भारत-यूएन कोष: कैरेबियाई क्षेत्र में माँ से बच्चे में संक्रमण रोकने की मुहिम
भारत समर्थित एक पहल, कैरेबियाई देशों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत कर रही है और एचआईवी, सिफ़लिस तथा हैपेटाइटिस बी का माँ से बच्चे में संक्रमण समाप्त करने के प्रयासों को आगे बढ़ा रही है.
पैन अमेरिकन स्वास्थ्य संगठन (PAHO) के नेतृत्व वाली इस परियोजना को भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष से 10 लाख डॉलर की सहायता मिली है. दक्षिण-दक्षिण सहयोग की इस प्रमुख पहल को संयुक्त राष्ट्र दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय (UNOSSC) के माध्यम से लागू किया जा रहा है.
दक्षिण-दक्षिण सहयोग से आशय विकासशील देशों के बीच ऐसी साझेदारी से है, जिसमें वे आपसी सम्मान और साझा लाभ के सिद्धान्तों के आधार पर विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मिलकर काम करते हैं.
भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष इसी भावना के तहत अनेक देशों में उनके नेतृत्व वाली विकास परियोजनाओं को समर्थन देता है.
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, प्रयोगशाला क्षमता, रोग निगरानी और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के ज़रिये यह परियोजना कैरेबियाई क्षेत्र में बच्चों को रोकथाम योग्य संक्रमणों से मुक्त और स्वस्थ जीवन की शुरुआत देने का प्रयास कर रही है.
ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
बहामास तथा तुर्क और कैकोस द्वीपसमूह को हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से माँ से बच्चे में कुछ रोगों का संक्रमण समाप्त करने का प्रमाणन मिला है.
तुर्क और कैकोस द्वीपसमूह माँ से बच्चे में हैपेटाइटिस बी का संक्रमण समाप्त करने वाला अमेरिका क्षेत्र का पहला और दुनिया का केवल तीसरा क्षेत्र बन गया है. उसे एचआईवी संक्रमण समाप्त करने का प्रमाणन भी मिला है.
वहीं, बहामास को माँ से बच्चे में एचआईवी संक्रमण समाप्त करने के लिए प्रमाणित किया गया है.
बहामास की इस सफलता की नींव 1990 के दशक के अन्त में रखी गई थी, जब सभी गर्भवती महिलाओं को उनकी राष्ट्रीयता या क़ानूनी स्थिति की परवाह किए बिना जाँच और प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराई गई.
मानकीकृत प्रक्रियाओं, बेहतर प्रयोगशाला सेवाओं और उन्नत उपचार से नवजात शिशुओं में एचआईवी संक्रमण कम करने में मदद मिली. बहामास ने अपने अनुभव और सीख अन्य कैरेबियाई देशों के साथ भी साझा की.
देश के नेताओं ने दिवंगत डॉक्टर माइकल पैरी गोमेज़ के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने बहामास में एचआईवी से निपटने के प्रयासों को दिशा दी थी.
स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री माइकल डारविल ने कहा, “उनका काम हमें याद दिलाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रगति कभी संयोग से नहीं होती.”
प्रधानमंत्री फ़िलिप डेविस के अनुसार, यह उपलब्धि दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवा को राष्ट्रीय विकास के केन्द्र में रखकर कितना कुछ हासिल किया जा सकता है.
भारत का सहयोग
‘CARICOM (कैरेबियाई समुदाय) सदस्य देशों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ 'माँ से बच्चे में संक्रमण उन्मूलन (EMTCT) रणनीति को मज़बूत करने’ के लिए शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य, क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में मौजूद प्रमुख कमियों को दूर करना है.
यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, प्रयोगशालाओं की जाँच क्षमता बढ़ाने तथा एचआईवी, सिफ़लिस और हैपेटाइटिस बी की निगरानी मज़बूत करने में सहयोग दे रही है.
कैरेबियाई क्षेत्र में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी ने कहा कि ये उपलब्धियाँ केवल बेहतर स्वास्थ्य आँकड़ों तक सीमित नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “ये मज़बूत साझेदारी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में वर्षों के निवेश, सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों, प्रभावी निगरानी और हर बच्चे को स्वस्थ व रोकथाम योग्य रोगों से मुक्त जीवन की शुरुआत देने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं.”
