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AI के बढ़ते ख़तरों के बीच वैश्विक नियमन की कोशिशें तेज़

सफेद लैब कोट पहने एक चिकित्सा पेशेवर कार्यालय में कंप्यूटर वर्कस्टेशन पर खड़ा होकर स्क्रीन देख रहा है। यह तस्वीर मोजाम्बिक में कैंसर नियंत्रण समीक्षा मिशन का हिस्सा है।
© IAEA मोज़ाम्बीक में एक डॉक्टर बता रहे हैं कि कैंसर रोगियों के उपचार में परमाणु तकनीक किस तरह मदद कर रही है.

AI के बढ़ते ख़तरों के बीच वैश्विक नियमन की कोशिशें तेज़

संस्कृति और शिक्षा

क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पूरी मानवता के लिए सुरक्षित, निष्पक्ष और लाभकारी साबित हो सकती है, वह भी “विनाशकारी क्षति” पहुँचाए बिना? सोमवार को जिनीवा में शुरू हुए संयुक्त राष्ट्र के एक अहम शिखर सम्मेलन में इसी सवाल पर मंथन हो रहा है.

एआई प्रशासन पर वैश्विक संवाद के दौरान सरकारें, प्रौद्योगिकी कम्पनियाँ, शिक्षाविद और नागरिक समाज के प्रतिनिधि दो दिनों तक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि ऐसी तकनीक को कैसे विनियमित किया जाए, जो मौजूदा नियमों और सुरक्षा उपायों से कहीं अधिक तेज़ी से विकसित हो रही है.

ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल किए जाने पर AI, दुनिया भर के लोगों के लिए रूपान्तरकारी बदलाव ला सकती है. मगर, इसके साथ नए ख़तरों की आशंकाएँ भी जुड़ी हैं. AI जिस तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रही है, उसके मुक़ाबले में उसे सुरक्षित ढंग से नियंत्रित करने के उपाय पीछे छूटते जा रहे हैं.

मारिया रेसा, योशुआ बेंगियो और एग्रीसेल्डा लोपेज़ न्यूयॉर्क में एक बाहरी छत पर औपचारिक समूह चित्र के लिए पोज़ दे रहे हैं।
© UN Photo/Eskinder Debebe मारिया रेसा, योशुआ बेंगियो और एग्रिसेल्डा लोपेज़. (बाएँ से दाएँ)

बैठक से पहले, यूएन न्यूज़ ने चार प्रतिभागियों से बातचीत की: इस संवाद के दो सह-अध्यक्षों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के दो सह-अध्यक्षों से. इस पैनल ने हाल ही में AI से जुड़े अवसरों और जोखिमों पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है.

इन विशेषज्ञों ने AI की सम्भावनाओं, उससे जुड़े जोखिमों और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य साझा सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर अपने विचार रखे.

योशुआ बेंगियो (वैज्ञानिक पैनल): AI कई क्षेत्रों में मानव क्षमताओं के क़रीब पहुँच रही है या उन्हें पार कर रही है. इसकी रफ़्तार, वैज्ञानिक समझ और सरकारों की अनुकूलन क्षमता, दोनों से आगे निकल रही है. इस क्षेत्र में असाधारण प्रगति हुई है, जो दुनिया को बदल रही है, और फ़िलहाल इसके रुकने के संकेत नहीं दिखते.

एस्टोनिया के स्थायी प्रतिनिधि रीन टैमसार ने यूक्रेन में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के विषय पर UN सुरक्षा परिषद को संबोधित किया।
© UN Photo/Evan Schneider एस्टोनिया के राजदूत रीन ताम्सार, सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए. (फ़ाइल)

एस्टोनिया के राजदूत रीन ताम्सार (वैश्विक संवाद): दुनिया के अनेक देशों के लिए AI अवसरों की समानता बढ़ाने वाला बड़ा साधन साबित हो सकती है. यह आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता, विज्ञान और स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत कर सकती है. व्यापक रूप से देखें तो मशीन लर्निंग उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकती है. यही इसकी सम्भावना है.

ऐल सैल्वाडोर की राजदूत एग्रिसेल्डा लोपेज़ (वैश्विक संवाद): AI सरकारों के लिए अपने कामकाज और सेवाओं की आपूर्ति को बेहतर बनाने का एक अहम साधन हो सकती है.

रीन ताम्सार: AI एक ऐसा साधन है, जिससे दुनिया भर में लाखों लोग लाभान्वित हो सकते हैं. मगर, यदि यह ग़लत हाथों में चली जाए, तो इसका इस्तेमाल दबाव बनाने, सरकारों में भरोसा कमज़ोर करने, लोकतांत्रिक ढाँचों को नुक़सान पहुँचाने, दुष्प्रचार फैलाने और सूचना की अखंडता को कमज़ोर करने के लिए भी किया जा सकता है.

एक व्यक्ति विरोध प्रदर्शन में एक तख्ती पकड़े हुए है जिस पर 'नफरत नहीं' लिखा है और 'नफरत' शब्द के ऊपर एक वृत्त और तिरछी रेखा का चिन्ह बना हुआ है। पृष्ठभूमि में भीड़ और पेड़ दिखाई दे रहे हैं।
© Adobe Stock/JP Photography नफ़रत को नकारने वाला एक पोस्टर पकड़े हुए.

