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यूएन वित्तीय सुधार: कभी न मिली राशि लौटाने की बाध्यता समाप्त

संयुक्त राष्ट्र महासचिव न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान एक मंच पर बोल रहे हैं।
UN Photo/Eskinder Debebe यूएन महासभा का एक विहंगम दृश्य.

यूएन वित्तीय सुधार: कभी न मिली राशि लौटाने की बाध्यता समाप्त

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र ने दशकों पुराने उस अत्यन्त जटिल और अव्यावहारिक वित्तीय नियम” को बदल दिया हैजिसके कारण उसे ऐसी धनराशि भी सदस्य देशों को लौटानी पड़ती थीजो उसे कभी मिली ही नहीं थी.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रशासनिक और बजटीय मामलों की ज़िम्मेदारी सम्भालने वाली अपनी पाँचवीं समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर मंगलवार को यह निर्णय लिया.

यह फ़ैसला ऐसे समय लिया गया है, जब सदस्य देशों के अनिवार्य योगदान में देरी के कारण संयुक्त राष्ट्र गम्भीर नक़दी संकट से जूझ रहा है. इसकी वजह से, भर्ती, शान्तिरक्षा अभियानों और मानवीय सहायता समेत समूची यूएन प्रणाली में ख़र्च में कटौती करनी पड़ रही है.

सुधार का स्वागत 

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मतदान के बाद इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए एक वक्तव्य में कहा कि पुराने वित्तीय नियम संगठन की “स्थिरता को ख़तरे में डाल रहे थे.”

उन्होंने कहा कि महासभा ने चार वर्ष की परीक्षण अवधि के लिए नई व्यवस्था लागू करने पर सहमति दी है. इसके तहत ख़र्च न हुई धनराशि सदस्य देशों को तभी लौटाई जाएगी, जब उसके लिए वास्तविक नक़दी उपलब्ध होगी.

यूएन प्रमुख ने कहा कि इस निर्णय से नियमित और शान्तिरक्षा बजट के संसाधनों का अधिक ज़िम्मेदार और पूर्वानुमानित ढंग से प्रबन्धन करने तथा सदस्य देशों द्वारा सौंपे गए दायित्वों को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी.

यूएन के भविष्य के लिए ‘बेहद अहम’

महासचिव ने कहा कि यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र के “कामकाज को जारी रखने, विशेष रूप से शान्तिरक्षा अभियानों के लिए, बेहद अहम” है. उन्होंने इसे जनवरी में पदभार सम्भालने वाले अगले महासचिव के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुधार क़रार दिया.

अब संयुक्त राष्ट्र को वह धनराशि लौटाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा, जिसका भुगतान उसे सदस्य देशों से कभी मिला ही नहीं था.

बकाया राशि रिकॉर्ड स्तर पर

संगठन की वित्तीय स्थिति पर पिछले महीने जारी महासचिव की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के अन्त तक सदस्य देशों के अनिवार्य योगदान में रिकॉर्ड 1.6 अरब डॉलर राशि बकाया थी.

सामान्य बजट, शान्तिरक्षा अभियानों और दो अन्तरराष्ट्रीय न्यायाधिकरणों से जुड़ी कुल बकाया राशि 6.5 अरब डॉलर से अधिक है.

नक़दी संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष की शुरुआत में ख़र्च सीमित करने के कड़े उपाय लागू किए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि महासचिव ने सदस्य देशों से या तो अपना पूरा योगदान समय पर देने, या संगठन को गम्भीर वित्तीय संकट से बचाने के लिए उसके वित्तीय नियमों में बुनियादी बदलाव करने का आग्रह किया है.

पुराने नियम से संयुक्त राष्ट्र के हाथ बँधे

मंगलवार रात तक लागू 80 वर्ष पुराने वित्तीय नियमों के तहत संयुक्त राष्ट्र को बची हुई धनराशि सदस्य देशों को लौटानी पड़ती थी. यह राशि उनके भविष्य के अनिवार्य योगदान में समायोजित की जाती थी.

यह नियम तब भी लागू होता था, जब सदस्य देशों के देर से भुगतान करने या धनराशि कभी प्राप्त न होने के कारण संयुक्त राष्ट्र उसे ख़र्च नहीं कर पाया हो.

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने फ़रवरी में योरोपीय संसद को सम्बोधित करते हुए यह मुद्दा उठाया था.

संयुक्त राष्ट्र के “अस्तित्व के लिए ख़तरा बने नक़दी संकट” का उल्लेख करते हुए उन्होंने योरोपीय देशों से इस “अत्यन्त जटिल एवं अव्यावहारिक वित्तीय नियम” को बदलने के लिए प्रस्ताव पेश करने का आग्रह किया था.

व्यापक सन्देश

मतदान के बाद महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा, “इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के ज़रिये महासभा ने संयुक्त राष्ट्र को आसन्न वित्तीय संकट से बचाया और 75 वर्ष पुराने उस नियम को बदला, जो लम्बे समय से संगठन की वित्तीय स्थिरता को कमज़ोर कर रहा था.”

उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने यह व्यापक सन्देश भी दिया है कि गहरे विभाजन के दौर में भी संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई कर सकते हैं.