उन्होंने कहा, “भारत को भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से ऐसी पहलों का समर्थन करने पर गर्व है.”
उपलब्धियाँ बनाए रखने का संकल्प
तुर्क और कैकोस द्वीपसमूह के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री काइल नोल्स ने कहा कि यह उपलब्धि गर्व के साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी लेकर आई है.
उन्होंने कहा, “हम इन उपलब्धियों को बनाए रखने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करने और हर माँ व बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, समान और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
तुर्क और कैकोस द्वीपसमूह के प्रीमियर चार्ल्स वॉशिंगटन मिसिक ने कहा कि छोटे आकार के बावजूद यह क्षेत्र नेतृत्व करने और दूसरों के लिए मानक स्थापित करने की क्षमता रखता है.
उन्होंने कहा, “यह सफलता रातोंरात नहीं मिली. इसके पीछे वर्षों का समर्पण, रणनैतिक योजना और निरन्तर निवेश है.”
दुनिया भर के नेताओं ने भी इन उपलब्धियों की सराहना की है.
WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि निरन्तर राजनैतिक प्रतिबद्धता, मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच के ज़रिये उल्लेखनीय प्रगति सम्भव है.
PAHO के निदेशक डॉक्टर जार्बस बारबोसा ने एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और किसी को भी पीछे न छोड़ने के संकल्प पर बल दिया.
PAHO-WHO की सहायक निदेशक डॉक्टर रोंडा सीली-थॉमस ने कहा कि जन्म के समय दी जाने वाली हैपेटाइटिस बी वैक्सीन बेहद महत्वपूर्ण है. तुर्क और कैकोस द्वीपसमूह का अनुभव दिखाता है कि मज़बूत टीकाकरण कार्यक्रम माँ से बच्चे में रोग संक्रमण समाप्त करने की नींव बन सकता है.
स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण
नवम्बर 2025 से CARICOM देशों और क्षेत्रों के 600 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण की रोकथाम और उपचार सेवाएँ मज़बूत करने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं.
PAHO के समन्वय में आयोजित इन सत्रों ने स्वास्थ्यकर्मियों और नीति निर्माताओं को अनुभव व सीख साझा करने के लिए एक क्षेत्रीय मंच भी उपलब्ध कराया है.
UNAIDS की क्षेत्रीय निदेशक लुइसा कबाल ने कहा कि माँ से बच्चे में एचआईवी संक्रमण समाप्त करने के प्रयासों में कैरेबियाई क्षेत्र दुनिया में अग्रणी है.
दुनिया भर में जारी किए गए 23 प्रमाणनों में लगभग 60 प्रतिशत इसी क्षेत्र को मिले हैं. इन प्रयासों ने 2010 के बाद से नए एचआईवी संक्रमणों में 21 प्रतिशत की कमी लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पैन कैरेबियन साझेदारी की कार्यकारी निदेशक वेंडी टेलफ़र्ड-इमैनुएलसन ने भारत के वित्तीय सहयोग और PAHO के तकनीकी नेतृत्व की सराहना की.
उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा ज़िम्मेदारी है.”
प्रगति के बावजूद चुनौतियाँ बरक़रार
ऐतिहासिक उपलब्धियों के बावजूद स्वास्थ्य अधिकारियों ने निरन्तर निवेश और सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया है.
PAHO के आँकड़ों के अनुसार, 2016 से 2022 के बीच अमेरिका क्षेत्र में जन्मजात सिफ़लिस के मामलों में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई. केवल 2022 में 36 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए गए.
आँकड़े उपलब्ध कराने वाले 26 देशों में से 19 ने गर्भवती महिलाओं में भी सिफ़लिस संक्रमण बढ़ने की जानकारी दी.
क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में गर्भवती महिलाओं के लिए त्वरित जाँच, आम आबादी में जाँच और उपचार का विस्तार तथा रोग निगरानी प्रणालियों को मज़बूत करना शामिल है.
साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि प्रत्येक नवजात को जन्म के तुरन्त बाद हैपेटाइटिस बी का टीका और बाद में उसकी शेष ख़ुराकें मिलें.
यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की कमियाँ दूर कर कैरेबियाई बच्चों के लिए अधिक समान, सुदृढ़ और स्वस्थ भविष्य बनाने का प्रयास कर रही है.
इस लेख का विस्तृत संस्करण पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.