मारिया रेसा (वैज्ञानिक पैनल): AI की पहली पीढ़ी का इस्तेमाल सोशल मीडिया में हुआ, जिससे झूठ और तेज़ी से फैला. यदि उसमें भय, क्रोध और नफ़रत शामिल हो, तो वह वायरल रूप से फैलती है. सूचना की अखंडता इस लड़ाई के केन्द्र में है. यदि आप तथ्य और कल्पना में फ़र्क़ नहीं कर सकते, तो लोकतंत्र सम्भव नहीं है.

यही वह दुविधा है जिसका हम सामना कर रहे हैं. इसी वजह से मैं इसे ‘सूचना आर्मागेडन’ कहती हूँ - यानि सूचना व्यवस्था का ऐसा विनाशकारी संकट, जिसमें तथ्य और झूठ के बीच फ़र्क़ करना बेहद मुश्किल हो जाए.

योशुआ बेंगियो: AI के भ्रामक व्यवहार के बढ़ते प्रमाणों के बीच, विज्ञान फिलहाल यह गारण्टी नहीं दे सकता कि जैसे-जैसे AI की क्षमताएँ बढ़ेंगी, वह अपने आप या दुर्भावनापूर्ण उपयोगकर्ताओं के कारण विनाशकारी क्षति नहीं पहुँचाएगी.

रीन ताम्सार: AI विकसित करने वाले अग्रणी विकासकर्ता मुख्य रूप से दो देशों, अमेरिका और चीन में केन्द्रित हैं. इससे अन्य देशों के सामने कई सवाल खड़े होते हैं.

विकासशील देशों को विशेष रूप से यह चिन्ता है कि AI विभाजन उन्हें बहुत पीछे छोड़ सकता है. यह तकनीक इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है कि एक बार पीछे छूटने के बाद उनके लिए इसकी बराबरी कर पाना बेहद मुश्किल हो सकता है.

एग्रिसेल्डा लोपेज़: AI विभाजन वास्तविक है. कुछ देशों के पास AI के इस्तेमाल के लिए मज़बूत ढाँचा, कुशल लोग और शोध क्षमता है, जबकि कई अन्य देश अब भी इंटरनेट कनैक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं के बुनियादी ढाँचे जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

तंजानिया में दो छोटे लड़के एक कक्षा में टैबलेट कंप्यूटर पर सीखने में लगे हुए हैं।
© UNHCR/Maimuna Mtengela तंज़ानिया में दो छोटे लड़के एक टैबलेट पर काम करते हुए.

मारिया रेसा: दुनिया उस तकनीक को नियंत्रित नहीं कर सकती, जिसे वह ठीक से समझती ही नहीं. पैनल की रिपोर्ट हर क्षेत्र से जुटाए गए स्वतंत्र वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है और हर सरकार के लिए उपलब्ध है. इसका सन्देश साफ़ है: सम्भावनाएँ बड़ी हैं, लेकिन जोखिम भी वास्तविक हैं, और देर करना बहुत महंगा पड़ सकता है.

योशुआ बेंगियो: मैं चाहता हूँ कि दुनिया भर की सरकारें यह बेहतर ढंग से समझें कि भविष्य में AI किस दिशा में जा सकती है. अभी हमारे पास न तो पर्याप्त राष्ट्रीय या अन्तरराष्ट्रीय शासन व्यवस्था है, और न ही ऐसे तरीक़े, जिनसे AI के लाभ सभी के साथ साझा किए जा सकें. प्रभावी कार्रवाई के लिए वैश्विक नीति-निर्माताओं को इन प्रणालियों को समझना होगा.

एग्रिसेल्डा लोपेज़: वैश्विक संवाद, संयुक्त राष्ट्र में AI शासन पर चर्चा का पहला मंच है. यह सदस्य देशों को एक साथ आकर समावेशी चर्चा करने का अवसर देता है. लेकिन यह केवल सरकारों तक सीमित नहीं है; इसका उद्देश्य अलग-अलग हितधारकों को भी साथ लाना है.

मारिया रेसा: कोई भी देश इस तकनीक से अकेले नहीं निपट सकता. इसके लिए बहुपक्षीय समाधान की आवश्यकता है, और संयुक्त राष्ट्र ऐसी संस्था है जो यह भूमिका निभा सकती है. अब सवाल यह है कि क्या सदस्य देश आगे बढ़कर कार्रवाई करेंगे?

संयुक्त राष्ट्र और AI

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल में दुनिया के हर क्षेत्र से 40 विशेषज्ञ शामिल हैं, जो अपनी व्यक्तिगत क्षमता में काम कर रहे हैं. पैनल ने अपनी पहली रिपोर्ट 1 जुलाई को प्रकाशित की.

इस पैनल का काम AI प्रशासन पर संयुक्त राष्ट्र वैश्विक संवाद का आधार बनेगा. यह संवाद 6 -7 जुलाई 2026 को जिनीवा में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ अन्तरराष्ट्रीय समुदाय इस तकनीक के प्रबन्धन के लिए वैश्विक तरीक़ों पर चर्चा करेगा.