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एआई पर नियंत्रण के लिए वैश्विक नियमों की दरकार

एक तकनीशियन आधुनिक, नीली रोशनी वाले सर्वर कक्ष में काम कर रहा है जो डेटा सेंटर रैक की पंक्तियों से भरा हुआ है।
© Adobe Stock/Pinkeyes डेटा सेवा केन्द्र में काम करता एक तकनीशियन.

एआई पर नियंत्रण के लिए वैश्विक नियमों की दरकार

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक वैश्विक नियम बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि नागरिक उपयोग के लिए बनाई गई शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिप अब युद्धक्षेत्रों तक पहुँच रही हैंजहाँ घातक रोबोट” पहले से ही बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं.

जिनीवा मे  AI प्रशासन पर संयुक्त राष्ट्र के पहले वैश्विक संवाद को सम्बोधित करते हुए, महासचिव ने इस क्रान्तिकारी तकनीक तक पहुँच बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिससे अभी अरबों लोग वंचित हैं.

उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाला कोई भी समझौता “वैश्विक भरोसे के योग्य” होना चाहिए और उसमें सुरक्षा को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए - ख़ासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को - ताकि उन्हें डिजिटल माध्यमों से की जाने वाली हेरफेर एवं दुर्व्यवहार से बचाया जा सके.

इस अपील का समर्थन करते हुए, महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने AI के “कुटिल इस्तेमालों” से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई की अपील की. उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 99 प्रतिशत डीपफ़ेक यौन प्रकृति के होते हैं और 96 प्रतिशत महिलाओं व लड़कियों को निशाना बनाते हैं.

डिजिटल खाई पाटना

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यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि AI के लिए वैश्विक नियमों और निगरानी व्यवस्था में विकासशील देशों की इस ‘स्वयं सीखने वाली’ तकनीक तक सुनिश्चित पहुँच भी प्राथमिकता होनी चाहिए. साथ ही, सभी AI डेटा केन्द्रों को 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से चलाया जाना चाहिए.

यूएन महासचिव ने AI नियमों के लिए अपनी पुरानी अपीलों को दोहराया, जिन्हें उन्होंने पहली बार 2017 में महासभा के समक्ष रखा था. उन्होंने कहा कि AI “हमारे साझा भविष्य के केन्द्र में” है. लेकिन यह भविष्य ऐसा होना चाहिए, जिसमें “मशीनें जानकारी दे सकती हैं, मगर निर्णय और जवाबदेही इनसानों की होनी चाहिए.”

AI के मुख्यधारा में आने के कुछ ही वर्षों में, इसका अर्थव्यवस्थाओं और समाजों पर गहरा असर पड़ा है - सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों रूपों में. इसी पृष्ठभूमि में, संयुक्त राष्ट्र इस तकनीक के लिए वैश्विक नियम तय करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है. इसी दिशा में जिनीवा में एआई प्रशासन पर पहला वैश्विक संवाद आयोजित किया गया है.

इस बैठक में कम्पनियाँ, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. वे इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इस रूपान्तरकारी तकनीक के केन्द्र में मानवता को कैसे रखा जाए. दूसरा संवाद मई में न्यूयॉर्क में होगा.

AI पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के सह-अध्यक्ष योशुआ बेंगियो ने कहा कि इस तकनीक के विकास की रफ़्तार धीमी पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “बेहद चिन्ताजनक परीक्षणों से यह भी पता चला है कि अग्रणी AI मॉडल इनसानों को धोखा देने और यह समझने में सक्षम हैं कि कब उनका परीक्षण किया जा रहा है.”

AI नियमन की समयरेखा

2017: AI नियंत्रणों के लिए शुरुआती अपील में, महासचिव गुटेरेश ने इस क्रान्तिकारी तकनीक की “असाधारण” सम्भावनाओं की सराहना की. साथ ही, उन्होंने महासभा को आगाह किया कि इसका रोज़गार, वैश्विक सुरक्षा और “समाजों के मूल ताने-बाने” पर गहरा असर पड़ सकता है.

2023: यूएन प्रमुख के AI पर उच्च-स्तरीय सलाहकार निकाय ने इस ‘स्वयं सीखने वाली’ तकनीक के वैश्विक प्रशासन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

2024: भविष्य के लिए समझौते और वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट ने AI प्रशासन मॉडल के लिए शासनादेश प्रदान किया.

जून 2026: कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ने चेतावनी दी कि AI “अपने आप या दुर्भावनापूर्ण उपयोगकर्ताओं के कारण विनाशकारी क्षति पहुँचा सकती है”, जबकि यह तकनीक “वैज्ञानिक समझ और सरकारों की अनुकूलन क्षमता, दोनों से आगे निकलती जा रही है.”

6-7 जुलाई 2026: AI प्रशासन पर पहला संयुक्त राष्ट्र वैश्विक संवाद और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-अच्छाई के लिए वैश्विक सम्मेलन (AI for Good Summit) जिनीवा में आयोजित हो रहे हैं. महासचिव ने कहा कि अब इन बैठकों से दुनिया को आगे की स्पष्ट दिशा मिलनी चाहिए.

‘समानता लाने वाला साधन’

यूएन महासचिव ने प्रतिनिधियों से कहा कि यदि AI का सही इस्तेमाल हो और इसे व्यापक रूप से साझा किया जाए, तो यह “दशकों के विकास को कुछ वर्षों में समेट” सकती है और “21वीं सदी का बड़ा समानता लाने वाला साधन” बन सकती है.

