयुक्त दौरे पर हैं. इस दौरान वे लौटे हुए समुदायों, साझीदारों और अधिकारियों से मुलाक़ात कर रहे हैं तथा सहनक्षमता व समाधानों के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं.
पिछले एक वर्ष में ही, भूकम्प से अनेक घर एवं आजीविकाएँ तबाह हो चुकी हैं. वहीं, निर्धनता अब भी अधिकतर लोगों के लिए कठोर वास्तविकता बनी हुई है.
तीन-चौथाई आबादी बुनियादी ज़रूरतों से वंचित
ऐसे समय में जब 74 प्रतिशत आबादी, यानि 2 करोड़ 90 लाख लोग, अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, UNDP विस्थापित और मेज़बान समुदायों को मिलकर पुनर्निर्माण करने में मदद दे रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को केवल वापसी तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक पुनर्बहाली की ओर ले जाना है.
इस संयुक्त दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रमुख, जलालाबाद में जारी प्रयासों को देखने पहुँचे, जहाँ उन्होंने भूकम्प प्रभावित समुदायों से मुलाक़ात की.
दोनों प्रमुख सुतान घाटी भी गए - एक ऐसा क्षेत्र, जो ऐलेक्ज़ेंडर डी क्रू के मुताबिक़ “पुनर्बहाली की कहानी” बयान करता है.
ईंट-ईंट जोड़कर पुनर्बहाली
भूकम्प से बुरी तरह प्रभावित सुतान में पुनर्बहाली प्रयासों के नतीजे अब दिखने लगे हैं.
बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई परियोजनाओं के तहत, एक पहल में महिलाएँ तार की जाली तैयार कर रही हैं और पुरुष ईंटें बना रहे हैं. इनसे एक सुरक्षा अवरोध बनाया जा रहा है, जिससे आपदा जोखिम कम करने, खेतों की रक्षा करने और आय के अवसर पैदा करने में मदद मिलती है.
ऐलेक्ज़ेंडर डी क्रू ने कहा, “आपात सहायता लोगों की जान बचाती है. वहीं, विकास उनका जीवन फिर से सँवारने में मदद करता है.”
बदलाव की दिशा में प्रगति
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ इन्हीं और अन्य साझा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं. अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र विशेष न्यास कोष समर्थित एक पहल पिछले वर्ष शुरू की गई थी. यह पहल उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में टिकाऊ समाधानों की नींव रखने में मदद कर रही है.
इसके तहत समुदायों को तैयार किया जा रहा है, लौटे हुए लोगों को सहायता दी जा रही है और दीर्घकालीन पुनर्बहाली के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बनाई जा रही हैं.
वापसी वाले इलाक़ों में एकीकृत विकास सहायता के लिए सहभागी कार्रवाई परियोजना का उद्देश्य, कुन्दूज़ और बग़लान प्रान्तों के तीन ज़िलों में विस्थापन से प्रभावित 69 समुदायों की मदद करना है.
यह परियोजना मेज़बान समुदायों, लौटे हुए लोगों और आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों को आवास, आवश्यक सेवाओं, आर्थिक अवसरों और बेहतर जीवन परिस्थितियों तक पहुँच दिलाने पर केन्द्रित है.
इस परियोजना के तहत अब तक:
• 11 समुदायों में बारूदी सुरंगों से दूषित 6,478 वर्ग मीटर भूमि साफ़ की गई है.
• 28 छोटी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें सुरक्षा दीवारें, सिंचाई सुधार और समुदायों तक पहुँच बेहतर बनाने के काम शामिल हैं.
• लौटे हुए लोगों की बड़ी संख्या वाले इलाक़ों में स्थाई आवास समाधान के लिए 425 परिवारों की पहचान की गई है.
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साथ ही, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, UNHCR, उन रास्तों पर जोखिम कम करने के लिए काम कर रही है, जहाँ शरणार्थी, प्रवासी और अन्य विस्थापित लोग आवाजाही करते हैं. एजेंसी शरण व्यवस्था को भी मज़बूत कर रही है, ताकि ज़रूरतमन्द लोगों को बेहतर सुरक्षा मिल सके.
2026 में 5 लाख 70 हज़ार से अधिक अफ़ग़ानों को पुनर्वास की ज़रूरत होने का अनुमान है. इसलिए एजेंसी उनके लिए सुरक्षित विकल्प बढ़ाने पर ज़ोर देगी, जिनमें शिक्षा, रोज़गार के अवसरों के लिए आवाजाही और परिवारों से फिर मिलाने जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में यूएन प्रयासों के बारे में जानकारी यहाँ उपलब्ध है.