लेकिन इसके लिए पहले इस तकनीक की सुरक्षा की पूरी जाँच होनी चाहिए और क़ानूनी ज़िम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा, “जब देश इस बात पर सहमत होते हैं कि प्रणालियों की जाँच कैसे की जाए, जोखिम कैसे मापा जाए और ज़िम्मेदारी कैसे तय की जाए, तो सुरक्षा भी तकनीक के साथ आगे बढ़ती है. जब वे ऐसा नहीं करते, तो असंगत नियमों का बिखरा हुआ ढाँचा लागत बढ़ाता है, दुनिया को बाँटता है - और किसी की भी रक्षा नहीं करता.”

मछलियों को ड्रोन के ज़रिए भोजन दिया जा रहा है.
© World Bank ड्रोन के ज़रिए मछलियों को चारा खिलाना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है, लेकिन इस क्रान्तिकारी तकनीक का एक “कुटिल” पक्ष भी है, यह बात सोमवार को जिनीवा में AI शासन पर वैश्विक संवाद में कही गई.

यूएन प्रमुख ने कहा कि भविष्य की किसी भी AI शासन व्यवस्था में बच्चों की सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने देशों से AI बाल सुरक्षा प्रतिज्ञा अपनाने की अपील की.

उन्होंने कहा, “किसी भी बच्चे को अनियंत्रित AI के लिए प्रयोग का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए... हम किसी दवा को बच्चे तक तब तक नहीं पहुँचने देते, जब तक वह सुरक्षित साबित न हो जाए. हम हर खिलौने की जाँच करते हैं; लेकिन AI हमारे बच्चों तक पहुँच चुकी है - उनकी पढ़ाई, उनकी दोस्ती और उनके सबसे निजी सवालों तक - इससे पहले कि किसी ने पूछा हो कि इसका उन पर क्या असर होगा.”

बाल सुरक्षा प्रतिज्ञा क्या है?

संयुक्त राष्ट्र की बाल सुरक्षा प्रतिज्ञा के तहत, AI विकासकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि:

  • तकनीक सुरक्षित है - बच्चों के लिए उपलब्ध कोई भी AI प्रणाली, बच्चों से जुड़ी विशेष सुरक्षा जाँच और स्वतंत्र निगरानी के बिना शुरू नहीं की जानी चाहिए.
  • यौन दुर्व्यवहार के मामले में कोई रियायत नहीं - किसी भी कम्पनी को अपने AI से बच्चों की यौन तस्वीरें बनाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. हर कम्पनी को ऐसी सामग्री की पहचान करनी होगी, उसकी सूचना देनी होगी और उसे हटाना होगा.
  • यदि कोई बच्चा संकट के संकेत दिखाए, तो “प्रणाली को रुकना होगा और उसे वास्तविक मानवीय सहायता से जोड़ना होगा,” यूएन प्रमुख ने कहा. उन्होंने कहा, “जब किसी बच्चे को नुक़सान पहुँचता है, तो जवाब कभी यह नहीं होना चाहिए कि ‘यह एल्गोरिदम ने किया.’”

मानवाधिकारों को प्राथमिकता

AI नियंत्रणों की दूसरी प्राथमिकता के रूप में मानवाधिकारों पर ज़ोर देते हुए, यूएन प्रमुख ने कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, “AI को कभी भी लोगों की गरिमा छीनने या भेदभाव को और गहरा करने का माध्यम नहीं बनना चाहिए. न्याय, स्वास्थ्य सेवा और पुलिस व्यवस्था जैसे हर उच्च-जोखिम वाले निर्णय में मशीनें जानकारी दे सकती हैं, मगर निर्णय इनसानों को ही लेना होगा - और जवाबदेही भी उन्हीं की होगी.”

AI में सार्वजनिक निवेश ‘नगण्य’

AI में अधिक सार्वजनिक निवेश की अपील करते हुए महासचिव ने कहा कि AI ढाँचे में निजी निवेश लगभग 500 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि विकासशील देशों में AI क्षमता निर्माण के लिए सार्वजनिक समर्थन उसकी तुलना में “नगण्य” है.

यूएन प्रमुख ने घोषणा की कि इस खाई को पाटने में मदद के लिए 20 से अधिक देशों ने उनकी पहल का समर्थन किया है, जिसके तहत AI क्षमता निर्माण पर आदान-प्रदान और सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैश्विक नैटवर्क बनाया जाएगा.

उन्होंने कहा, “हम डिजिटल खाई को AI विभाजन में बदलने नहीं दे सकते, और न ही AI विभाजन को विकास, सुरक्षा और सम्प्रभुता की खाई बनने दे सकते हैं.”

पारदर्शिता की अपील

यूएन प्रमुख ने पारदर्शिता की अपनी अपील दोहराते हुए हर बड़ी AI कम्पनी से आग्रह किया कि वे अपनी AI प्रणालियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले पूरे असर - कार्बन उत्सर्जन, पानी की खपत और भूमि उपयोग को मापें और उसकी जानकारी सार्वजनिक करें. उन्होंने यह भी कहा कि कम्पनियों को 2030 तक हर डेटा केन्द्र को नवीकरणीय ऊर्जा से चलाने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए.

उन्होंने कहा, “AI भले ही दिखाई न दे, लेकिन पर्यावरण पर इसका असर बिल्कुल वास्तविक है.” उन्होंने ध्यान दिलाया कि डेटा केन्द्र अधिकाँश देशों से भी अधिक बिजली इस्तेमाल करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की AI पर्यावरणीय पारदर्शिता पहल को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “2030 तक, डेटा केन्द्र बिजली की इतनी खपत कर सकते हैं कि वे दुनिया के केवल पाँच देशों से कम और बाक़ी सभी देशों से अधिक बिजली इस्तेमाल करेंगे. वे इतना पानी भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जितना उप-सहारा अफ़्रीका के 1.3 अरब लोगों की पूरे एक वर्ष की ज़रूरत पूरी करने के लिए काफ़ी होगा.”